सपा नेता बोले NDA से टूटेंगे पिछड़ों के हक खाने वाले दल

27 Aug 2025


>उत्तर प्रदेश की राजनीति में एनडीए गठबंधन को लेकर हलचल तेज हो गई है। निषाद पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष और प्रदेश सरकार में कैबिनेट मंत्री संजय निषाद ने भाजपा के साथ रिश्तों पर नाराजगी जाहिर कर राजनीतिक भूचाल ला दिया है। उनके इस बयान पर समाजवादी पार्टी ने सीधा निशाना साधते हुए बड़ा दावा किया है कि 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले पिछड़ों के नाम पर राजनीति करने वाले दल एनडीए से अलग हो जाएंगे।


>सपा प्रवक्ता फखरुल हसन चांद ने एक्स पर लिखा कि भाजपा के सहयोगी दल जैसे निषाद पार्टी और राजभर जैसे नेता चुनाव नजदीक आने पर "बागी" तेवर दिखा रहे हैं। उन्होंने कहा कि दिसंबर 2026 में आचार संहिता लग जाएगी और जैसे-जैसे चुनाव करीब आएगा, वैसे-वैसे एनडीए में शामिल दल जो पिछड़ों के हक और आरक्षण की राजनीति करते हैं, वे भाजपा से दूरी बना लेंगे। चांद ने इसे "पीडीए की ताकत" करार दिया।


>गोरखपुर में पत्रकारों से बातचीत करते हुए संजय निषाद ने भाजपा को गठबंधन धर्म निभाने की नसीहत दी। उन्होंने साफ कहा कि भाजपा को अपने सहयोगी दलों—निषाद पार्टी, आरएलडी, अपना दल और सुभासपा—पर भरोसा करना चाहिए। अगर भाजपा को लगता है कि इन दलों से फायदा नहीं हो रहा, तो गठबंधन तोड़ देना चाहिए।


>संजय निषाद ने भाजपा पर सवाल उठाते हुए कहा —


>उन्होंने यह भी कहा कि 2024 के लोकसभा चुनाव में उनकी पार्टी को कुछ नहीं मिला, लेकिन 2027 विधानसभा चुनाव में जनता सबक सिखाएगी।


>संजय निषाद लंबे समय से अपने समाज और समुदाय के लिए राजनीतिक हिस्सेदारी की मांग कर रहे हैं। उनका मानना है कि भाजपा सहयोगी दलों को सम्मान और उचित प्रतिनिधित्व नहीं दे रही। यही कारण है कि अब गठबंधन की मजबूती पर सवाल उठने लगे हैं।