>कभी सांप्रदायिक सौहार्द के नाम पर पहचाने जाने वाले संभल का सच बेहद भयावह है। न्यायिक जांच आयोग की रिपोर्ट ने इस जिले की उन दर्दनाक परतों को उजागर किया है, जिनमें हिंदू परिवारों के पलायन, युवतियों के उत्पीड़न, लव-जिहाद, जबरन निकाह, लूटपाट और दंगों का काला सच सामने आया है।
>जांच रिपोर्ट के अनुसार आजादी के समय संभल में हिंदुओं की आबादी करीब 45% थी, लेकिन 2011 की जनगणना में यह घटकर मात्र 22% रह गई। सूत्रों के मुताबिक मौजूदा समय में यह संख्या और भी कम होकर लगभग 15% तक सिमट गई है। रिपोर्ट में साफ लिखा गया है कि हिंसा, दंगों और बेटियों पर हमलों की वजह से परिवारों को संभल छोड़ना पड़ा।
>जांच आयोग ने स्वीकार किया है कि हिंदू परिवारों की बेटियों को निशाना बनाया गया। उन्हें अगवा कर दुष्कर्म, जबरन निकाह और धर्मांतरण जैसे मामलों का सामना करना पड़ा। समाज को चिढ़ाने और भय का माहौल बनाने के लिए मुस्लिम युवकों की ओर से भव्य दावत-ए-वलीमा का आयोजन किया जाता था। कई पीड़ित परिवार आज भी भय के कारण अपनी पीड़ा खुलकर नहीं बता पाते।
>खौफनाक घटनाओं की परतें
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2013-14 का मामला: एक पंजाबी परिवार की एमबीए कर चुकी बेटी को लव-जिहाद का शिकार बनाया गया। निकाह के बाद उसका नाम बदलकर सिदरा रख दिया गया और बड़े पैमाने पर वलीमा का आयोजन किया गया।
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2005 की हत्या: एक मकान मालिक की घर में घुसकर हत्या कर दी गई, क्योंकि उसने एक हिंदू परिवार की बेटी से छेड़छाड़ का विरोध किया था।
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1978 का दंगा: बनवारी लाल गोयल को मुसलमानों ने बेरहमी से मार डाला। पहले उनके हाथ-पैर काटे गए और फिर गला रेत दिया गया। इस घटना के बाद रस्तोगी समुदाय के कई परिवारों ने संभल से पलायन कर दिया।
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>संभल का नाम आतंकी संगठनों से भी जुड़ चुका है। रिपोर्ट में बताया गया कि अलकायदा, हिजबुल मुजाहिदीन और तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान से यहां के कई युवक जुड़े रहे। इनमें मौलाना आसिम उमर और शाहरुख जैसे नाम शामिल हैं, जो सीधे वैश्विक आतंकी नेटवर्क का हिस्सा बने।
>जांच आयोग ने स्पष्ट कहा है कि संभल में कभी वास्तविक सांप्रदायिक सद्भाव नहीं रहा। सब दिखावटी था। आयोग ने इस भयावह स्थिति का गहन शोध कर वास्तविक आकलन करने और पीड़ितों को न्याय दिलाने की सिफारिश की है।