>उत्तर प्रदेश में भवन निर्माण और विकास से जुड़ी सबसे महत्वपूर्ण प्रक्रिया – ऑनलाइन बिल्डिंग मैप अप्रूवल सिस्टम (OBPAS) – आगामी 30 सितंबर 2025 तक पूरी तरह से ठप रहेगी। इसका सीधा असर छोटे-बड़े बिल्डरों, प्लॉट स्वामियों और निर्माण एजेंसियों पर पड़ेगा, जो भवन मानचित्र की मंजूरी के लिए ऑनलाइन आवेदन करते हैं।
>4 जुलाई से लागू हुई थी नई व्यवस्था
प्रदेश सरकार ने 4 जुलाई 2025 से भवन निर्माण एवं विकास उपविधि तथा आदर्श जोनिंग रेगुलेशन्स-2025 को लागू किया है। इस नई व्यवस्था के अंतर्गत पहले से अधिक लचीले मानकों को शामिल किया गया है, जिससे निर्माणकर्ताओं को कई छूटें प्राप्त होंगी। लेकिन इसके चलते मौजूदा स्क्रूटनी इंजन (जांच तंत्र) जो कि वर्ष 2008 की उपविधियों पर आधारित था, अब अप्रासंगिक हो गया है।
>नई तकनीकी स्क्रूटनी के लिए लगेगा समय
पुरानी तकनीक अब नए मापदंडों पर खरा नहीं उतरती, इसलिए OBPAS और FASTPASS सिस्टम को नए नियमों के अनुसार अपग्रेड किया जा रहा है। विशेषज्ञों का कहना है कि यह काम पूरा होने में लगभग दो महीने लगेंगे, यानी 30 सितंबर तक ऑनलाइन स्वीकृति की सुविधा उपलब्ध नहीं रहेगी।
>अस्थाई समाधान: मैनुअल स्क्रूटनी का सहारा
इस दौरान विकास प्राधिकरणों और आवास विकास परिषद में आने वाले ऑनलाइन मानचित्रों का परीक्षण सीधे नगर नियोजकों और अभियंताओं द्वारा मैनुअल रूप में किया जाएगा। इससे यह सुनिश्चित किया जाएगा कि निर्माण कार्य ठप न हो और प्रक्रियाएं जारी रहें।
>राज्य सरकार ने बनाई विशेषज्ञ समिति
राज्य सरकार ने इस संक्रमणकाल को सुचारू रूप से पार करने के लिए आवास एवं शहरी नियोजन विभाग के सचिव की अध्यक्षता में एक उच्चस्तरीय समिति गठित की है। इसमें लखनऊ विकास प्राधिकरण के उपाध्यक्ष, मुख्य नगर नियोजक, वित्त नियंत्रक, आवास बंधु के आईटी विशेषज्ञ और निदेशक को शामिल किया गया है। निदेशक को समिति का संयोजक नियुक्त किया गया है।
>भविष्य में मानचित्र स्वीकृति प्रक्रिया होगी और तेज
नई व्यवस्था लागू होने के बाद एक बार तकनीकी अपग्रेड पूरा हो जाने पर मानचित्र स्वीकृति प्रक्रिया और अधिक पारदर्शी, त्वरित और मानकीकृत हो जाएगी। चूंकि अब नई उपविधियों में ढेरों छूट दी गई हैं, इसलिए उम्मीद है कि बड़ी संख्या में लोग भूमि विकास और भवन निर्माण के लिए आवेदन करेंगे।