भारतीय एमएसएमई वैश्विक अनिश्चितताओं और पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष जैसे बाहरी दबावों के बावजूद मजबूत बने हुए हैं। सिडबी द्वारा जारी अप्रैल-जून 2026 के एमएसएमई आउटलुक सर्वे में यह निष्कर्ष सामने आया है कि कारोबारी विश्वास सकारात्मक बना हुआ है और अधिकांश उद्यम आने वाले वर्ष के कारोबार को लेकर आशावादी हैं।
सर्वे के अनुसार लागत में वृद्धि, मांग से जुड़ी चिंताएं और कुशल श्रमिकों की उपलब्धता जैसी चुनौतियां अभी भी मौजूद हैं। इसके बावजूद बिक्री, मुनाफे और वित्तीय उपलब्धता में स्थिरता देखने को मिली है।
सर्वे के अनुसार अप्रैल-जून 2026 तिमाही में एमएसएमई बिजनेस कॉन्फिडेंस इंडेक्स (एम-बीसीआई) 59.3 दर्ज किया गया। पिछली तिमाही में यह 59.8 था। यह सूचकांक अभी भी 50 से ऊपर बना हुआ है, जो दर्शाता है कि कारोबारी विश्वास विस्तार की स्थिति में बना हुआ है।
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सिडबी के अनुसार जुलाई-सितंबर 2026 तिमाही के लिए एमएसएमई बिजनेस एक्सपेक्टेशंस इंडेक्स (एम-बीईआई) 60.1 दर्ज किया गया है। वहीं अप्रैल-जून 2027 तक इसके बढ़कर 61.2 तक पहुंचने का अनुमान है। इससे संकेत मिलता है कि अधिकांश एमएसएमई उद्यम आने वाले वर्ष में कारोबार के बेहतर रहने की उम्मीद कर रहे हैं।
सर्वे में विनिर्माण, व्यापार और सेवा तीनों क्षेत्रों में बिक्री का रुझान सकारात्मक पाया गया। हालांकि विनिर्माण और सेवा क्षेत्र की तुलना में व्यापार क्षेत्र का प्रदर्शन अपेक्षाकृत बेहतर रहा, जहां कम उद्यमों ने नकारात्मक कारोबारी स्थिति की आशंका जताई। मुनाफे के मामले में भी अधिकांश उद्यमों ने स्थिर स्थिति की जानकारी दी।
सर्वे के अनुसार विनिर्माण क्षेत्र के 21 प्रतिशत उद्यमों ने शुद्ध लाभ मार्जिन बढ़ने की बात कही, व्यापार क्षेत्र के 20 प्रतिशत उद्यमों ने लाभ में सुधार दर्ज किया, सेवा क्षेत्र के 22 प्रतिशत उद्यमों ने लाभ मार्जिन बेहतर होने की जानकारी दी। हालांकि 20 से 30 प्रतिशत उद्यमों ने लाभ मार्जिन में गिरावट की भी सूचना दी, जिससे संकेत मिलता है कि कुछ उद्योग अभी भी लागत संबंधी दबाव झेल रहे हैं।
सर्वे में कुशल श्रमिकों की उपलब्धता को प्रमुख चुनौतियों में शामिल किया गया है। करीब 20 प्रतिशत विनिर्माण और सेवा क्षेत्र के उद्यमों ने बताया कि प्रशिक्षित श्रमिकों की उपलब्धता पहले की तुलना में कमजोर हुई है। हालांकि अधिकांश उद्यमों ने श्रमिक उपलब्धता को स्थिर या बेहतर बताया, लेकिन एक वर्ग ने आने वाले समय में भी कौशल की कमी बने रहने की संभावना व्यक्त की।
कार्यशील पूंजी और अन्य वित्तीय संसाधनों की उपलब्धता अधिकांश क्षेत्रों में स्थिर रही। सर्वे के अनुसार-
- विनिर्माण क्षेत्र ने आगे चलकर कार्यशील पूंजी की उपलब्धता में कुछ नरमी की संभावना जताई।
- सेवा और व्यापार क्षेत्र ने कार्यशील पूंजी की उपलब्धता बेहतर होने की उम्मीद व्यक्त की।
- समग्र वित्तीय उपलब्धता को लेकर भी व्यापार क्षेत्र सबसे अधिक आशावादी रहा।
हालांकि सेवा क्षेत्र में अगले एक वर्ष के लिए बेहतर कारोबारी स्थिति की उम्मीद रखने वाले उद्यमों का प्रतिशत 44 से घटकर 32 प्रतिशत रह गया, फिर भी कुल मिलाकर कारोबारी माहौल सकारात्मक बना हुआ है।