IAPSCON 2026 में SGPGIMS लखनऊ का दबदबा, डॉक्टरों को मिले कई राष्ट्रीय पुरस्कार

27 Sep 2026

लखनऊ: संजय गांधी स्नातकोत्तर आयुर्विज्ञान संस्थान लखनऊ के पीडियाट्रिक सर्जिकल सुपर स्पेशियलिटीज विभाग की उपलब्धियां राष्ट्रीय स्तर के एक चिकित्सा सम्मेलन में सामने आई हैं। बेंगलुरु में आयोजित IAPSCON 2026 में विभाग के फैकल्टी सदस्यों और रेजिडेंट डॉक्टरों ने विभिन्न शोध और अकादमिक प्रस्तुतियों में पुरस्कार हासिल किए।

सम्मेलन में विभाग से जुड़े डॉक्टरों को नेतृत्व, शोध और क्लिनिकल कार्यों से संबंधित अलग-अलग श्रेणियों में सम्मान मिला। इनमें विभागाध्यक्ष प्रो. बसंत कुमार का राष्ट्रीय स्तर का नेतृत्व सम्मान और प्रो. अंकुर मंडेलिया के दो शोधपत्रों को मिले प्रथम पुरस्कार प्रमुख रहे।

IAPSCON 2026 में SGPGIMS के पीडियाट्रिक सर्जिकल सुपर स्पेशियलिटीज विभाग के विभागाध्यक्ष प्रो. बसंत कुमार को “National Leadership Award 2026 in Paediatric Surgery” से सम्मानित किया गया। उपलब्ध जानकारी के अनुसार यह सम्मान पीडियाट्रिक सर्जरी के क्षेत्र में उनके योगदान के साथ सर्जिकल केयर, शिक्षण, शोध और अकादमिक नेतृत्व से जुड़े कार्यों के लिए प्रदान किया गया। यह पुरस्कार सम्मेलन में विभाग की प्रमुख उपलब्धियों में शामिल रहा।

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विभाग के प्रो. अंकुर मंडेलिया ने सम्मेलन के वैज्ञानिक सत्रों में प्रस्तुत किए गए अपने दो शोधपत्रों के लिए दो प्रथम पुरस्कार हासिल किए। उनका पहला शोध बच्चों में एक्स्ट्राहेपेटिक पोर्टल वेनस ऑब्स्ट्रक्शन (EHPVO) के उपचार में की जाने वाली पोर्टो-सिस्टमिक शंट सर्जरी के बाद किडनी पर पड़ने वाले प्रभाव से संबंधित था। दूसरा शोध बच्चों में इंट्राऑपरेटिव एंटेरोस्कोपी की उपयोगिता और सुरक्षा पर केंद्रित था। दोनों शोधों को सम्मेलन के वैज्ञानिक सत्र में प्रथम पुरस्कार मिलना विभाग के लिए प्रमुख अकादमिक उपलब्धियों में शामिल रहा।

IAPSCON 2026 में विभाग के रेजिडेंट डॉक्टरों ने भी विभिन्न शोध विषयों पर पुरस्कार हासिल किए। इनमें डॉ. (लेफ्टिनेंट कर्नल) राहुल गोयल का सम्मान प्रमुख रहा। डॉ. राहुल गोयल को “UC Chakraborty Gold Medal for Best Research Paper 2026” से सम्मानित किया गया। उनका शोध बच्चों में एक्स्ट्राहेपेटिक पोर्टल वेन ऑब्स्ट्रक्शन से संबंधित था। अध्ययन में स्प्लीन की शीयर-वेव इलास्टोग्राफी की मदद से वैरिक्स की गंभीरता और पोर्टल प्रेशर का अनुमान लगाने पर ध्यान केंद्रित किया गया था।

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विभाग की MCh रेजिडेंट डॉ. शुचि वार्ष्णेय को भी शोध के लिए प्रथम पुरस्कार मिला। उनका अध्ययन बच्चों में पाए जाने वाले एक्स्ट्रागोनाडल जर्म सेल ट्यूमर के 14 वर्षों के अनुभव पर आधारित था। इस अध्ययन में संस्थान में इस बीमारी से जुड़े अनुभव और संबंधित चिकित्सकीय जानकारी का विश्लेषण किया गया था।

MCh रेजिडेंट डॉ. आनंद कुमार मौर्य ने शिशुओं में रेक्टल एवं हिंडगट डुप्लीकेशन की विभिन्न प्रस्तुतियों और उनके सर्जिकल प्रबंधन पर शोध प्रस्तुत किया। इस शोध को भी सम्मेलन में प्रथम पुरस्कार मिला। रेक्टल और हिंडगट डुप्लीकेशन बच्चों में पाचन तंत्र से जुड़ी जन्मजात स्थितियों में शामिल हैं और इनके उपचार में सर्जिकल प्रबंधन की आवश्यकता हो सकती है।

MCh रेजिडेंट डॉ. पूजा प्रजापति ने सम्मेलन में दो शोधों के लिए दो द्वितीय पुरस्कार हासिल किए। उनका पहला शोध बिलियरी एट्रेसिया में नए बायोमार्कर्स और लिवर शीयर-वेव इलास्टोग्राफी के जरिए बिना ऑपरेशन के लिवर फाइब्रोसिस के आकलन पर केंद्रित था। दूसरा शोध बच्चों में पाए जाने वाले दुर्लभ पैंक्रियाटिक ट्यूमर सॉलिड स्यूडोपैपिलरी एपिथीलियल नियोप्लाज्म के सर्जिकल परिणामों से संबंधित था। इस तरह डॉ. पूजा प्रजापति ने सम्मेलन में विभाग के खाते में दो द्वितीय पुरस्कार जोड़े।

IAPSCON 2026 में SGPGIMS के पीडियाट्रिक सर्जिकल सुपर स्पेशियलिटीज विभाग से प्रस्तुत किए गए शोधों में पीडियाट्रिक सर्जरी से जुड़े कई विषय शामिल रहे। इनमें पोर्टल हाइपरटेंशन, हेपेटोबिलियरी रोग, पैंक्रियाटिक ट्यूमर, गैस्ट्रोइंटेस्टाइनल जन्मजात विकृतियां और बच्चों में होने वाले कैंसर से जुड़े विषय शामिल थे। शोध विषयों में सर्जिकल उपचार के परिणामों के साथ-साथ बीमारी के आकलन और ऑपरेशन के दौरान उपयोग होने वाली तकनीकों से संबंधित पहलुओं पर भी अध्ययन किया गया।

IAPSCON 2026 में मिली उपलब्धियों में फैकल्टी और रेजिडेंट डॉक्टरों दोनों की भागीदारी रही। एक ओर विभागाध्यक्ष को नेतृत्व के लिए राष्ट्रीय सम्मान मिला, वहीं फैकल्टी स्तर पर शोधपत्रों को प्रथम पुरस्कार मिले। रेजिडेंट डॉक्टरों के शोधों को भी विभिन्न पुरस्कार मिलने से सम्मेलन में विभाग की अकादमिक भागीदारी सामने आई। इन शोधों का दायरा बच्चों में जटिल सर्जिकल बीमारियों, जन्मजात विकृतियों, लिवर और पोर्टल सिस्टम से जुड़ी समस्याओं तथा दुर्लभ ट्यूमर जैसी स्थितियों तक रहा।

SGPGIMS के निदेशक पद्मश्री प्रोफेसर आर.के. धीमन ने पुरस्कार विजेताओं, शोधकर्ताओं और रेजिडेंट डॉक्टरों को उनकी उपलब्धियों के लिए बधाई दी। संस्थान की ओर से दी गई जानकारी के अनुसार, उन्होंने इन उपलब्धियों को विभाग के टीम वर्क, निरंतर शोध और रोगी देखभाल के प्रति प्रतिबद्धता से जोड़ा।

SGPGIMS का पीडियाट्रिक सर्जिकल सुपर स्पेशियलिटीज विभाग बच्चों में सर्जरी की आवश्यकता वाली जटिल बीमारियों के उपचार के साथ शोध और अकादमिक गतिविधियों में भी काम करता है। विभाग की ओर से उपलब्ध कराई गई जानकारी के अनुसार, क्लिनिकल कार्य के साथ शोध और नवाचार पर भी ध्यान दिया जाता है। शोध से प्राप्त जानकारियों और आधुनिक सर्जिकल तकनीकों को रोगी देखभाल से जोड़ने पर विभाग का जोर है। IAPSCON 2026 में विभाग से जुड़े फैकल्टी और रेजिडेंट डॉक्टरों को मिले पुरस्कार इसी सम्मेलन में प्रस्तुत किए गए विभिन्न शोध और अकादमिक कार्यों के आधार पर प्रदान किए गए।