वर्षों से पुलिस की रडार पर था यह चेहरा, आखिरकार सहारनपुर में खत्म हुआ पीछा

22 Jun 2026

 

कई जिलों की पुलिस के लिए उसका नाम अलर्ट की तरह था। जब भी किसी बड़ी लूट, बैंक डकैती या पुलिसकर्मियों पर हमले की चर्चा होती, जांच एजेंसियों की सूची में एक नाम बार-बार सामने आता था। वर्षों तक गिरफ्तारी से बचता रहा यह अपराधी आखिरकार रविवार देर रात सहारनपुर में उत्तर प्रदेश एसटीएफ के साथ हुई मुठभेड़ में मारा गया। लेकिन यह सिर्फ एक एनकाउंटर की कहानी नहीं है। इसके पीछे कई ऐसी वारदातें हैं, जिन्होंने उसे पुलिस की हिट लिस्ट में सबसे ऊपर पहुंचा दिया था।

 

सरसावा-नकुर रोड पर एसटीएफ की टीम संदिग्ध वाहनों और अपराधियों की चेकिंग कर रही थी। इसी दौरान सूचना मिली कि इलाके में कुख्यात अपराधी मौजूद हैं। एएसपी लाल प्रताप सिंह के नेतृत्व में टीम ने घेराबंदी शुरू की। पुलिस के मुताबिक, घिरते ही बदमाशों ने फायरिंग शुरू कर दी। जवाबी कार्रवाई में एक बदमाश गोली लगने से घायल हो गया, जबकि उसका साथी अंधेरे का फायदा उठाकर मौके से फरार हो गया। घायल बदमाश को अस्पताल ले जाया गया, जहां डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया।

 

लपटों के बीच फंसे छात्र, छज्जे और छत से कूदकर बचाई जान; लखनऊ की इस इमारत में कुछ मिनटों में बदल गए हालात

 

मुठभेड़ में मारा गया बदमाश बिहार के समस्तीपुर का रहने वाला लल्लन सिंह उर्फ ललन सिंह था। उस पर उत्तर प्रदेश के विभिन्न जिलों में हत्या, बैंक डकैती, कैश वैन लूट और सरकारी हथियार लूट जैसे कई गंभीर मामले दर्ज थे। वाराणसी पुलिस कमिश्नरेट ने उस पर एक लाख रुपये का इनाम घोषित किया था, जबकि चंदौली पुलिस की ओर से 25 हजार रुपये का अतिरिक्त इनाम रखा गया था।

 

8 नवंबर 2022 वाराणसी में एक ऐसी घटना हुई, जिसके बाद पुलिस एजेंसियों ने इस अपराधी की तलाश और तेज कर दी। आरोप है कि लल्लन सिंह ने एक सब-इंस्पेक्टर को गोली मारकर उनकी सर्विस पिस्टल लूट ली थी। इस घटना के बाद वह यूपी पुलिस और एसटीएफ की सबसे वांछित सूची में शामिल हो गया था। इसके कुछ दिन पहले चंदौली में हुई गोलीबारी और लूट की घटना में भी उसका नाम सामने आया था।

 

मथुरा से पहुंचे वृद्ध की फरियाद पर CM योगी का एक्शन, कहा- अतिक्रमण कतई बर्दाश्त नहीं

 

पुलिस रिकॉर्ड के अनुसार, लल्लन सिंह पर आरोप थे:-

 

एडीजी एसटीएफ अमिताभ यश के अनुसार, लल्लन सिंह लंबे समय से एसटीएफ और यूपी पुलिस की निगरानी में था। उसके खिलाफ विभिन्न जिलों में दर्ज मामलों और लगातार फरार रहने के कारण उसे पकड़ना एजेंसियों के लिए बड़ी चुनौती बना हुआ था। मुठभेड़ में उसके मारे जाने को संगठित अपराध के खिलाफ एक महत्वपूर्ण कार्रवाई माना जा रहा है। हालांकि ऑपरेशन के दौरान उसका एक साथी भागने में सफल रहा।

 

एसटीएफ के सामने अब अगली चुनौती उस फरार साथी की तलाश है, जो मुठभेड़ के दौरान अंधेरे का फायदा उठाकर मौके से निकल गया। पुलिस की कई टीमें उसकी तलाश में लगातार दबिश दे रही हैं।