टेक्नोलॉजी की ये दिग्गज एप्प्स हो रही बंद

23 Jun 2025


>2025 अभी पूरा भी नहीं हुआ है और इस साल तकनीकी दुनिया में एक से बढ़कर एक चौंकाने वाली विदाइयाँ देखने को मिली हैं। कई ऐसे ऐप्स और प्लेटफॉर्म्स, जो कभी हमारी रोज़मर्रा की जिंदगी का हिस्सा थे, अब इतिहास बन चुके हैं। कुछ ने चुपचाप पर्दा गिराया, तो कुछ ने सुर्खियाँ बटोरीं, लेकिन हर एक ने डिजिटल संस्कृति पर गहरी छाप छोड़ी।


>यह साल एक बार फिर यह साबित करता है कि तकनीकी दुनिया में कुछ भी स्थायी नहीं है। आइए जानते हैं उन प्रमुख ऐप्स के बारे में जिन्हें 2025 ने अलविदा कह दिया।


>स्काइप: अलविदा उस आवाज़ को जो दूरी मिटाती थी


>2003 में लॉन्च हुआ स्काइप वो ऐप था जिसने पहली बार हमें यह एहसास दिलाया कि इंटरनेट पर कॉल्स मुफ्त और आसान हो सकती हैं। जब 2006 में इसमें वीडियो कॉलिंग जुड़ी, तो वह एक क्रांति जैसा था। माइक्रोसॉफ्ट ने 2011 में इसे खरीदा, लेकिन Zoom, FaceTime जैसे विकल्पों के आने से यह धीरे-धीरे पिछड़ गया।
इस साल फरवरी में माइक्रोसॉफ्ट ने चुपचाप स्काइप को रिटायर करने की घोषणा कर दी और मई तक इसे पूरी तरह बंद कर दिया गया। अब इसकी जगह Microsoft Teams ले रहा है।


>पॉकेट: 'बाद में पढ़ेंगे' वाला सपना हुआ खत्म


>‘Read It Later’ के नाम से 2007 में शुरू हुआ पॉकेट ऐप उन लाखों यूज़र्स का पसंदीदा रहा जो वेब आर्टिकल्स और लिंक बाद में पढ़ने के लिए सेव करते थे। Mozilla ने 2017 में इसे खरीदा और इसे नई पहचान दी।
मई 2025 में Mozilla ने इसकी सेवा 8 जुलाई से बंद करने का ऐलान कर दिया। अक्टूबर तक यूज़र्स अपनी सेव की गई सामग्री एक्सपोर्ट कर सकेंगे, इसके बाद यह ऐप स्टोर्स से भी हटा दिया जाएगा।


>पिग्गी: फिनटेक स्पेस से चुपचाप विदाई


>पिग्गी, जो कि म्यूचुअल फंड में डायरेक्ट निवेश की सुविधा देने वाला लोकप्रिय प्लेटफॉर्म था, 30 जून 2025 को अपनी सेवाएं बंद कर देगा। इसने बिना कमीशन के निवेश प्रक्रिया को सरल बनाया और एक वफादार यूज़र बेस तैयार किया।
हालांकि कंपनी ने बंद होने के पीछे कोई स्पष्ट कारण नहीं बताया है, लेकिन यूज़र्स को अपने निवेश हटाने या ट्रांसफर करने की सूचना दी जा चुकी है।


>टिकटॉक क्रिएटर मार्केटप्लेस: ब्रांडिंग से ऑटोमेशन की ओर


>टिकटॉक ने अप्रैल 2025 में अपने Creator Marketplace को पूरी तरह बंद कर दिया। यह प्लेटफॉर्म ब्रांड्स और क्रिएटर्स के बीच साझेदारी का जरिया था। इसकी जगह अब TikTok One ने ले ली है — एक एआई आधारित विज्ञापन प्लेटफॉर्म जिसमें ब्रांड अवतार जैसे अत्याधुनिक टूल्स शामिल हैं।
यह बदलाव प्रभावित करने वालों (influencers) की भूमिका को घटा सकता है, जिससे सोशल मीडिया विज्ञापन की दिशा ही बदल सकती है।


>मेटा फैक्ट-चेकिंग प्रोग्राम: अमेरिका में अंत, भारत में जारी


>Meta (Facebook) ने 2025 की शुरुआत में अमेरिका में अपने थर्ड-पार्टी फैक्ट-चेकिंग प्रोग्राम को समाप्त कर दिया। इसकी वजह “राजनीतिक पक्षपात” बताई गई। इसकी जगह अब X (पूर्व ट्विटर) के Community Notes जैसे सामुदायिक जांच मॉडल को अपनाया जा रहा है।
भारत में यह कार्यक्रम अभी भी सक्रिय है और कई स्वतंत्र संगठनों के साथ साझेदारी में काम कर रहा है, लेकिन विशेषज्ञों का मानना है कि अमेरिका में इसकी समाप्ति से वैश्विक स्तर पर असर पड़ सकता है।


>तकनीक बदलती है, यादें रह जाती हैं


>2025 यह दिखा चुका है कि चाहे कितनी भी बड़ी या लोकप्रिय तकनीक हो, एक दिन वह भी रिटायर हो सकती है। इन ऐप्स की विदाई के साथ एक युग समाप्त हुआ है, लेकिन यह भी हमें याद दिलाता है कि तकनीक का सबसे बड़ा नियम यही है— परिवर्तन ही स्थायित्व है