>उत्तर प्रदेश के संभल जिले में जनसांख्यिकी बदलाव पर आई समिति की रिपोर्ट ने सियासी और धार्मिक हलकों में हलचल मचा दी है। इस रिपोर्ट में दावा किया गया है कि आज़ादी के समय यहां 45% हिंदू आबादी थी, जो अब घटकर केवल 15-20% रह गई है। इस रिपोर्ट पर हनुमानगढ़ी के महंत राजू दास ने कड़ा रुख अपनाते हुए कहा कि “हिंदू ही घट रहे हैं, हिंदू ही बंट रहे हैं और हिंदू ही कट रहे हैं।”
>महंत राजू दास ने कहा कि बहुसंख्यक हिंदू समाज होने के बावजूद भारत में सबसे ज्यादा प्रताड़ना हिंदुओं को झेलनी पड़ रही है। उन्होंने कटाक्ष करते हुए कहा –
“पूरी दुनिया में 57 मुस्लिम देश हैं, जहां हिंदू, जैन, सिख, पारसी और यहूदी जैसी कई जातियां और धर्म लगभग समाप्त हो गए। यही हाल भारत में भी देखने को मिल रहा है। जहां इनकी संख्या अधिक हो रही है, वहां हिंदुओं पर लगातार दबाव और हमले बढ़ते जा रहे हैं।”
>महंत ने सवाल उठाया कि आखिरकार हिंदू मंदिरों और पवित्र स्थलों पर मस्जिद बनाने की ज़िद क्यों की जाती है? क्या इसके लिए देश में और खाली जगह नहीं है? उन्होंने कहा कि इस तरह की घटनाएं न सिर्फ धार्मिक असंतुलन पैदा करती हैं, बल्कि आपसी सौहार्द को भी कमजोर करती हैं। महंत राजू दास ने मुस्लिम समाज और उनके नेताओं पर आरोप लगाते हुए कहा कि उन्होंने कभी भी हिंदुओं को अपनाने या उनके विकास में सहयोग देने का प्रयास नहीं किया। उनका कहना था कि योजनाबद्ध तरीके से दंगे कराए जाते हैं और हिंदू धर्मगुरुओं को निशाना बनाया जाता है।
>सूत्रों के अनुसार, नवंबर 2024 में हुए दंगों के बाद गठित समिति ने अपनी रिपोर्ट मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को सौंपी है। रिपोर्ट में साफ कहा गया है कि दंगे, तुष्टिकरण की राजनीति और सुनियोजित रणनीतियों ने संभल की जनसांख्यिकी (Demography) को बदल डाला है। महंत राजू दास ने सरकार से मांग की कि ऐसे मामलों में सख्त कार्रवाई हो और हिंदुओं की सुरक्षा व अस्तित्व को सुनिश्चित करने के लिए ठोस कदम उठाए जाएं। उन्होंने चेतावनी दी कि अगर हिंदुओं के साथ अन्याय यूं ही चलता रहा तो स्थिति और अधिक गंभीर हो सकती है।