टीसीएस के नासिक कार्यालय से जुड़े एक मामले में पूर्व महिला कर्मचारी के आरोपों ने गंभीर सवाल खड़े किए हैं। पूर्व कर्मचारी ने मीडिया से बातचीत में कार्यालय के भीतर कथित यौन उत्पीड़न, अभद्र व्यवहार और धर्मांतरण से जुड़े दावे किए हैं।
पूर्व कर्मचारी के अनुसार, कुछ टीम लीडर अपने कार्यस्थल का उपयोग पेशेवर गतिविधियों के बजाय महिला कर्मचारियों को बुलाकर उनके साथ अभद्र भाषा में बात करने के लिए करते थे। उन्होंने आरोप लगाया कि महिला कर्मचारियों को डेस्क पर बुलाकर अनुचित टिप्पणियां की जाती थीं, जो किसी भी पेशेवर माहौल के अनुकूल नहीं थीं।
मुख्य आरोपी के रूप में सामने आए तौसीफ अत्तार पर आरोप है कि वह महिला कर्मचारियों के पहनावे और धार्मिक प्रतीकों का मजाक उड़ाता था। पूर्व कर्मचारी ने कहा कि त्योहारों के दौरान साड़ी और बिंदी पहनने पर आपत्तिजनक टिप्पणियां की जाती थीं।
पूर्व कर्मचारी ने यह भी दावा किया कि कृष्णा नाम का एक सहकर्मी, जो पहले रुद्राक्ष की माला पहनता था, बाद में उसने इस्लाम धर्म अपना लिया। इसके अलावा, निदा खान नाम की एक कर्मचारी की भूमिका पर भी सवाल उठाए गए हैं, जिनके बारे में कहा गया कि वह कर्मचारियों के तबादलों से जुड़े कार्यों में शामिल थीं।
आरोपों में यह भी कहा गया है कि कुछ कर्मचारियों द्वारा महिला सहकर्मियों पर होटल और रिसॉर्ट में जाने के लिए दबाव बनाया जाता था। इस मामले में दानिश और रजा नाम के कर्मचारियों का भी उल्लेख किया गया है।
पुलिस के अनुसार, इस प्रकरण में दर्ज 9 शिकायतों की जांच की जा रही है, जो फरवरी 2022 से मार्च 2026 के बीच की अवधि से संबंधित हैं। इन शिकायतों के आधार पर सात लोगों को गिरफ्तार किया गया है, जिनमें तौसीफ अत्तार, दानिश शेख, रजा मेमन, शाहरुख कुरैशी, शफी शेख, आसिफ आफताब अंसारी और निदा खान शामिल हैं। एक अन्य महिला कर्मचारी फिलहाल फरार बताई गई है।
इस बीच, सुप्रीम कोर्ट ऑफ इंडिया में एक याचिका दायर की गई है, जिसमें कथित रूप से धोखे से किए जा रहे धर्मांतरण पर रोक लगाने के निर्देश देने की मांग की गई है। याचिका में इस प्रकार की घटनाओं को गंभीर बताते हुए आवश्यक कार्रवाई की मांग की गई है।