उत्तर प्रदेश के सोनभद्र जिले में मादक पदार्थों की तस्करी के खिलाफ चलाए जा रहे अभियान के तहत एएनटीएफ की लखनऊ यूनिट और हाथीनाला पुलिस ने संयुक्त कार्रवाई करते हुए एक एंबुलेंस से 81.300 किलोग्राम अवैध गांजा बरामद किया है। पुलिस के अनुसार, गांजे को एंबुलेंस के केबिन के फर्श के नीचे एल्यूमीनियम की चादर से बनाए गए एक गुप्त खाने में छिपाकर रखा गया था।
यह कार्रवाई ‘ऑपरेशन शुद्धि’ के तहत हाथीनाला तिराहे पर की गई। पुलिस ने मामले में एंबुलेंस चालक समीर सरकार को गिरफ्तार किया है। बरामद गांजे की कीमत करीब 41 लाख रुपये आंकी गई है, जबकि तस्करी में इस्तेमाल एंबुलेंस की कीमत करीब 7 लाख रुपये बताई गई है। पुलिस के अनुसार, गांजा और वाहन समेत करीब 48 लाख रुपये की संपत्ति जब्त की गई है।
जानकारी के अनुसार, एएनटीएफ लखनऊ यूनिट को 24 और 25 अगस्त की देर रात सूचना मिली थी कि अंतरराज्यीय स्तर पर गांजे की एक बड़ी खेप ओडिशा से एंबुलेंस के जरिए उत्तर प्रदेश लाई जा रही है। सूचना मिलने के बाद एएनटीएफ टीम सोनभद्र पहुंची और स्थानीय पुलिस के साथ मिलकर दुद्धी मार्ग पर निगरानी और जांच बढ़ाई गई।
पुलिस के अनुसार, हाथीनाला तिराहे के पास संदिग्ध पश्चिम बंगाल नंबर की एक एंबुलेंस दिखाई दी। टीम ने वाहन को रुकने का संकेत दिया। बताया गया कि चालक ने वाहन को आगे भगाकर निकलने की कोशिश की, लेकिन मौके पर मौजूद पुलिसकर्मियों ने घेराबंदी कर उसे रोक लिया।
इसके बाद एंबुलेंस की तलाशी शुरू की गई। पहली नजर में वाहन सामान्य एंबुलेंस जैसा दिखाई दे रहा था, लेकिन जांच के दौरान उसके केबिन के फर्श में बने एक विशेष गुप्त खाने का पता चला।
पुलिस के मुताबिक, एंबुलेंस के केबिन के फर्श में एल्यूमीनियम की चादर के नीचे एक अलग से गुप्त केबिन तैयार किया गया था। इसी हिस्से में गांजे की खेप छिपाई गई थी।
गुप्त खाने को खोलने पर खाकी टेप से लिपटे 36 बंडल मिले। इनमें कुल 81.300 किलोग्राम अवैध गांजा रखा हुआ था। पुलिस ने गांजे को जब्त कर वाहन और अन्य सामान को भी कब्जे में ले लिया।
पुलिस के अनुसार, एंबुलेंस का इस्तेमाल मादक पदार्थ की इस खेप को एक स्थान से दूसरे स्थान तक पहुंचाने के लिए किया जा रहा था। वाहन के सामान्य हिस्से के नीचे अलग जगह तैयार किए जाने के कारण तस्करी की खेप को छिपाने की कोशिश की गई थी।
पुलिस ने मौके से एंबुलेंस चालक 35 वर्षीय समीर सरकार को गिरफ्तार किया। उसके बारे में बताया गया कि वह पश्चिम बंगाल के मुर्शिदाबाद जिले के फरक्का क्षेत्र की निशीन्दरा कॉलोनी का निवासी है।
गिरफ्तारी के दौरान उसके पास से एक मोबाइल फोन और नकदी भी बरामद की गई। पुलिस ने बरामद सामान को मामले की कार्रवाई में शामिल करते हुए आरोपी से पूछताछ की। आरोपी से पूछताछ के आधार पर पुलिस ने गांजे की खेप के स्रोत और उसके संभावित गंतव्य के बारे में जानकारी जुटाई।
पूछताछ में समीर सरकार ने पुलिस को बताया कि गांजे की यह खेप ओडिशा के संबलपुर से एंबुलेंस में लोड कराई गई थी। इसके बाद इसे उत्तर प्रदेश के सुल्तानपुर ले जाया जा रहा था।
बताया गया कि सुल्तानपुर पहुंचने के बाद फोन के जरिए आगे के निर्देश मिलने थे। इसके बाद एंबुलेंस और उसमें लदा माल संबंधित व्यक्ति को सौंपा जाना था और बदले में चालक को रकम मिलने की बात पूछताछ में सामने आई।
पुलिस के अनुसार, समीर ने यह भी बताया कि वह इस काम में अकेला नहीं था और उसके साथ एक अन्य व्यक्ति के शामिल होने की जानकारी दी गई। मामले की जांच में पुलिस अब कथित नेटवर्क से जुड़े अन्य लोगों की भूमिका के बारे में जानकारी जुटा रही है।
पुलिस के मुताबिक, बरामद 81.300 किलोग्राम गांजे का अनुमानित मूल्य करीब 41 लाख रुपये है। तस्करी में इस्तेमाल एंबुलेंस की कीमत करीब 7 लाख रुपये बताई गई है। गांजे और वाहन के अलावा मोबाइल फोन तथा नकदी भी बरामद की गई। इस तरह पुलिस ने कुल मिलाकर करीब 48 लाख रुपये की संपत्ति जब्त की है। जब्त सामान को मामले की जांच के तहत शामिल किया गया है।
मामले में हाथीनाला थाने में एनडीपीएस एक्ट के तहत मुकदमा दर्ज किया गया है। पुलिस के अनुसार, बरामदगी, गिरफ्तारी और पूछताछ के आधार पर आगे की कानूनी कार्रवाई की जा रही है।
जांच एजेंसियां अब इस बात की पड़ताल कर रही हैं कि गांजे की खेप किस नेटवर्क के जरिए संबलपुर से उत्तर प्रदेश पहुंचाई गई और सुल्तानपुर में इसे किसे सौंपा जाना था।
यह कार्रवाई एएनटीएफ लखनऊ यूनिट और हाथीनाला पुलिस की संयुक्त टीम ने की। सूचना मिलने के बाद दोनों टीमों ने समन्वय कर हाथीनाला तिराहे पर निगरानी बढ़ाई और संदिग्ध वाहन को रोककर तलाशी ली।
पुलिस के अनुसार, मामले में गिरफ्तार चालक से मिली जानकारी के आधार पर तस्करी नेटवर्क से जुड़े अन्य लोगों की तलाश की जा रही है। साथ ही गांजे की खेप के पूरे परिवहन मार्ग और संभावित रिसीवर की पहचान के संबंध में जांच जारी है।