1.4 अरब साल पुराना जीवन अब बनेगा विश्व धरोहर: सोनभद्र का सलखन फॉसिल्स पार्क यूनेस्को की सूची में शामिल

22 Jun 2025


>उत्तर प्रदेश के सोनभद्र जिले का सलखन फॉसिल्स पार्क, जिसे दुनिया का सबसे प्राचीन जीवाश्म स्थल माना जाता है, अब यूनेस्को की वर्ल्ड हेरिटेज टेंटेटिव लिस्ट में शामिल हो गया है। यह ऐतिहासिक उपलब्धि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की इको-टूरिज्म नीतियों और प्रदेश सरकार के समर्पित प्रयासों का प्रत्यक्ष प्रमाण है।


>1.4 अरब वर्ष पुराने स्ट्रॉमैटोलाइट्स (Stromatolites) से भरे इस जीवाश्म पार्क ने पृथ्वी पर जीवन की सबसे प्रारंभिक झलक को संरक्षित किया है। यह वही जीवाश्म हैं, जो धरती पर जीवन की शुरुआत की वैज्ञानिक गाथा बयां करते हैं।


>सलखन फॉसिल्स पार्क, रॉबर्ट्सगंज से 15 किलोमीटर दूर, विंध्य पर्वत श्रृंखला और कैमूर वन्यजीव अभयारण्य के बीच स्थित है। यह क्षेत्र 25 हेक्टेयर में फैला हुआ है और यहां पाए जाने वाले बलुआ पत्थरों में संरक्षित जीवाश्म 1.4 अरब वर्ष पुराने हैं, जो विश्व के अन्य जीवाश्म स्थलों से कहीं अधिक प्राचीन हैं।

 उदाहरण के लिए:


>इसके मुकाबले, सलखन पार्क में मिले जीवाश्म धरती के सबसे पुराने जीवन के साक्ष्य हैं, जो इसे विश्व धरोहर बनने का सर्वोत्तम दावेदार बनाते हैं।

योगी सरकार के प्रयासों से मिली पहचान


>मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में उत्तर प्रदेश इको टूरिज्म डेवलपमेंट बोर्ड पिछले एक साल से सलखन फॉसिल्स पार्क को यूनेस्को सूची में शामिल कराने के लिए प्रयासरत था। इसके तहत लखनऊ स्थित बीरबल साहनी पुरावनस्पति विज्ञान संस्थान के साथ 26 जून 2024 को एमओयू साइन किया गया था।


>इस वैज्ञानिक अध्ययन में यह प्रमाणित हुआ कि सलखन के जीवाश्म सूक्ष्मजीवों से बने परतदार स्ट्रक्चर हैं, जो पृथ्वी पर जीवन के प्रारंभिक चरणों को दर्शाते हैं। इन्हीं आधारों पर यूनेस्को की वेबसाइट पर यह स्थल अब टेंटेटिव सूची में दर्ज है।

वेबसाइट लिंक:

https://whc.unesco.org/en/tentativelists/6842/

क्या है आगे की प्रक्रिया?


>पर्यटन निदेशक प्रखर मिश्र के अनुसार, किसी भी धरोहर को यूनेस्को की स्थायी सूची में शामिल करने से पहले टेंटेटिव लिस्ट में पंजीकरण जरूरी होता है। अब सलखन फॉसिल्स पार्क के लिए डोजियर तैयार किया जा रहा है, जिसे भारत सरकार के माध्यम से यूनेस्को को भेजा जाएगा। अनुमान है कि आगामी दो वर्षों में यह स्थल स्थायी विश्व धरोहर के रूप में मान्यता प्राप्त कर सकता है।

पर्यटन को मिलेगी नई दिशा


>इस वैश्विक मान्यता से न केवल उत्तर प्रदेश को अंतरराष्ट्रीय पहचान मिलेगी, बल्कि राज्य में विदेशी पर्यटकों की आवक भी बढ़ेगी। यह स्थल इको टूरिज्म के क्षेत्र में एक वैज्ञानिक, शैक्षिक और सांस्कृतिक धरोहर के रूप में उभरेगा। साथ ही, यह स्थानीय रोजगार और क्षेत्रीय विकास का केंद्र भी बनेगा।