>बेहतर रोगी देखभाल और अस्थि स्वास्थ्य अनुसंधान को नई दिशा देने के लिए एसजीपीजीआईएमएस के एडवांस डायबिटिक सेंटर में अत्याधुनिक डुअल-एनर्जी एक्स-रे एब्जॉर्पियोमेट्री (डेक्सा) मशीन स्थापित की गई है। संस्थान के निदेशक पद्मश्री प्रो. आर. के. धीमन ने शुक्रवार को एडीसी भवन की चौथी मंजिल पर इस नई मशीन (मॉडल होराइजन) का उद्घाटन किया।
>प्रो. धीमन ने कहा कि यह तकनीक ऑस्टियोपोरोसिस (कमजोर हड्डियाँ) और अन्य मेटाबॉलिक अस्थि रोगों के शीघ्र एवं सटीक निदान में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी। उन्होंने बताया कि यह मशीन न केवल हड्डियों की मजबूती की जाँच करेगी बल्कि भविष्य में फ्रैक्चर के जोखिम, शरीर में वसा और मांसपेशियों की मात्रा का भी आकलन कर सकेगी।
>भारत में ऑस्टियोपोरोसिस एक गंभीर स्वास्थ्य चुनौती है। आँकड़ों के अनुसार, लगभग 18-20% भारतीय वयस्क इससे प्रभावित हैं, वहीं रजोनिवृत्ति के बाद की करीब एक-तिहाई महिलाएँ इस बीमारी की चपेट में आती हैं। नई मशीन की मदद से इस समस्या की पहचान समय रहते की जा सकेगी, जिससे विकलांगता और जीवन-गुणवत्ता में गिरावट को रोका जा सकेगा।
>विशेषज्ञों का कहना है कि डेक्सा मशीन रीढ़ की हड्डी में छिपे फ्रैक्चर और कूल्हे की अस्थियों में कमजोरी की सटीक रिपोर्ट देती है। यह बुजुर्गों, बच्चों, रजोनिवृत्ति के बाद महिलाओं, मधुमेह और हार्मोनल विकारों से पीड़ित मरीजों के लिए अत्यंत उपयोगी है। खास बात यह है कि इस मशीन में विकिरण की मात्रा सामान्य एक्स-रे की तुलना में बहुत कम होती है।
>एसजीपीजीआई में इससे पहले 1997 में पहली डेक्सा मशीन लगाई गई थी। बढ़ती मरीज संख्या और आधुनिक तकनीक की आवश्यकता को देखते हुए दूसरी मशीन की स्थापना की गई है। अब उत्तर प्रदेश ही नहीं बल्कि पड़ोसी राज्यों के मरीज भी इस सुविधा का लाभ उठा सकेंगे।
>इस अवसर पर मुख्य चिकित्सा अधीक्षक डॉ. देवेंद्र गुप्ता, एंडोक्राइनोलॉजी विभागाध्यक्ष डॉ. प्रीति दबडगांव, प्रो. डॉ. सुभाष यादव, डॉ. अंबिका टंडन, डॉ. विभूति मोहंता, बायो-स्टैटिस्टिक्स विभागाध्यक्ष डॉ. उत्तम सिंह और सामग्री प्रबंधन विभाग के संयुक्त निदेशक प्रकाश सिंह सहित कई संकाय सदस्य उपस्थित रहे।