भारत की सर्वोच्च अदालत में न्यायाधीशों की नियुक्ति को लेकर सोमवार को महत्वपूर्ण प्रशासनिक प्रक्रिया पूरी हुई। सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम की ओर से भेजी गई तीन नए न्यायाधीशों की नियुक्ति संबंधी सिफारिश पर राष्ट्रपति की मंजूरी मिल गई है। इसके बाद अब तीनों नए न्यायाधीश पद की शपथ लेने की प्रक्रिया में आगे बढ़ेंगे।
राष्ट्रपति की मंजूरी के बाद सुप्रीम कोर्ट में नियुक्ति की प्रक्रिया का अगला चरण शपथ ग्रहण है। तीनों न्यायाधीश मंगलवार, 6 अक्टूबर 2026 को सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीश के रूप में शपथ ग्रहण करेंगे।
सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम की ओर से तीन नए न्यायाधीशों की नियुक्ति के लिए भेजी गई सिफारिश को राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने सोमवार, 5 अक्टूबर 2026 को मंजूरी दे दी। राष्ट्रपति की मंजूरी मिलने के साथ ही तीनों न्यायाधीशों की नियुक्ति की प्रक्रिया में महत्वपूर्ण चरण पूरा हो गया है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, कॉलेजियम ने इन तीनों नामों को सुप्रीम कोर्ट में न्यायाधीश के तौर पर नियुक्त किए जाने के लिए भेजा था।
राष्ट्रपति से नियुक्ति को मंजूरी मिलने के बाद अब तीनों नए न्यायाधीश मंगलवार, 6 अक्टूबर 2026 को सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीश पद की शपथ लेंगे। शपथ ग्रहण के बाद तीनों न्यायाधीश औपचारिक रूप से सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीश के रूप में कार्यभार संभालेंगे। इस नियुक्ति के साथ सर्वोच्च अदालत के न्यायाधीशों की पीठ में तीन नए सदस्य शामिल होंगे।
सुप्रीम कोर्ट में न्यायाधीशों की नियुक्ति की प्रक्रिया में कॉलेजियम की सिफारिश महत्वपूर्ण चरण होती है। इस मामले में सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम की ओर से तीन नाम नियुक्ति के लिए भेजे गए थे। इसके बाद राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने 5 अक्टूबर को इन नियुक्तियों को मंजूरी दी। अब शपथ ग्रहण के साथ तीनों न्यायाधीश सुप्रीम कोर्ट की न्यायिक कार्यप्रणाली का हिस्सा बन जाएंगे।
इस नियुक्ति से सुप्रीम कोर्ट में तीन नए न्यायाधीश जुड़ेंगे। हालांकि, उपलब्ध जानकारी में इन तीनों न्यायाधीशों के नाम, उनकी वर्तमान न्यायिक जिम्मेदारी या उनके पूर्व पदों का विवरण नहीं दिया गया है। इसलिए उपलब्ध तथ्यों के आधार पर फिलहाल नियुक्ति की प्रक्रिया और शपथ ग्रहण से संबंधित जानकारी ही सामने आई है।
राष्ट्रपति की मंजूरी के बाद अब तीनों न्यायाधीशों के लिए शपथ ग्रहण अगला चरण है। 6 अक्टूबर को शपथ ग्रहण के बाद वे सुप्रीम कोर्ट में न्यायाधीश के तौर पर अपनी जिम्मेदारी संभालेंगे। न्यायाधीशों की नियुक्ति से संबंधित प्रक्रिया में राष्ट्रपति की मंजूरी के बाद पद ग्रहण के लिए शपथ जरूरी औपचारिक चरण है।