यूपी के बेसिक स्कूलों पर संजय सिंह का आरोप, ₹604 करोड़ के ऐलान पर उठाए सवाल

25 Aug 2026

आम आदमी पार्टी के वरिष्ठ नेता और राज्यसभा सांसद संजय सिंह ने मंगलवार, 25 अगस्त 2026 को लखनऊ में आयोजित प्रेस वार्ता में उत्तर प्रदेश की बेसिक शिक्षा व्यवस्था को लेकर कई सवाल उठाए। उन्होंने सरकारी स्कूलों की स्थिति, स्कूलों के कथित विलय, शिक्षा के लिए उपलब्ध धन के इस्तेमाल, मिड-डे मील और स्कूलों की बुनियादी सुविधाओं से जुड़े मुद्दे उठाते हुए संसद की याचिका समिति से जांच कराने की मांग की।

संजय सिंह ने यह भी कहा कि उनकी पार्टी के ‘स्कूल ठीक करो अभियान’ के बाद बेसिक स्कूलों के कायाकल्प के लिए ₹604 करोड़ खर्च करने की घोषणा की गई है। उन्होंने दावा किया कि अभियान के तहत जर्जर स्कूलों की स्थिति सामने आने के बाद सरकार की ओर से यह घोषणा की गई। उन्होंने यह भी कहा कि अगले एक महीने तक आम आदमी पार्टी के कार्यकर्ता जिलों में जर्जर स्कूलों की शिकायतें संबंधित अधिकारियों और मुख्यमंत्री कार्यालय तक पहुंचाएंगे।

प्रेस वार्ता में संजय सिंह ने कहा कि आम आदमी पार्टी के ‘स्कूल ठीक करो अभियान’ के दबाव के बाद उत्तर प्रदेश सरकार ने बेसिक स्कूलों के कायाकल्प के लिए ₹604 करोड़ खर्च करने की घोषणा की। उन्होंने हालांकि कहा कि केवल बजट की घोषणा पर्याप्त नहीं है और जमीन पर काम शुरू होना जरूरी है। इसी संदर्भ में उन्होंने केंद्र से जुड़े शिक्षा फंड के इस्तेमाल को लेकर भी सवाल उठाए।

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संजय सिंह के अनुसार, केंद्र सरकार के ‘समग्र शिक्षा अभियान’ के तहत उत्तर प्रदेश को मिले ₹9,000 करोड़ का उपयोग नहीं किया गया और कथित तौर पर यह राशि वापस भेज दी गई। उन्होंने शिक्षा बजट के एक बड़े हिस्से के खर्च नहीं होने का भी दावा किया। इन आंकड़ों और राशि से जुड़े दावों का उल्लेख संजय सिंह ने अपनी प्रेस वार्ता में किया। उपलब्ध जानकारी में सरकार की ओर से इन आरोपों पर कोई प्रतिक्रिया शामिल नहीं है।

संजय सिंह ने कहा कि आम आदमी पार्टी ने पहले स्कूलों के मर्जर का विरोध किया था। उनके मुताबिक, उस समय सरकार की ओर से विधानसभा में यह कहा गया था कि कोई स्कूल बंद या मर्ज नहीं होगा। उन्होंने दावा किया कि ‘स्कूल ठीक करो अभियान’ के दौरान जब कुछ स्कूलों की जर्जर स्थिति सामने आई तो प्रशासन की ओर से यह कहा गया कि संबंधित स्कूलों का विलय हो चुका है।

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संजय सिंह का आरोप है कि यू-डायस पोर्टल पर कुछ ऐसे स्कूल अब भी उसी पते पर संचालित दिखाए जा रहे हैं। उन्होंने इसी आधार पर स्कूलों के रिकॉर्ड और जमीनी स्थिति के बीच अंतर होने का दावा किया। यहां यह स्पष्ट करना जरूरी है कि ये दावे संजय सिंह द्वारा प्रेस वार्ता में लगाए गए हैं। उपलब्ध सामग्री में प्रशासन या उत्तर प्रदेश सरकार का इस बिंदु पर अलग पक्ष दर्ज नहीं है।

संजय सिंह ने कहा कि उन्होंने उत्तर प्रदेश में सरकारी स्कूलों की स्थिति से जुड़े मामलों को संसद की याचिका समिति तक पहुंचाया है। उन्होंने बताया कि शिकायत में स्कूलों की बदहाली, मिड-डे मील से जुड़ी शिकायतों और कई जिलों में अधिकारियों की भूमिका से जुड़े मुद्दे शामिल किए गए हैं। उन्होंने विशेष रूप से हरदोई के जिलाधिकारी तथा कई जिलों के बेसिक शिक्षा अधिकारियों और जिलाधिकारियों के संबंध में शिकायत किए जाने की बात कही।

संजय सिंह का आरोप है कि कुछ अधिकारियों ने अपने पद का दुरुपयोग करते हुए स्कूलों की स्थिति सामने लाने वाले लोगों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज कराई। उन्होंने इन मामलों में जांच की मांग की है।

आम आदमी पार्टी ने अब अपने अभियान का अगला चरण एक महीने तक चलाने की बात कही है। संजय सिंह के अनुसार, पार्टी कार्यकर्ता सभी जिलों में जर्जर स्कूलों, शौचालयों, बाउंड्री और मिड-डे मील से जुड़ी समस्याओं की लिखित शिकायत तैयार करेंगे। इन शिकायतों को बेसिक शिक्षा अधिकारियों, शिक्षा निदेशक और मुख्यमंत्री कार्यालय तक सौंपने की बात कही गई है।

उन्होंने कहा कि यदि एक महीने के भीतर निर्माण और सुधार के काम शुरू नहीं हुए तो पार्टी के कार्यकर्ता फिर जमीनी स्तर पर जाकर स्थिति का जायजा लेंगे। यह अभियान पार्टी द्वारा स्कूलों की बुनियादी सुविधाओं से जुड़ी शिकायतों को प्रशासन के सामने रखने के तौर पर प्रस्तुत किया गया है।

प्रेस वार्ता में संजय सिंह ने आम आदमी पार्टी के नेताओं और कार्यकर्ताओं पर दर्ज मामलों का भी मुद्दा उठाया। उन्होंने कहा कि बौद्ध प्रांत अध्यक्ष इमरान लतीफ और वाराणसी के पार्टी प्रवक्ता मुकेश सिंह सहित अन्य कार्यकर्ताओं पर स्कूलों की स्थिति सामने लाने के सिलसिले में दर्ज प्राथमिकी के खिलाफ आम आदमी पार्टी कानूनी लड़ाई लड़ेगी। संजय सिंह ने इसके साथ ही स्कूलों की बदहाली के लिए जिम्मेदार बताए जा रहे अधिकारियों के खिलाफ भी प्राथमिकी दर्ज कराने के लिए प्रार्थना पत्र देने की बात कही।

इन मामलों में किस व्यक्ति या अधिकारी की कानूनी जिम्मेदारी तय हुई है, इसकी पुष्टि उपलब्ध प्रेस विज्ञप्ति में नहीं दी गई है। इसलिए आरोपों को संबंधित पक्ष के बयान के रूप में ही देखा जाना चाहिए।

संजय सिंह ने सरकारी स्कूलों में बच्चों को दिए जाने वाले मिड-डे मील की गुणवत्ता को लेकर भी शिकायतें उठाईं। उन्होंने संसद की याचिका समिति को भेजी गई शिकायत में बच्चों को दिए जाने वाले भोजन की गुणवत्ता से जुड़े आरोपों को शामिल करने की बात कही। उन्होंने विशेष रूप से खराब भोजन दिए जाने का आरोप लगाया। हालांकि, उपलब्ध सामग्री में किसी विशेष स्कूल, घटना की तारीख या भोजन की गुणवत्ता से संबंधित स्वतंत्र जांच रिपोर्ट का विवरण नहीं दिया गया है।

संजय सिंह ने उत्तर प्रदेश में शिक्षकों के रिक्त पदों को लेकर भी सरकार पर सवाल उठाया। उन्होंने दावा किया कि बेसिक शिक्षा विभाग में 2 लाख से अधिक शिक्षकों के पद खाली हैं। साथ ही उन्होंने कहा कि चुनाव नजदीक आने पर सरकार 1 लाख नौकरियों का दावा कर रही है।

इस बयान में संजय सिंह ने शिक्षक रिक्तियों को रोजगार और सरकारी शिक्षा व्यवस्था, दोनों से जोड़कर मुद्दा उठाया। उपलब्ध सामग्री में सरकार की ओर से शिक्षक पदों की संख्या या भर्ती संबंधी दावे पर कोई अलग प्रतिक्रिया नहीं दी गई है।

प्रेस वार्ता में संजय सिंह ने जौनपुर के लेखपाल अशोक यादव के निलंबन का भी जिक्र किया। उन्होंने दावा किया कि चीनी की महंगाई को लेकर अपनी बात रखने पर अशोक यादव को निलंबित किया गया। संजय सिंह ने इस कार्रवाई की आलोचना करते हुए कहा कि आम आदमी पार्टी उनके साथ खड़ी है। उपलब्ध सामग्री में निलंबन के प्रशासनिक आदेश, कारण या संबंधित विभाग का पक्ष शामिल नहीं है।

संजय सिंह ने आरक्षण के मुद्दे पर भी आम आदमी पार्टी का रुख स्पष्ट किया। उन्होंने कहा कि उनकी पार्टी आरक्षण को संविधान से मिला अधिकार मानती है और इसे खत्म करने के किसी भी प्रयास का विरोध करती है।

उन्होंने भारतीय जनता पार्टी पर आरक्षण के खिलाफ माहौल बनाने का आरोप लगाया और कहा कि आरक्षण विरोधी आंदोलन के पीछे भाजपा से जुड़े लोगों की साजिश है। उन्होंने यह भी कहा कि सामाजिक न्याय की लड़ाई सड़क से संसद तक जारी रहेगी।

प्रेस वार्ता में 69,000 शिक्षक भर्ती का भी उल्लेख हुआ। संजय सिंह ने इस भर्ती में पिछड़े और दलित वर्ग के आरक्षण को लेकर सवाल उठाते हुए इसके खिलाफ संघर्ष जारी रखने की बात कही। ये राजनीतिक आरोप और दावे संजय सिंह की ओर से रखे गए। उपलब्ध सामग्री में भारतीय जनता पार्टी या सरकार का इन आरोपों पर पक्ष शामिल नहीं है।

लखनऊ की प्रेस वार्ता में उठाए गए मुद्दों में सरकारी स्कूलों की बुनियादी सुविधाएं, स्कूल मर्जर, शिक्षा फंड, मिड-डे मील, शिक्षक पद, प्राथमिकी और आरक्षण जैसे अलग-अलग विषय शामिल रहे। संजय सिंह ने इन सभी मुद्दों को आम आदमी पार्टी के राजनीतिक और जन अभियान से जोड़ते हुए आगे भी स्कूलों की स्थिति को लेकर शिकायतें प्रशासन तक पहुंचाने की बात कही।