दक्षिणी दिल्ली के सैदुलाजाब में 30 मई 2026 को इमारत ढहने के मामले में पुलिस ने मकान मालिक और दो बिल्डरों समेत तीन आरोपितों के खिलाफ साकेत कोर्ट में चार्जशीट दाखिल की है। पुलिस ने यह चार्जशीट 14 अगस्त को दाखिल की। मामले में अदालत में अगली सुनवाई 22 अगस्त को प्रस्तावित है।
पुलिस के अनुसार, मकान मालिक करमवीर सिंह और बिल्डर मनीष खत्री व अविनाश के खिलाफ गैरइरादतन हत्या, मरम्मत या निर्माण कार्य के दौरान लापरवाही, लापरवाही से किसी व्यक्ति की जान या सुरक्षा को खतरे में डालने और गंभीर चोट पहुंचाने सहित भारतीय न्याय संहिता की विभिन्न धाराओं के तहत आरोप लगाए गए हैं।
30 मई को हुए हादसे में इमारत के अचानक ढहने से छह लोगों की मौत हुई थी, जबकि 12 लोग घायल हुए थे। पुलिस की चार्जशीट दाखिल होने के बाद अब इस मामले की न्यायिक कार्यवाही आगे बढ़ेगी।
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पुलिस ने सैदुलाजाब इमारत ढहने के मामले में 14 अगस्त को साकेत कोर्ट में चार्जशीट दाखिल की। इसमें कुल तीन आरोपितों के नाम शामिल किए गए हैं। इनमें मकान मालिक करमवीर सिंह तथा बिल्डर मनीष खत्री और अविनाश शामिल हैं। पुलिस ने इनके खिलाफ अलग-अलग धाराओं के तहत आरोप लगाए हैं। चार्जशीट में निर्माण और मरम्मत के दौरान कथित लापरवाही तथा उससे लोगों की जान और सुरक्षा पर पड़े असर को आधार बनाया गया है।
यह हादसा 30 मई 2026 को दक्षिणी दिल्ली के महरौली थाना क्षेत्र के सैदुलाजाब में हुआ था। इमारत के ढहने के बाद मलबे में कई लोग दब गए थे। हादसे में छह लोगों की मौत हुई थी, जबकि 12 लोग घायल हुए थे। मृतकों में चार फॉरेन मेडिकल ग्रेजुएट भी शामिल बताए गए हैं। हादसे के बाद पुलिस ने मामले की जांच शुरू की और निर्माण कार्य से जुड़े लोगों की भूमिका की जांच की। जांच के बाद अब तीन लोगों के खिलाफ अदालत में आरोपपत्र दाखिल किया गया है।
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पुलिस की जांच से संबंधित उपलब्ध जानकारी के अनुसार, जिस इमारत में हादसा हुआ वह करीब 400 वर्ग गज क्षेत्र में बनी चार मंजिला व्यावसायिक इमारत थी। इमारत करीब 15 वर्ष पुरानी बताई गई है। जानकारी के मुताबिक, पुरानी चार मंजिला इमारत के ऊपर अतिरिक्त मंजिलों का निर्माण किया जा रहा था। हादसे से पहले दो अतिरिक्त तल बनाए जा चुके थे, जबकि तीसरे तल के निर्माण का काम चल रहा था। इसी दौरान 30 मई को इमारत ढह गई।
उपलब्ध जानकारी के अनुसार, करमवीर सिंह के कुछ परिचितों ने उन्हें कमजोर हो चुकी पुरानी चार मंजिला इमारत को तोड़कर नए सिरे से निर्माण कराने की सलाह दी थी। बताया गया है कि इसके बावजूद पुरानी इमारत को गिराकर नया निर्माण नहीं कराया गया। इसके बाद निर्माण का काम बिल्डर मनीष खत्री और अविनाश को सौंपा गया। पुलिस की जांच में सामने आई जानकारी के अनुसार, इमारत के ऊपर अतिरिक्त निर्माण का काम चल रहा था। चार मंजिल की मूल इमारत के ऊपर दो तल पहले ही तैयार हो चुके थे और तीसरे तल का काम जारी था।
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मामले से जुड़ी जानकारी के अनुसार, निर्माण के दौरान पुरानी इमारत की नींव पर अतिरिक्त भार पड़ा। पुलिस के अनुसार, 30 मई को नींव कमजोर होकर फट गई और इसके बाद पूरी इमारत ढह गई। इमारत के गिरने से वहां मौजूद लोग मलबे में दब गए। राहत और बचाव अभियान के दौरान कई लोगों को बाहर निकाला गया, लेकिन छह लोगों की जान चली गई और 12 अन्य घायल हुए। हालांकि, इस मामले में आगे की कानूनी प्रक्रिया अब अदालत में आरोपों और जांच से जुड़े तथ्यों के आधार पर चलेगी।
पुलिस के अनुसार, तीनों आरोपितों के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता की विभिन्न धाराओं में कार्रवाई की गई है। इनमें गैरइरादतन हत्या, निर्माण या मरम्मत के दौरान लापरवाही, लापरवाही से किसी व्यक्ति की जान या सुरक्षा को खतरे में डालना और गंभीर चोट पहुंचाने से संबंधित प्रावधान शामिल हैं। चार्जशीट दाखिल होने के बाद अदालत में इन आरोपों पर आगे की प्रक्रिया होगी। यह स्पष्ट करना जरूरी है कि चार्जशीट में लगाए गए आरोप न्यायिक प्रक्रिया का हिस्सा हैं। आरोपों का अंतिम निर्धारण अदालत की कार्यवाही के बाद होगा।
मामले में साकेत कोर्ट में 22 अगस्त को सुनवाई होनी है। चार्जशीट दाखिल होने के बाद अदालत आरोपपत्र में दर्ज तथ्यों और आरोपों पर आगे की प्रक्रिया तय करेगी। फिलहाल तीनों आरोपितों के खिलाफ पुलिस ने अदालत में अपना आरोपपत्र दाखिल कर दिया है।
उपलब्ध विवरण के मुताबिक, व्यावसायिक उपयोग की चार मंजिला पुरानी इमारत पर अतिरिक्त निर्माण का काम कराया जा रहा था। चार मूल मंजिलों के ऊपर दो तल बनाए जा चुके थे और तीसरे तल का निर्माण जारी था। इमारत के पुराने होने और उस पर अतिरिक्त निर्माण के बीच संबंध की जांच पुलिस ने की। इसी जांच के आधार पर भवन मालिक और दोनों बिल्डरों के खिलाफ कार्रवाई की गई।