यूपी बार काउंसिल ने दो अधिवक्ताओं का पंजीकरण निलंबित किया, जानें पूरा मामला

27 Sep 2026

प्रयागराज: उत्तर प्रदेश बार काउंसिल से जुड़े एक अनुशासनहीनता मामले में सेंट्रल बार एसोसिएशन लखनऊ के दो पदाधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की गई है। मामले में बार काउंसिल की प्रक्रिया के तहत दोनों अधिवक्ताओं के वकालत पंजीकरण को अगले आदेश तक निलंबित किया गया है। कार्रवाई के बाद मामले की सुनवाई अनुशासन समिति के समक्ष जारी है।

मामले में बार काउंसिल ऑफ इंडिया के निर्देश के बाद दोबारा सुनवाई की गई। अनुशासन समिति ने संबंधित आरोपों को गंभीर प्रकृति का माना है। अब इस मामले की अगली सुनवाई 11 अक्टूबर को होगी।

मामले में सेंट्रल बार एसोसिएशन लखनऊ के अध्यक्ष अखिलेश जायसवाल और महामंत्री अवनीश दीक्षित के खिलाफ कार्रवाई की गई है। दोनों के वकालत पंजीकरण को अगले आदेश तक निलंबित किया गया है। पंजीकरण निलंबित होने के बाद दोनों के किसी भी अदालत में बतौर अधिवक्ता पेश होने पर रोक लगाई गई है। इस तरह मामले की सुनवाई पूरी होने तक दोनों अधिवक्ताओं के न्यायालय में अधिवक्ता के रूप में पेश होने पर प्रतिबंध लागू रहेगा।

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उपलब्ध जानकारी के अनुसार, दोनों अधिवक्ताओं को 8 सितंबर को निलंबित किया गया था। इसी के साथ उन्हें नोटिस भी जारी किया गया था। इसके बाद पूरा मामला अनुशासन समिति को सौंपा गया। मामले में बार काउंसिल की ओर से निर्धारित प्रक्रिया के तहत आरोपों और संबंधित पक्षों पर विचार किया जा रहा है। बाद में बार काउंसिल ऑफ इंडिया के निर्देश पर मामले की दोबारा सुनवाई की गई।

मामला बार काउंसिल के एक प्रस्ताव से जुड़ा है। उपलब्ध जानकारी के मुताबिक, बार काउंसिल के प्रस्ताव को खारिज करने और उसे अखबारों में प्रकाशित कराने से संबंधित आरोप इस मामले की जांच का हिस्सा हैं। इसी विषय को लेकर सेंट्रल बार एसोसिएशन लखनऊ के अध्यक्ष और महामंत्री के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई की प्रक्रिया शुरू हुई। 8 सितंबर को दोनों के खिलाफ निलंबन की कार्रवाई करते हुए नोटिस जारी किया गया और मामले को अनुशासन समिति के पास भेजा गया। इसके बाद बार काउंसिल ऑफ इंडिया के निर्देश पर मामले की सुनवाई दोबारा की गई।

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मामले की दोबारा सुनवाई के दौरान अनुशासन समिति ने संबंधित आरोपों को गंभीर प्रकृति का माना। इसके बाद दोनों अधिवक्ताओं का वकालत पंजीकरण अगले आदेश तक निलंबित रखने की कार्रवाई की गई। पंजीकरण के निलंबन के चलते दोनों अधिवक्ताओं के किसी भी अदालत में बतौर अधिवक्ता पेश होने पर रोक है। मामले में अंतिम स्थिति आगे होने वाली सुनवाई और अनुशासनात्मक प्रक्रिया के आधार पर तय होगी।

इस मामले में बार काउंसिल ऑफ इंडिया के निर्देश की भी भूमिका रही। निर्देश के बाद अनुशासन समिति ने मामले की दोबारा सुनवाई की। सुनवाई के दौरान मामले से जुड़े आरोपों पर विचार किया गया। समिति ने आरोपों को गंभीर प्रकृति का माना और दोनों अधिवक्ताओं के पंजीकरण के निलंबन की स्थिति अगले आदेश तक बनाए रखी।

मामले में अगली सुनवाई 11 अक्टूबर को निर्धारित है। उस सुनवाई में अनुशासन समिति मामले से जुड़े पक्षों और उपलब्ध रिकॉर्ड पर आगे विचार करेगी। फिलहाल दोनों अधिवक्ताओं का वकालत पंजीकरण निलंबित है और उनके किसी भी अदालत में अधिवक्ता के रूप में पेश होने पर रोक लागू है। मामले की आगे की स्थिति अगली सुनवाई और अनुशासन समिति की कार्यवाही के बाद स्पष्ट होगी।