उत्तर प्रदेश में कौशल विकास और रोजगार को जोड़ने की दिशा में राज्य सरकार ने एक नए डिजिटल मॉडल की जानकारी दी है। विश्व युवा कौशल दिवस के अवसर पर आयोजित राज्य स्तरीय समारोह में बताया गया कि विभाग ने 'ब्लू डॉट सॉफ्टवेयर' तैयार किया है, जिसके माध्यम से युवा अपना बायोडाटा अपलोड कर सकेंगे और कंपनियां आवश्यकता के अनुसार सीधे उनसे संपर्क करेंगी। सरकार का कहना है कि इस व्यवस्था का उद्देश्य युवाओं को नौकरी की तलाश में बार-बार आवेदन और अनावश्यक दौड़-भाग से राहत देना है।
इंदिरा गांधी प्रतिष्ठान, लखनऊ में आयोजित कार्यक्रम में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कौशल विकास प्रदर्शनी का उद्घाटन किया, विभागीय प्रकाशन 'कौशलम' का विमोचन किया और कौशल विकास विभाग की उपलब्धियों पर आधारित लघु फिल्म का अवलोकन किया। इस अवसर पर विभिन्न क्षेत्रों में उल्लेखनीय प्रदर्शन करने वाले 11 युवा आइकॉन को सम्मानित किया गया।
समारोह के दौरान व्यावसायिक शिक्षा, कौशल विकास एवं उद्यमशीलता विभाग ने पिछले वर्षों में संचालित योजनाओं और उनके परिणामों की जानकारी साझा की। विभाग के अनुसार पिछले नौ वर्षों में 20 लाख युवाओं को विभिन्न कौशलों का प्रशिक्षण दिया गया, जिनमें से 12.50 लाख युवाओं को रोजगार उपलब्ध कराया गया। वर्ष 2026-27 के लिए 10 लाख युवाओं को प्रशिक्षण देने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है।
कार्यक्रम में यह भी बताया गया कि प्रदेश की लगभग 94 लाख सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम इकाइयों की मैपिंग कर उनकी आवश्यकता के अनुरूप प्रशिक्षण मॉड्यूल तैयार किए गए हैं, ताकि प्रशिक्षण के बाद युवाओं की रोजगार क्षमता बढ़ाई जा सके।
समारोह में जानकारी दी गई कि टाटा समूह के साथ 7,000 करोड़ रुपये के कॉरपोरेट सामाजिक उत्तरदायित्व समझौते के तहत प्रदेश के 225 औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थानों को नई तकनीकों से उन्नत किया गया है।
सरकार के अनुसार प्रशिक्षण पाठ्यक्रमों में अब आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, रोबोटिक्स, इंटरनेट ऑफ थिंग्स, इलेक्ट्रिक व्हीकल, थ्री-डी प्रिंटिंग, एडवांस सीएनसी, ऑटोमेशन और डिजिटल मैन्युफैक्चरिंग जैसे क्षेत्रों को भी शामिल किया जा रहा है, ताकि उद्योगों की बदलती मांग के अनुरूप युवाओं को तैयार किया जा सके.
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने समारोह में कौशल विकास प्रदर्शनी का उद्घाटन करने के साथ विभिन्न स्टॉलों का अवलोकन किया। उन्होंने विभाग द्वारा प्रकाशित 'कौशलम' पुस्तिका का विमोचन भी किया। कार्यक्रम के दौरान विभागीय उपलब्धियों पर आधारित लघु फिल्म भी प्रदर्शित की गई।
आईटीआई अलीगंज, लखनऊ के प्रशिक्षार्थियों द्वारा तैयार स्मृति चिन्ह मुख्यमंत्री को भेंट किया गया। समारोह में विभाग द्वारा चयनित 11 युवा आइकॉन को भी सम्मानित किया गया, जिन्होंने रोजगार और स्वरोजगार के क्षेत्र में उल्लेखनीय उपलब्धियां हासिल की हैं.
समारोह के दौरान कौशल विकास कार्यक्रमों से लाभान्वित युवाओं ने अपने अनुभव भी साझा किए। इन उदाहरणों के माध्यम से प्रशिक्षण के बाद रोजगार और स्वरोजगार के अवसरों की जानकारी दी गई।
उन्नाव के औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थान (आईटीआई) से प्रशिक्षण प्राप्त कृष्ण कुमार साहू ने बताया कि वह वर्तमान में एनसीएल कोल इंडिया में कार्यरत हैं और उन्हें लगभग एक लाख रुपये प्रतिमाह वेतन मिल रहा है।
फैशन डिजाइनिंग का प्रशिक्षण लेने वाली भावना दुबे ने कहा कि स्वरोजगार के माध्यम से उनकी मासिक आय 70 हजार रुपये से अधिक है। उन्होंने कहा कि कौशल व्यक्ति को आत्मनिर्भर बनने का अवसर देता है।
लखनऊ स्थित इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी एंड ऑटोमेशन से जुड़े ज्ञान प्रकाश वर्मा ने बताया कि उन्होंने स्वास्थ्य क्षेत्र से जुड़ा एक स्टार्टअप शुरू किया है, जो कृत्रिम बुद्धिमत्ता आधारित तकनीक की मदद से महिलाओं के स्वास्थ्य पर कार्य कर रहा है। उनके अनुसार इस पहल से अन्य युवाओं को भी रोजगार मिला है।
बरेली की राजरानी ने कहा कि प्रशिक्षण प्राप्त करने के बाद उन्हें 27 हजार रुपये प्रतिमाह की नौकरी मिली, जिससे वह अपने परिवार की जिम्मेदारियां निभा रही हैं।
इसी संस्थान की शुभ्रा विश्वास ने बताया कि वह वर्तमान में लगभग पांच लाख रुपये प्रतिमाह का कारोबार कर रही हैं और अन्य युवाओं को भी रोजगार उपलब्ध करा रही हैं।
कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने विभिन्न जिलों से चयनित 11 युवा आइकॉन को सम्मानित किया। सम्मानित होने वालों में शीतल कुमारी, नेहा, फर्दीन खान, मोहम्मद बिलाल, राजरानी, वर्तिका गुप्ता, अर्जुन पाल, संगीता वर्मा, शिवांग वर्मा, राजीव विश्वकर्मा और विनीता शामिल रहे। इनमें कुछ युवाओं ने निजी क्षेत्र में रोजगार प्राप्त किया है, जबकि कुछ स्वरोजगार के माध्यम से उद्यम स्थापित कर अन्य लोगों को भी रोजगार उपलब्ध करा रहे हैं।
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए व्यावसायिक शिक्षा, कौशल विकास एवं उद्यमशीलता राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) कपिल देव अग्रवाल ने विभाग की विभिन्न योजनाओं और उपलब्धियों की जानकारी दी।
उन्होंने कहा कि विभाग के अनुसार पिछले नौ वर्षों में 20 लाख युवाओं को प्रशिक्षण दिया गया, जिनमें से 12.50 लाख युवाओं को रोजगार मिला। वर्ष 2026-27 के लिए 10 लाख युवाओं को प्रशिक्षण देने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है।
उन्होंने बताया कि प्रदेश में लगभग 94 लाख एमएसएमई इकाइयों की मैपिंग की गई है ताकि उद्योगों की मांग के अनुरूप कौशल प्रशिक्षण उपलब्ध कराया जा सके।
कार्यक्रम में यह भी बताया गया कि प्रदेश में वर्तमान में 330 से अधिक राजकीय तथा करीब 3000 निजी औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थान (आईटीआई) संचालित हैं, जहां प्रतिवर्ष साढ़े तीन से चार लाख प्रशिक्षार्थियों को प्रशिक्षण दिया जाता है।
विभाग के अनुसार आने वाले वर्षों में प्रशिक्षण कार्यक्रमों में भविष्य की तकनीकों को प्राथमिकता दी जाएगी। इनमें सेमीकंडक्टर, हरित ऊर्जा, इलेक्ट्रिक मोबिलिटी, ड्रोन, रक्षा विनिर्माण, डिजिटल अर्थव्यवस्था, कृत्रिम बुद्धिमत्ता, रोबोटिक्स, इंटरनेट ऑफ थिंग्स, ऑटोमेशन और डिजिटल विनिर्माण जैसे क्षेत्रों को शामिल किया जा रहा है। इसके अलावा प्रोजेक्ट प्रवीण के तहत कक्षा 9 से 12 तक के विद्यार्थियों और अटल आवासीय विद्यालयों के छात्रों को भी कौशल आधारित प्रशिक्षण दिया जा रहा है।
समारोह के दौरान मुख्यमंत्री ने विभाग द्वारा प्रकाशित 'कौशलम' पुस्तिका का विमोचन भी किया। विभाग के अनुसार इस पुस्तिका में केंद्र सरकार के 12 वर्ष और उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा विभिन्न जनपदों में संचालित कौशल विकास से जुड़े कार्यों और योजनाओं का संकलन किया गया है।