>उत्तर प्रदेश में तेजी से बढ़ते साइबर अपराधों पर प्रभावी नियंत्रण के लिए योगी सरकार ने ‘साइबर कमांडो’ नामक एक विशेष टीम का गठन किया है। यह टीम साइबर ठगी और डिजिटल अपराधों से निपटने के लिए उन्नत तकनीक, विशेष प्रशिक्षण और रणनीतिक तैनाती के साथ कार्य करेगी।
>साइबर कमांडो की यह इकाई एसपीजी और एनएसजी कमांडो की तर्ज पर तैयार की गई है। पहले चरण में 15 चयनित पुलिस कर्मियों को विशेष प्रशिक्षण प्रदान किया गया है। इन कर्मियों का चयन तकनीकी दक्षता, विश्लेषण क्षमता और फील्ड अनुभव के आधार पर किया गया।
>साइबर/सीआईडी डीजी बिनोद कुमार सिंह ने बताया कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के निर्देश पर प्रदेश में साइबर अपराधों पर प्रभावी अंकुश लगाने के उद्देश्य से यह पहल की गई है। उन्होंने कहा, “प्रदेश में सुरक्षित डिजिटल वातावरण उपलब्ध कराने के लिए अत्याधुनिक तकनीक से लैस साइबर कमांडो की टीम तैयार की गई है।”
>इन कमांडो को देश के प्रतिष्ठित संस्थानों के विशेषज्ञों से प्रशिक्षण दिलाया गया है। इसमें आईआईटी कानपुर, नया रायपुर, आईआईटी मद्रास और राष्ट्रीय रक्षा विश्वविद्यालय (आरआरयू), गुजरात शामिल हैं। इसके अलावा राष्ट्रीय फॉरेंसिक साइंसेज यूनिवर्सिटी (एनएफएसयू), गुजरात और नई दिल्ली से साइबर फॉरेंसिक, डिजिटल ट्रेसिंग और ऑनलाइन अपराध जांच से जुड़ी तकनीकों का प्रशिक्षण भी दिया गया।
>प्रशिक्षण पूरा होने के बाद साइबर कमांडो को पुलिस जोन और मुख्यालय स्तर पर तैनात किया गया है। ये टीम साइबर ठगी, ऑनलाइन फ्रॉड, सोशल मीडिया अपराध, डाटा चोरी, फिशिंग और डिजिटल ब्लैकमेलिंग जैसे मामलों में त्वरित कार्रवाई करेगी। साथ ही यह कमांडो जिला और थाने स्तर के पुलिसकर्मियों को भी प्रशिक्षण दे रहे हैं, जिससे जमीनी स्तर पर साइबर अपराधों से निपटने की क्षमता बढ़ सके।
>साइबर कमांडो को एडवांस्ड सॉफ्टवेयर, डिजिटल फॉरेंसिक टूल्स, डाटा एनालिटिक्स सिस्टम और रियल-टाइम मॉनिटरिंग तकनीक से लैस किया गया है, ताकि साइबर अपराधियों के नेटवर्क की पहचान और कार्रवाई को मजबूत किया जा सके।