भारत के नाम पर पड़ी मार! तालिबान के सामने घुटने टेकने पर मजबूर हुआ पाकिस्तान

17 Oct 2025


>जो पाकिस्तान कभी भारत को आंख दिखाने की कोशिश करता था, आज वही तालिबान के सामने गिड़गिड़ा रहा है। अफगानिस्तान से मिल रही करारी शिकस्त के बाद प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ अब बातचीत की गुहार लगा रहे हैं। हैरानी की बात यह है कि अपनी नाकामी छिपाने के लिए पाकिस्तान ने इस बार भारत पर ही आरोप मढ़ दिया है।


>तालिबान के लगातार हमलों से पाकिस्तान की सीमाएं हिल चुकी हैं। नॉर्थ वजीरिस्तान और खैबर पख्तूनख्वा में तालिबान के लड़ाकों ने पाक सेना को पीछे हटने पर मजबूर कर दिया है। अब हालात ऐसे हैं कि पाकिस्तान, जिसे कभी "रणनीतिक गहराई" के लिए अफगानिस्तान की जरूरत थी, उसी तालिबान के सामने झुक गया है।


>पिछले कुछ हफ्तों से पाकिस्तान पर तालिबान के हमले लगातार बढ़ रहे हैं। कई चौकियां तालिबान के कब्जे में जा चुकी हैं। सोशल मीडिया पर वायरल तस्वीरों में तालिबान लड़ाकों को पाक सैनिकों की यूनिफॉर्म और हथियारों के साथ जश्न मनाते हुए देखा गया। यहां तक कि एक तस्वीर में पाक सैनिक की पैंट बंदूक पर लटकाकर दिखाया गया जो पाकिस्तान की बेइज्जती का प्रतीक बन गई।


>‘जियो न्यूज’ की रिपोर्ट के अनुसार, प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने कहा है कि पाकिस्तान तालिबान शासन से "उचित शर्तों" पर बातचीत करने को तैयार है। दोनों देशों ने 48 घंटे के लिए अस्थायी सीजफायर पर सहमति जताई है। शहबाज ने मंत्रिमंडल की बैठक में कहा “अब स्थायी संघर्ष विराम का निर्णय तालिबान के हाथ में है।”


>तालिबान के हमलों से बौखलाए शहबाज शरीफ ने भारत को जिम्मेदार ठहराया। उन्होंने कहा कि “पाकिस्तान पर हुए हमले भारत के इशारे पर किए गए हैं।”
दरअसल, यह बयान ऐसे वक्त पर आया जब अफगान विदेश मंत्री अमीर खान मुत्तकी भारत दौरे पर थे। विश्लेषकों का मानना है कि शहबाज का यह बयान घरेलू मोर्चे पर अपनी नाकामी और जनता के गुस्से को भटकाने का प्रयास है।


>पाकिस्तान के हवाई हमले के जवाब में अफगानिस्तान ने भी खुली चेतावनी दी है। तालिबान ने कहा है कि पाकिस्तान अगर सीमा पार हमला करेगा, तो उसे “सीधे मैदान में जवाब” दिया जाएगा। तालिबान प्रवक्ता ने कहा “हमने अब किसी देश से डरना छोड़ दिया है।” इस बयान के बाद से पाकिस्तान की सुरक्षा एजेंसियां पूरी तरह सतर्क हो गई हैं।


>भारत से तनाव और तालिबान से युद्ध जैसी स्थिति पाकिस्तान इस समय दो तरफ से दबाव में है। आर्थिक संकट से जूझ रहे पाकिस्तान के पास न तो संसाधन हैं और न ही राजनीतिक स्थिरता। विशेषज्ञों का कहना है कि अगर स्थिति यूं ही बनी रही, तो तालिबान पाकिस्तान के सीमावर्ती इलाकों में स्थायी कब्जा भी जमा सकता है।