उत्तर प्रदेश में तकनीक और इलेक्ट्रॉनिक्स क्षेत्र से जुड़े विकास को लेकर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने मंगलवार को प्रदेश की मौजूदा स्थिति और 2017 के बाद हुए बदलावों के आंकड़े साझा किए। मुख्यमंत्री ने ‘एक्स’ पर एक पोस्ट के जरिए मोबाइल और इलेक्ट्रॉनिक्स उत्पादन, डेटा सेंटर, स्टार्टअप, यूनिकॉर्न और चिप निर्माण से संबंधित जानकारी दी।
मुख्यमंत्री ने अपने पोस्ट में उत्तर प्रदेश की तकनीकी अर्थव्यवस्था से जुड़े कई आंकड़े सामने रखे। इनमें प्रदेश में 24 हजार से अधिक स्टार्टअप, 8 यूनिकॉर्न और 644 मेगावाट के डेटा सेंटर के प्रस्ताव शामिल हैं। उन्होंने जेवर में बन रही चिप इकाई और इलेक्ट्रॉनिक्स उत्पादन में प्रदेश की हिस्सेदारी का भी उल्लेख किया।
असेंबली से AI तक: नए उत्तर प्रदेश की नई उड़ान... पूर्ववर्ती सरकारों ने प्रदेश के अनलिमिटेड पोटेंशियल का उपयोग नहीं किया, बल्कि इसे बीमारू ही बनाए रखा। आज साढ़े 9 वर्षों के भीतर देश के करीब 60 प्रतिशत मोबाइल फोन और 55 प्रतिशत इलेक्ट्रॉनिक्स कंपोनेंट के उत्पादन में प्रदेश की हिस्सेदारी है। आदरणीय प्रधानमंत्री श्री @narendramodi जी ने Make in India, Digital India और आत्मनिर्भर भारत का जो विजन दिया, डबल इंजन सरकार ने उसे उत्तर प्रदेश में नीति, निवेश और उत्पादन से जोड़कर जमीन पर उतारा है। जेवर में ₹3,706 करोड़ की HCL-Foxconn चिप इकाई बन रही है, 644 मेगावाट के डेटा सेंटर प्रस्ताव आ चुके हैं, और प्रदेश में 24,000 से अधिक स्टार्टअप और 8 यूनिकॉर्न हैं। यानी यात्रा Mobile से Module और Module से Microchip तक पहुंच रही है। लेकिन वर्ष 2017 से पहले तस्वीर अलग थी। घोषणाएं होती थीं, पर परियोजनाएं जमीन पर उतरने के लिए संघर्ष करती थीं। क्योंकि तब परिवारवाद ही विकास था, सैफई महोत्सव ही सांस्कृतिक उत्थान और माफियाकरण ही औद्योगिकीकरण का मॉडल बन गया था। जब चिंता प्रदेश से अधिक परिवार की और निवेशक से अधिक अपराधियों की हो, तो भविष्य की तकनीक के लिए वातावरण कैसे बनेगा?
— Yogi Adityanath (@myogiadityanath) October 6, 2026
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने अपने सोशल मीडिया पोस्ट में 2017 के बाद उत्तर प्रदेश में तकनीकी और औद्योगिक क्षेत्र में हुए बदलावों का उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ‘मेक इन इंडिया’, ‘डिजिटल इंडिया’ और ‘आत्मनिर्भर भारत’ के विजन को उत्तर प्रदेश में नीति, निवेश और उत्पादन से जोड़ा गया है। मुख्यमंत्री ने अपने पोस्ट में पूर्ववर्ती सरकारों की नीतियों पर भी टिप्पणी की। उन्होंने लिखा कि जब प्रदेश से अधिक परिवार और निवेशक से अधिक अपराधियों की चिंता हो, तो भविष्य की तकनीक के लिए वातावरण कैसे तैयार होगा।
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मुख्यमंत्री ने बताया कि पिछले साढ़े नौ वर्षों में उत्तर प्रदेश देश के मोबाइल फोन और इलेक्ट्रॉनिक्स कंपोनेंट उत्पादन में महत्वपूर्ण हिस्सेदारी हासिल कर रहा है। उनके अनुसार, वर्तमान में देश के करीब 60 प्रतिशत मोबाइल फोन और 55 प्रतिशत इलेक्ट्रॉनिक्स कंपोनेंट का उत्पादन उत्तर प्रदेश में हो रहा है। मुख्यमंत्री ने इसी क्रम में प्रदेश की तकनीकी यात्रा को मोबाइल उत्पादन से आगे बढ़ते हुए मॉड्यूल और माइक्रोचिप तक पहुंचने की बात कही। यह आंकड़े मुख्यमंत्री ने अपने सोशल मीडिया पोस्ट में साझा किए हैं।
मुख्यमंत्री के अनुसार, जेवर में 3,706 करोड़ रुपये की एचसीएल-फॉक्सकॉन चिप इकाई का निर्माण हो रहा है। चिप निर्माण से संबंधित इस परियोजना को मुख्यमंत्री ने प्रदेश में इलेक्ट्रॉनिक्स और तकनीकी उत्पादन की दिशा में आगे बढ़ रही गतिविधियों के संदर्भ में रखा। उन्होंने मोबाइल फोन और इलेक्ट्रॉनिक्स कंपोनेंट उत्पादन के बाद माइक्रोचिप निर्माण तक पहुंचने को प्रदेश की तकनीकी विकास यात्रा का हिस्सा बताया।
मुख्यमंत्री ने उत्तर प्रदेश में 644 मेगावाट क्षमता के डेटा सेंटर के प्रस्ताव आने की जानकारी दी। डेटा सेंटर डिजिटल अर्थव्यवस्था के लिए महत्वपूर्ण बुनियादी ढांचे का हिस्सा हैं। मुख्यमंत्री ने इलेक्ट्रॉनिक्स उत्पादन के विस्तार के साथ डेटा सेंटर की जरूरत बढ़ने और इसके बाद एआई से जुड़े बुनियादी ढांचे की दिशा में आगे बढ़ने का उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि इलेक्ट्रॉनिक्स क्षेत्र के विस्तार के साथ डेटा की जरूरत और डेटा सेंटर का महत्व बढ़ा है।
मुख्यमंत्री ने प्रदेश के स्टार्टअप इकोसिस्टम से जुड़े आंकड़े भी साझा किए। उनके अनुसार, उत्तर प्रदेश में 24,000 से अधिक स्टार्टअप हैं। इसके साथ ही प्रदेश में 8 यूनिकॉर्न होने की जानकारी भी उन्होंने दी। मुख्यमंत्री ने स्टार्टअप इकोसिस्टम को युवाओं के रोजगार और उद्यमिता से जोड़ते हुए कहा कि इससे युवाओं को नौकरी खोजने वाले से आगे बढ़कर रोजगार देने वाले बनने का अवसर मिल रहा है।
मुख्यमंत्री ने कृत्रिम बुद्धिमत्ता से जुड़ी पहल का भी उल्लेख किया। उन्होंने बताया कि एआई-प्रज्ञा के माध्यम से 10 लाख युवाओं को नई तकनीक से जोड़ने का लक्ष्य रखा गया है। मुख्यमंत्री ने इसे युवाओं को नई तकनीक से जोड़ने और तकनीकी कौशल के विस्तार से संबंधित पहल के रूप में प्रस्तुत किया।
मुख्यमंत्री ने उत्तर प्रदेश में डिजिटल अर्थव्यवस्था के विस्तार को डेटा सेंटर और एआई सिटी की दिशा से जोड़ा। उनके अनुसार, इलेक्ट्रॉनिक्स उत्पादन बढ़ने के साथ डेटा सेंटर की आवश्यकता बढ़ी और डेटा के बढ़ते उपयोग के साथ प्रदेश अब डेटा सेंटर से एआई सिटी तक भविष्य की डिजिटल अर्थव्यवस्था का आधार तैयार कर रहा है। मुख्यमंत्री ने तकनीक के क्षेत्र में प्रदेश की यात्रा को असेंबली से एआई तक पहुंचने वाली यात्रा के रूप में बताया।
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने अपने सोशल मीडिया पोस्ट में वर्ष 2017 से पहले के उत्तर प्रदेश की स्थिति पर भी टिप्पणी की। उन्होंने लिखा कि उस समय घोषणाएं होती थीं, लेकिन परियोजनाओं को जमीन पर उतरने में कठिनाई होती थी। मुख्यमंत्री ने पूर्ववर्ती सरकारों पर परिवारवाद, सैफई महोत्सव और माफियाकरण को लेकर भी राजनीतिक टिप्पणी की। उन्होंने अपने पोस्ट में कहा कि अब प्राथमिकता में बदलाव किया गया है और प्रदेश के विकास, निवेशक संरक्षण तथा तकनीक पर जोर दिया गया है।
मुख्यमंत्री ने अपने पोस्ट में सरकार की प्राथमिकताओं का उल्लेख करते हुए कहा कि परिवार के विकास की जगह प्रदेश के विकास, माफिया के संरक्षण की जगह निवेशक के संरक्षण और तुष्टीकरण की जगह तकनीक पर जोर दिया गया है। इसके साथ ही उन्होंने इलेक्ट्रॉनिक्स उत्पादन, डेटा सेंटर और एआई क्षेत्र के बीच संबंध का उल्लेख किया। मुख्यमंत्री के अनुसार, इलेक्ट्रॉनिक्स क्षेत्र के विस्तार के बाद डेटा सेंटर और फिर एआई से संबंधित गतिविधियों के लिए आधार तैयार हो रहा है।
मुख्यमंत्री ने बताया कि मंगलवार को लखनऊ में एचसीएल टेक की स्थापना के 10 वर्ष पूरे होने के अवसर पर आयोजित कार्यक्रम में वह शामिल होंगे। उन्होंने कहा कि इस अवसर पर एचसीएल जीयूवीआई इमर्जिंग टेक स्किलिंग सेंटर का शुभारंभ भी होगा। कार्यक्रम को मुख्यमंत्री ने ‘विकसित भारत-विकसित उत्तर प्रदेश’ के संकल्प से जोड़ा है।