लखनऊ के अलीगंज थाना क्षेत्र के मौसमबाग स्थित त्रिवेणी नगर-2 में एक प्रिंटिंग प्रेस में चोरी का मामला सामने आया है। चोरों ने द प्रिंट्स हब नामक ऑफसेट प्रिंटिंग प्रेस की करीब 18 इंच मोटी पीछे की दीवार काटकर परिसर में प्रवेश किया और अलमारी तथा लॉकर तोड़कर 65 हजार रुपये नकद चुरा लिए। इसके अलावा मंदिर में रखी गुल्लक के पैसे भी ले जाने की जानकारी सामने आई है।
घटना का पता 21 अगस्त 2026 की सुबह करीब 9:30 बजे चला, जब प्रेस संचालक और कर्मचारी कार्यालय पहुंचे। अंदर पहुंचने पर पीछे की दीवार कटी हुई मिली और सामान बिखरा हुआ था। चोरी की सूचना पुलिस को दी गई, जिसके बाद मौके पर पहुंचकर जांच की गई।
प्रिंटिंग प्रेस सीतापुर रोड पर श्रावणी हेल्थकेयर अस्पताल के पास स्थित बताई गई है। प्रेस संचालक हिमांशु मिश्रा के अनुसार, जब 21 अगस्त की सुबह कार्यालय खोला गया तो पीछे की मजबूत दीवार में सेंध मिली।
दीवार करीब 18 इंच मोटी बताई गई है। चोरों ने इसी रास्ते से कार्यालय के अंदर प्रवेश किया। इसके बाद लोहे की अलमारी और उसका लॉकर तोड़ा गया। लॉकर में रखे 65 हजार रुपये नकद चोरी किए गए।
चोरों ने कार्यालय में रखी भगवान की गुल्लक से पैसे भी निकाल लिए। चोरी के दौरान कार्यालय के कई महत्वपूर्ण दस्तावेज इधर-उधर बिखरे मिले और कुछ दस्तावेजों के नष्ट होने की बात भी सामने आई है।
घटना की जानकारी के मुताबिक, आशंका है कि चोर रेलवे लाइन की तरफ से आकर प्रेस की पिछली दीवार तक पहुंचे होंगे। हालांकि, उपलब्ध जानकारी में पुलिस की ओर से इस आशंका की पुष्टि नहीं की गई है।
चोरी का तरीका ऐसा था कि चोर मुख्य प्रवेश द्वार से अंदर जाने के बजाय पीछे की दीवार में सेंध लगाकर कार्यालय तक पहुंचे। इसके बाद उन्होंने अलमारी और लॉकर को निशाना बनाया।
प्रेस में चोरी की घटना का पता 21 अगस्त की सुबह करीब 9:30 बजे लगा। कार्यालय खुलने के बाद कर्मचारियों की नजर पीछे की दीवार पर गई, जहां कटे हुए हिस्से से चोरी का पता चला।
अंदर जांच करने पर अलमारी और उसका लॉकर टूटा मिला। नकदी के अलावा गुल्लक से पैसे गायब थे। कार्यालय में रखे दस्तावेज भी व्यवस्थित स्थिति में नहीं थे। घटना के बाद प्रेस संचालक ने डायल 112 पर पुलिस को सूचना दी। इसके बाद गल्लामंडी पुलिस चौकी में लिखित शिकायत भी दी गई।
सूचना मिलने के बाद चौकी प्रभारी शेषमणि मिश्र मौके पर पहुंचे और घटनास्थल का निरीक्षण किया। उपलब्ध जानकारी के अनुसार पुलिस ने आसपास लगे सीसीटीवी कैमरों की फुटेज खंगालने की बात कही है।
पुलिस जांच में यह पता लगाने का प्रयास किया जा रहा है कि वारदात में कितने लोग शामिल थे और वे किस रास्ते से प्रेस में दाखिल हुए। आसपास के क्षेत्र में मौजूद कैमरों की फुटेज से संदिग्ध गतिविधियों की जानकारी जुटाने की कोशिश की जा रही है।
हालांकि, घटना के कई घंटे बाद तक पीड़ित को एफआईआर की प्रति नहीं मिलने की बात भी सामने आई है। शिकायत और पुलिस की आगे की कार्रवाई को लेकर उपलब्ध जानकारी में इससे अधिक विवरण नहीं दिया गया है।
मिली जानकारी के अनुसार, जिस स्थान पर प्रिंटिंग प्रेस स्थित है, वहां से गल्लामंडी पुलिस चौकी करीब 100 मीटर की दूरी पर बताई गई है। चोरी की घटना के बाद इलाके में सुरक्षा व्यवस्था को लेकर सवाल उठाए गए हैं।
प्रेस संचालक की ओर से यह भी बताया गया है कि इसी परिसर में पहले एसी चोरी होने की घटना हो चुकी है। मौजूदा चोरी के मामले में भी परिसर को निशाना बनाए जाने से पिछले घटनाक्रम का उल्लेख सामने आया है।
प्रिंटिंग प्रेस के संचालक के मुताबिक, इससे पहले प्रेस में एसी चोरी हो चुका है। इस घटना का जिक्र मौजूदा चोरी के मामले के संदर्भ में किया गया है। मौजूदा वारदात में चोरों ने सीधे दीवार काटकर प्रवेश किया और नकदी तक पहुंच बनाई। इससे घटना में इस्तेमाल किए गए तरीके की जानकारी सामने आती है।
उपलब्ध जानकारी के अनुसार, चोरों ने प्रेस से 65 हजार रुपये नकद, मंदिर में रखी गुल्लक के पैसे चोरी किए। इसके अलावा अलमारी और लॉकर तोड़े गए तथा कार्यालय के महत्वपूर्ण दस्तावेज बिखरे और क्षतिग्रस्त स्थिति में मिले।
घटना की जांच में पुलिस के सामने कई महत्वपूर्ण बिंदु हैं। इनमें प्रेस की पिछली दीवार में सेंध लगाने के लिए इस्तेमाल किए गए तरीके, चोरी के दौरान चोरों की संख्या, उनके आने-जाने का रास्ता और आसपास उपलब्ध सीसीटीवी फुटेज शामिल हैं।
रेलवे लाइन की दिशा से चोरों के आने की आशंका भी सामने आई है, इसलिए उस दिशा में आने-जाने वाले रास्तों और संभावित फुटेज की जांच महत्वपूर्ण हो सकती है। हालांकि, यह अभी जांच का विषय है और उपलब्ध जानकारी के आधार पर इसकी पुष्टि नहीं हुई है।
घटना के बाद क्षेत्रीय सुरक्षा व्यवस्था को लेकर सवाल उठे हैं। खास तौर पर इस बात का उल्लेख किया गया है कि जिस इलाके में यह प्रिंटिंग प्रेस स्थित है, वहां से पुलिस चौकी की दूरी करीब 100 मीटर बताई गई है।
हालांकि, पुलिस की रात्रि गश्त या उस समय की ड्यूटी व्यवस्था को लेकर उपलब्ध जानकारी में कोई आधिकारिक विवरण नहीं दिया गया है। इसलिए इस पहलू पर अंतिम स्थिति पुलिस जांच और आधिकारिक बयान के बाद ही स्पष्ट हो सकेगी।