उत्तर प्रदेश कांग्रेस मुख्यालय, लखनऊ में 21 अगस्त 2026 को कांग्रेस के ओबीसी विभाग की बैठक हुई। बैठक में जातिगत जनगणना के फॉर्म में ओबीसी वर्ग के लिए अलग कॉलम शामिल करने और केंद्र तथा राज्य की सूची में दर्ज ओबीसी जातियों के अनुसार उनकी गिनती कराने की मांग को लेकर प्रदेश स्तर पर कार्यक्रम चलाने की रणनीति पर चर्चा की गई।
बैठक में उत्तर प्रदेश कांग्रेस कमेटी के प्रभारी एवं पूर्व मंत्री राजेंद्र पाल गौतम, ओबीसी विभाग के राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ. अनिल जयहिंद और उत्तर प्रदेश ओबीसी विभाग के प्रदेशीय चेयरमैन मनोज यादव मौजूद रहे। कांग्रेस की ओर से बताया गया कि इस मुद्दे को लेकर उत्तर प्रदेश में सम्मेलन, धरना, ज्ञापन, पदयात्रा, गोष्ठी और हस्ताक्षर अभियान आयोजित किए जाएंगे।
कांग्रेस के अनुसार, इन कार्यक्रमों की शुरुआत 22 अगस्त को कानपुर और 23 अगस्त को जालौन में जातिगत जनगणना तथा भागीदारी न्याय विषय पर सम्मेलन के साथ होगी।
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कांग्रेस के ओबीसी विभाग की बैठक में पार्टी ने जातिगत जनगणना से जुड़े दो प्रमुख मुद्दों को सामने रखा। पहला, जनगणना के फॉर्म में ओबीसी के लिए अलग कॉलम जोड़ा जाए। दूसरा, केंद्र और राज्य सरकारों की सूचियों में शामिल ओबीसी जातियों के अनुसार जातियों की गिनती की जाए।
बैठक में कांग्रेस नेताओं ने इस मुद्दे को ओबीसी वर्ग की भागीदारी से जोड़ते हुए प्रदेश स्तर पर अभियान चलाने की जानकारी दी। पार्टी की ओर से कहा गया कि विभिन्न जिलों में अलग-अलग कार्यक्रम आयोजित कर इस मांग को उठाया जाएगा। कांग्रेस के अनुसार, यह अभियान पार्टी के राष्ट्रीय स्तर पर चलाए जा रहे ओबीसी कार्यक्रमों की कड़ी में उत्तर प्रदेश में शुरू किया जा रहा है।
उत्तर प्रदेश कांग्रेस कमेटी के प्रभारी राजेंद्र पाल गौतम ने बैठक में आरोप लगाया कि जातिगत जनगणना के फॉर्म में ओबीसी वर्ग का अलग कॉलम नहीं होने से इस वर्ग की आबादी और भागीदारी से जुड़े आंकड़ों के संबंध में कठिनाई होगी। उन्होंने इसे ओबीसी वर्ग की भागीदारी से जुड़ा मुद्दा बताते हुए कहा कि कांग्रेस सामाजिक न्याय के प्रश्न को संगठन निर्माण और चुनावी रणनीति में प्रमुखता दे रही है।
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राजेंद्र पाल गौतम ने कहा कि कांग्रेस नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी लंबे समय से संख्या के अनुपात में सभी वर्गों को भागीदारी देने की बात उठाते रहे हैं। उन्होंने यह भी कहा कि उत्तर प्रदेश में संगठन सृजन अभियान के तहत सभी वर्गों को उचित प्रतिनिधित्व देने पर जोर दिया जा रहा है।
बैठक में ओबीसी विभाग के राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ. अनिल जयहिंद ने जातिगत जनगणना में ओबीसी के अलग कॉलम और केंद्र-राज्य की सूचियों में दर्ज जातियों के अनुसार गिनती कराने की मांग दोहराई।
उन्होंने भाजपा पर ओबीसी, दलित और आदिवासी वर्गों के हितों के खिलाफ नीतियां अपनाने का आरोप लगाया। डॉ. जयहिंद ने कहा कि ओबीसी वर्ग जातिगत जनगणना की मांग को लेकर लंबे समय से संघर्ष करता रहा है और राहुल गांधी के स्तर पर इस मुद्दे को देशव्यापी रूप से उठाया गया है।
उन्होंने यह भी कहा कि राहुल गांधी ओबीसी वर्ग की आबादी के अनुपात में आरक्षण, संसाधनों और संस्थानों में रोजगार के अवसरों की बात लगातार उठाते रहे हैं।
डॉ. जयहिंद ने आरोप लगाया कि ओबीसी से जुड़ी जातियों के आंकड़े स्पष्ट रूप से सामने न आने की स्थिति में उनकी आबादी और सामाजिक स्थिति का सही आकलन प्रभावित हो सकता है। उन्होंने कांग्रेस की तेलंगाना सरकार द्वारा कराई गई जातिगत गणना को एक मॉडल के रूप में पेश किया और कहा कि इससे ओबीसी वर्ग से जुड़ी नीतियां बनाने के लिए आंकड़े उपलब्ध होते हैं।
कांग्रेस के ओबीसी विभाग ने उत्तर प्रदेश में प्रस्तावित कार्यक्रमों की शुरुआत की तारीखों की जानकारी भी दी है। पार्टी के अनुसार, 22 अगस्त को कानपुर में और 23 अगस्त को जालौन में ‘जातिगत जनगणना और भागीदारी न्याय’ विषय पर सम्मेलन आयोजित किए जाएंगे। इन कार्यक्रमों के जरिए जातिगत जनगणना में ओबीसी कॉलम जोड़ने और सूचीबद्ध ओबीसी जातियों की गिनती की मांग को उठाया जाएगा।
उत्तर प्रदेश कांग्रेस ओबीसी विभाग के प्रदेश अध्यक्ष मनोज यादव ने बैठक में प्रदेशव्यापी कार्यक्रम का विवरण बताया। उनके अनुसार, अलग-अलग स्तरों पर निम्न कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे:
- जनपद मुख्यालयों पर धरना और ज्ञापन कार्यक्रम।
- प्रत्येक जनपद में जातिगत जनगणना और भागीदारी न्याय आधारित सम्मेलन।
- जनपद मुख्यालयों पर पदयात्रा।
- ब्लॉक स्तर पर गोष्ठी और संवाद कार्यक्रम।
- जनपद मुख्यालयों पर हस्ताक्षर अभियान।
इन कार्यक्रमों के जरिए पार्टी अपने बताए गए मांगों को जिला और ब्लॉक स्तर तक ले जाने की तैयारी कर रही है।
कांग्रेस ने अपने बयान में कहा कि नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी के निर्देश पर ओबीसी विभाग देशभर में जातिगत जनगणना के फॉर्म में ओबीसी कॉलम जोड़ने और केंद्र-राज्य सूची में मौजूद ओबीसी जातियों के अनुसार गिनती कराने की मांग को लेकर कार्यक्रमों की तैयारी कर रहा है।
उत्तर प्रदेश में 21 अगस्त को हुई बैठक को इसी अभियान की प्रदेश स्तरीय तैयारी के रूप में पेश किया गया। बैठक में प्रदेश कांग्रेस के पदाधिकारियों और ओबीसी विभाग के नेताओं ने आगे के कार्यक्रमों पर चर्चा की।
कांग्रेस की ओर से जातिगत जनगणना के मुद्दे को सामाजिक, आर्थिक और राजनीतिक भागीदारी से जोड़कर देखा गया है। पार्टी नेताओं ने कहा कि विभिन्न वर्गों की आबादी और उनकी सामाजिक-आर्थिक स्थिति से जुड़े आंकड़े सार्वजनिक नीति और प्रतिनिधित्व से जुड़े सवालों के लिए महत्वपूर्ण हैं।
पार्टी ने यह भी कहा कि ओबीसी वर्ग के संबंध में स्पष्ट आंकड़ों के आधार पर भागीदारी से जुड़े मुद्दों पर चर्चा आगे बढ़ाई जानी चाहिए। बैठक में कांग्रेस नेताओं ने संगठन स्तर पर भी सभी वर्गों को प्रतिनिधित्व देने की बात कही।
बैठक में कांग्रेस नेताओं ने भाजपा पर ओबीसी वर्ग की भागीदारी को लेकर आरोप लगाए। डॉ. अनिल जयहिंद ने भाजपा और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ पर ओबीसी वर्ग की भागीदारी के विरोध में रहने का आरोप लगाया।
उन्होंने केंद्र और राज्य स्तर की नीतियों को लेकर भी कई राजनीतिक आरोप लगाए। ये आरोप कांग्रेस नेताओं के बयानों का हिस्सा हैं। बैठक में भाजपा की ओर से इन आरोपों पर कोई प्रतिक्रिया उपलब्ध जानकारी में शामिल नहीं है।
कांग्रेस ने यह भी दावा किया कि देश में जातिगत जनगणना का मुद्दा उसने लंबे समय से उठाया है और ओबीसी वर्ग को संख्या के अनुपात में भागीदारी देने की मांग लगातार करती रही है।
बैठक में कांग्रेस नेताओं ने तेलंगाना सरकार द्वारा कराई गई जातिगत गणना का भी उल्लेख किया। पार्टी ने इसे ओबीसी वर्ग से जुड़ी नीतियां तैयार करने के लिए उपयोगी आंकड़े उपलब्ध कराने वाला मॉडल बताया।
हालांकि, बैठक में दिए गए बयान के अनुसार, कांग्रेस ने इसे अपने पक्ष के उदाहरण के तौर पर पेश किया। उपलब्ध जानकारी में इस प्रक्रिया की विस्तृत कार्यप्रणाली या आंकड़ों का अलग से विवरण नहीं दिया गया है।