आगरा, बरेली और प्रयागराज के लिए योगी कैबिनेट का फैसला, नए शहरों को मिली 225 करोड़ की पहली किस्त

03 Jun 2026

 

उत्तर प्रदेश मंत्रिमंडल ने मुख्यमंत्री शहरी विस्तारीकरण/नए शहर प्रोत्साहन योजना के तहत आगरा, बरेली और प्रयागराज में नए शहरों के समग्र एवं सुनियोजित विकास के लिए वित्तीय स्वीकृति प्रदान कर दी है। सरकार ने संबंधित परियोजनाओं के लिए पहली किस्त के रूप में 225 करोड़ रुपये जारी करने का निर्णय लिया है। इसके साथ ही मंत्रिमंडल ने उत्तर प्रदेश सेमीकंडक्टर नीति-2024 में संशोधन के प्रस्ताव को भी मंजूरी दी है।

 

प्रदेश सरकार ने तेजी से बढ़ती शहरी आबादी को बेहतर आवासीय सुविधाएं उपलब्ध कराने और शहरों के नियोजित विस्तार के उद्देश्य से मुख्यमंत्री शहरी विस्तारीकरण/नए शहर प्रोत्साहन योजना लागू की थी। इस योजना के संचालन के लिए 6 अप्रैल 2023 को विस्तृत दिशा-निर्देश जारी किए गए थे। योजना के तहत नए शहरों के विकास के लिए भूमि अर्जन पर होने वाले व्यय का 50 प्रतिशत तक राज्य सरकार सीड कैपिटल के रूप में उपलब्ध कराती है। यह सहायता अधिकतम 20 वर्षों तक प्रदान किए जाने का प्रावधान रखती है।

 

सरकार के अनुसार वित्तीय वर्ष 2026-27 में इस योजना के लिए 3500 करोड़ रुपये का बजटीय प्रावधान किया गया है। इसी के अंतर्गत आगरा, बरेली और प्रयागराज में प्रस्तावित नए शहरों के विकास के लिए कुल 355.06 करोड़ रुपये तक की सीड कैपिटल अनुमन्य की गई है। इसके सापेक्ष प्रथम किस्त के रूप में 225 करोड़ रुपये की वित्तीय स्वीकृति प्रदान की गई है और धनराशि जारी करने का निर्णय लिया गया है।

 

सरकार का मानना है कि इस योजना से विकास प्राधिकरणों और संबंधित एजेंसियों को बड़े स्तर पर शहरी अवसंरचना विकसित करने में मदद मिलेगी। इसके माध्यम से भविष्य की जरूरतों को ध्यान में रखते हुए आधुनिक और सुव्यवस्थित शहरी क्षेत्रों का विकास किया जा सकेगा।

 

कैबिनेट बैठक में उत्तर प्रदेश सेमीकंडक्टर नीति-2024 में संशोधन के प्रस्ताव को भी स्वीकृति दी गई। राज्य सरकार के अनुसार बदलते औद्योगिक परिदृश्य, निवेशकों की आवश्यकताओं और अन्य राज्यों के साथ प्रतिस्पर्धा को देखते हुए नीति में संशोधन आवश्यक माना गया।

 

उत्तर प्रदेश सेमीकंडक्टर नीति-2024 को 19 जनवरी 2024 को अधिसूचित किया गया था और यह पांच वर्षों तक प्रभावी रहेगी। संशोधन के बाद नीति को और अधिक निवेशक-अनुकूल बनाया गया है, जिससे प्रदेश में सेमीकंडक्टर और इलेक्ट्रॉनिक्स विनिर्माण क्षेत्र में निवेश को बढ़ावा मिलने की उम्मीद है। सरकार ने स्पष्ट किया है कि इन संशोधनों से राज्य पर किसी अतिरिक्त वित्तीय भार का प्रभाव नहीं पड़ेगा। नीति के अंतर्गत निवेशकों को परियोजना में वाणिज्यिक उत्पादन शुरू होने के बाद कम से कम तीन वर्षों तक उत्पादन संचालन बनाए रखने की प्रतिबद्धता भी देनी होगी।