वाराणसी से लखनऊ जाते समय शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती शनिवार को सुल्तानपुर जिले के लंभुआ कस्बे पहुंचे। यहां हनुमान मंदिर में पूजन-अर्चन के बाद उन्होंने जनप्रतिनिधियों की भूमिका को लेकर टिप्पणी की।
मीडिया से बातचीत में स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने कहा कि आम जनता की आवाज सदन में पर्याप्त रूप से नहीं उठाई जा रही है। उन्होंने कहा कि जो जनप्रतिनिधि जनता की भावनाओं और मुद्दों को सदन में नहीं उठा पाते, वे अपने दायित्वों का सही निर्वहन नहीं कर रहे हैं।
उन्होंने कहा कि समाज में विभिन्न मुद्दों पर चर्चा की आवश्यकता है और जनप्रतिनिधियों की जिम्मेदारी है कि वे जनता की अपेक्षाओं को लोकतांत्रिक मंचों तक पहुंचाएं।
स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने अपने वक्तव्य में यह भी कहा कि समाज और धर्म के नाम पर हो रही गतिविधियों पर गंभीरता से विचार करने की जरूरत है। उन्होंने गाय से जुड़े विषयों का उल्लेख करते हुए कहा कि इस मुद्दे पर वास्तविक स्थिति और नीतियों पर स्पष्टता होनी चाहिए।
इस दौरान उन्होंने मुख्यमंत्री के उस कथन का भी जिक्र किया, जिसमें समाज में कुछ लोगों को ‘कालनेमि’ बताया गया था। लंभुआ में मंदिर दर्शन और संवाद के बाद शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद अपने निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार लखनऊ के लिए रवाना हो गए।