सलमान खान के ब्रेसलेट से लेकर लॉरेंस बिश्नोई विवाद तक... 'काला हिरण' फिल्म पर हाई कोर्ट ने पूछा बड़ा सवाल

06 Jul 2026

नई दिल्ली। अभिनेता सलमान खान की फिल्म 'काला हिरण: द बैटल फॉर लेगेसी' को लेकर दायर याचिका पर सुनवाई के दौरान दिल्ली हाई कोर्ट ने व्यक्तित्व अधिकार की सीमा को लेकर महत्वपूर्ण सवाल उठाए। अदालत ने पूछा कि क्या किसी व्यक्ति के निजी अधिकार इतने व्यापक हो सकते हैं कि किसी फिल्म के टीजर, प्रचार सामग्री या कथित प्रेरणा के आधार पर उसकी रिलीज पर रोक लगाई जा सके।

मामले की सुनवाई न्यायमूर्ति ज्योति सिंह की एकल पीठ ने की। अदालत ने सुनवाई के दौरान सलमान खान की ओर से पेश अधिवक्ता से कहा कि केवल यह कहना पर्याप्त नहीं होगा कि कोई फिल्म किसी व्यक्ति से प्रेरित है या उसमें उससे मिलते-जुलते कुछ तत्व दिखाई देते हैं। अदालत ने स्पष्ट किया कि यह दिखाना आवश्यक होगा कि संबंधित सामग्री में किसी व्यक्ति की पहचान और व्यक्तित्व का अनधिकृत उपयोग वास्तव में किया गया है।

सलमान खान ने अपनी याचिका में फिल्म 'काला हिरण: द बैटल फॉर लेगेसी' की रिलीज और उसके टीजर पर अंतरिम रोक लगाने की मांग की है। याचिका में फिल्म के निर्माता, निर्देशक तथा निर्माण, वित्तपोषण और वितरण से जुड़े अन्य पक्षों को प्रतिवादी बनाया गया है।

याचिका में दावा किया गया है कि फिल्म उनकी अनुमति के बिना उनकी सार्वजनिक छवि और व्यक्तित्व का व्यावसायिक उपयोग करती है, जिससे उनके व्यक्तित्व अधिकारों का उल्लंघन होता है।

सलमान खान की ओर से अदालत में कहा गया कि फिल्म वर्ष 1998 के काला हिरण शिकार मामले और गैंगस्टर लॉरेंस बिश्नोई से जुड़े विवाद से प्रेरित बताई जा रही है। याचिकाकर्ता के अनुसार, फिल्म के निर्देशक ने विभिन्न साक्षात्कारों में स्वीकार किया है कि फिल्म सलमान खान से प्रेरित है।

याचिका में यह भी कहा गया कि फिल्म में अभिनेता की पहचान से जुड़े कुछ विशिष्ट तत्व, जिनमें उनका चर्चित ब्रेसलेट भी शामिल है, दिखाए गए हैं। इसी आधार पर यह दलील दी गई कि फिल्म उनकी सार्वजनिक पहचान का उपयोग करती है और इसके लिए उनकी अनुमति नहीं ली गई।

सुनवाई के दौरान दिल्ली हाई कोर्ट ने कहा कि व्यक्तित्व अधिकारों की सीमा को स्पष्ट रूप से परिभाषित करना आवश्यक है। अदालत ने संकेत दिया कि केवल समान परिस्थितियों, घटनाओं या कुछ मिलते-जुलते प्रतीकों के आधार पर किसी फिल्म की रिलीज पर रोक लगाने का आधार स्वतः नहीं बन जाता।

अदालत ने कहा कि यदि कोई पक्ष व्यक्तित्व अधिकारों के उल्लंघन का दावा करता है, तो उसे यह स्पष्ट रूप से स्थापित करना होगा कि संबंधित फिल्म या सामग्री सीधे उस व्यक्ति की पहचान, छवि या व्यक्तित्व का अनधिकृत उपयोग कर रही है।

सुनवाई के दौरान अदालत ने किसी प्रकार की अंतिम टिप्पणी या निर्णय नहीं दिया। न्यायालय ने मामले से जुड़े कानूनी पहलुओं पर दोनों पक्षों की दलीलें सुनीं और व्यक्तित्व अधिकारों के दायरे को लेकर सवाल उठाए। मामले की सुनवाई अभी जारी है।

व्यक्तित्व अधिकार ऐसे अधिकार हैं, जिनका संबंध किसी व्यक्ति के नाम, पहचान, छवि, आवाज, हस्ताक्षर, विशिष्ट शैली या अन्य पहचान योग्य विशेषताओं के अनधिकृत व्यावसायिक उपयोग से होता है। इन अधिकारों का उद्देश्य किसी व्यक्ति की सार्वजनिक पहचान का उसकी अनुमति के बिना व्यावसायिक लाभ के लिए इस्तेमाल होने से संरक्षण देना है। हालांकि, इन अधिकारों की सीमा और उनका विभिन्न परिस्थितियों में प्रयोग न्यायालय के समक्ष प्रत्येक मामले के तथ्यों के आधार पर तय किया जाता है।