उत्तर प्रदेश में किसानों को कृषि ऋण से जोड़ने की प्रक्रिया अब डिजिटल माध्यम से तेजी से आगे बढ़ रही है। राज्य में शुरू की गई डिजिटल किसान क्रेडिट कार्ड यानी ई-केसीसी व्यवस्था ने आठ महीने के भीतर एक महत्वपूर्ण आंकड़ा पार किया है। इस दौरान बड़ी संख्या में किसानों ने डिजिटल माध्यम से किसान क्रेडिट कार्ड के लिए आवेदन किया है। उत्तर प्रदेश ने ई-केसीसी के तहत एक लाख से अधिक आवेदन दर्ज किए हैं। उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार, इस संख्या के साथ राज्य देश में सबसे आगे है। इस सूची में कर्नाटक करीब 95 हजार आवेदनों के साथ दूसरे और हरियाणा करीब 42 हजार आवेदनों के साथ तीसरे स्थान पर बताया गया है।
उत्तर प्रदेश में डिजिटल किसान क्रेडिट कार्ड सुविधा की शुरुआत किसानों के लिए ऋण प्रक्रिया को आसान बनाने के उद्देश्य से की गई थी। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, योजना शुरू होने के बाद महज आठ महीने में राज्य में ई-केसीसी के लिए एक लाख से अधिक आवेदन दर्ज किए गए। ई-केसीसी व्यवस्था के तहत किसान डिजिटल माध्यम से आवेदन कर सकते हैं। इसका उद्देश्य किसान क्रेडिट कार्ड और कृषि ऋण की प्रक्रिया को अधिक सुविधाजनक बनाना है। इस व्यवस्था में किसानों को आवेदन के लिए डिजिटल माध्यम का इस्तेमाल करने की सुविधा दी गई है। उत्तर प्रदेश में एक लाख से अधिक आवेदन दर्ज होने के बाद राज्य इस मामले में देश में पहले स्थान पर पहुंच गया है। कर्नाटक में करीब 95 हजार और हरियाणा में करीब 42 हजार आवेदन दर्ज होने की जानकारी दी गई है।
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किसान क्रेडिट कार्ड के लिए आवेदन करने की पारंपरिक प्रक्रिया में किसानों को बैंक शाखाओं और संबंधित कार्यालयों तक जाना पड़ता था। इससे आवेदन प्रक्रिया में समय लगता था और किसानों को अलग-अलग स्तरों पर दस्तावेजों और सत्यापन से जुड़ी प्रक्रियाओं का सामना करना पड़ता था। ई-केसीसी व्यवस्था में आवेदन प्रक्रिया को डिजिटल माध्यम से पूरा करने की सुविधा दी गई है। उपलब्ध जानकारी के मुताबिक किसान अपने मोबाइल ऐप या ई-केसीसी पोर्टल के माध्यम से घर से आवेदन कर सकते हैं। इस व्यवस्था में भूमि अभिलेखों यानी भूलेख का डिजिटल सत्यापन भी शामिल है। डिजिटल सत्यापन के जरिए ऋण आवेदन की प्रक्रिया को कम समय में पूरा करने का प्रयास किया गया है।
कृषि ऋण से जुड़ी प्रक्रिया में भूमि संबंधी दस्तावेज महत्वपूर्ण होते हैं। ई-केसीसी व्यवस्था में भूमि अभिलेखों के डिजिटल सत्यापन को प्रक्रिया का हिस्सा बनाया गया है।इससे आवेदन के दौरान उपलब्ध भूमि संबंधी रिकॉर्ड को डिजिटल तरीके से सत्यापित किया जा सकता है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, इस व्यवस्था का उद्देश्य ऋण आवेदन और राशि हस्तांतरण की प्रक्रिया को पहले की तुलना में अधिक सरल बनाना है। डिजिटल व्यवस्था के जरिए किसानों को आवेदन के लिए अलग-अलग कार्यालयों के चक्कर लगाने की आवश्यकता कम करने का लक्ष्य रखा गया है। साथ ही, बैंकिंग प्रक्रिया को किसानों तक डिजिटल माध्यम से पहुंचाने पर जोर दिया गया है।
ई-केसीसी के आवेदन आंकड़ों में उत्तर प्रदेश की स्थिति अन्य राज्यों की तुलना में आगे बताई गई है। उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार:
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उत्तर प्रदेश: एक लाख से अधिक आवेदन
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कर्नाटक: करीब 95 हजार आवेदन
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हरियाणा: करीब 42 हजार आवेदन
इन आंकड़ों के आधार पर उत्तर प्रदेश को ई-केसीसी आवेदन के मामले में देश में पहला स्थान मिला है। आठ महीने की अवधि में एक लाख से अधिक आवेदन का आंकड़ा पार करना इस डिजिटल व्यवस्था के विस्तार को दर्शाता है। योजना के तहत किसानों को डिजिटल माध्यम से औपचारिक बैंकिंग व्यवस्था से जोड़ने पर जोर दिया गया है।
फरवरी में शुरू की गई थी डिजिटल केसीसी सुविधा
उत्तर प्रदेश के सहकारिता मंत्री जेपीएस राठौर के अनुसार, मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने नाबार्ड द्वारा संचालित डिजिटल केसीसी सुविधा का शुभारंभ इसी वर्ष फरवरी में किया था। इस सुविधा का उद्देश्य किसानों को तकनीक के माध्यम से औपचारिक बैंकिंग प्रणाली से जोड़ना और कृषि ऋण लेने की प्रक्रिया को सरल बनाना है। योजना की शुरुआत के बाद आठ महीने में एक लाख से अधिक आवेदन दर्ज होना इसके मौजूदा विस्तार का प्रमुख आंकड़ा है। उपलब्ध जानकारी में इसे उत्तर प्रदेश के डिजिटल कृषि सेवाओं की दिशा में महत्वपूर्ण उपलब्धि के तौर पर बताया गया है।
ई-केसीसी व्यवस्था को किसानों तक पहुंचाने के लिए उत्तर प्रदेश के राजस्व और सहकारिता विभाग ने बैंक शाखाओं के साथ मिलकर काम किया। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, योजना को गांव-गांव तक पहुंचाने के लिए विभागीय स्तर पर प्रयास किए गए। इस प्रक्रिया में डिजिटल आवेदन और बैंकिंग व्यवस्था को एक साथ जोड़ने पर जोर दिया गया। इससे किसान अपने स्तर पर डिजिटल माध्यम से आवेदन कर सकें और बैंकिंग प्रणाली के माध्यम से कृषि ऋण की प्रक्रिया आगे बढ़ सके।
ई-केसीसी की प्रमुख विशेषताओं में डिजिटल माध्यम से आवेदन की सुविधा शामिल है। किसान मोबाइल ऐप या ई-केसीसी पोर्टल के माध्यम से आवेदन कर सकते हैं। इस व्यवस्था से आवेदन करने के लिए बैंक शाखा तक जाने की आवश्यकता कम हो सकती है। भूमि रिकॉर्ड के डिजिटल सत्यापन की सुविधा भी इसी प्रक्रिया का हिस्सा है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, डिजिटल प्रक्रिया का उद्देश्य समय और संसाधनों की बचत के साथ किसानों तक औपचारिक बैंकिंग व्यवस्था की पहुंच को आसान बनाना है।
उत्तर प्रदेश में ई-केसीसी की प्रगति को राज्य में डिजिटल कृषि सेवाओं के विस्तार से जोड़कर देखा जा रहा है। योजना के जरिए किसानों को कृषि ऋण की औपचारिक बैंकिंग व्यवस्था से जोड़ने पर जोर दिया गया है। कृषि क्षेत्र में ऋण की उपलब्धता किसानों के लिए महत्वपूर्ण है। ई-केसीसी व्यवस्था इसी प्रक्रिया को डिजिटल माध्यम से सरल बनाने के उद्देश्य से लागू की गई है। योजना के तहत आवेदन प्रक्रिया को ऑनलाइन माध्यम से उपलब्ध कराने, भूमि रिकॉर्ड के डिजिटल सत्यापन और बैंकिंग प्रक्रिया को जोड़ने पर ध्यान दिया गया है।
उत्तर प्रदेश के सहकारिता मंत्री जेपीएस राठौर ने ई-केसीसी के आवेदन आंकड़े को राज्य की डिजिटल कृषि व्यवस्था से जुड़ी उपलब्धि के रूप में बताया है। उनके अनुसार, डिजिटल केसीसी सुविधा का उद्देश्य किसानों को तकनीक के माध्यम से औपचारिक बैंकिंग प्रणाली से जोड़ना है। आठ महीने में एक लाख से अधिक किसानों का ई-केसीसी के लिए आवेदन करना योजना के विस्तार से जुड़ा प्रमुख आंकड़ा है। मंत्री की ओर से साझा की गई जानकारी के अनुसार, डिजिटल प्रक्रिया के जरिए किसानों को ऋण सुविधा से जोड़ने और आवेदन प्रक्रिया को सरल बनाने पर जोर दिया जा रहा है।
ई-केसीसी की डिजिटल प्रक्रिया में आवेदन और भूमि अभिलेखों के सत्यापन को ऑनलाइन माध्यम से जोड़ने का उद्देश्य प्रक्रिया को अधिक पारदर्शी बनाना बताया गया है।उपलब्ध जानकारी के अनुसार, डिजिटल व्यवस्था से बिचौलियों की भूमिका कम करने और पात्र किसानों तक बैंक ऋण की सीधी पहुंच सुनिश्चित करने का प्रयास किया जा रहा है। इस व्यवस्था में किसान डिजिटल माध्यम से आवेदन कर सकता है और संबंधित बैंकिंग प्रक्रिया आगे बढ़ती है। हालांकि ऋण स्वीकृति और राशि हस्तांतरण संबंधित प्रक्रिया तथा पात्रता के आधार पर होता है।
उत्तर प्रदेश में बड़ी संख्या में किसान कृषि गतिविधियों के लिए संस्थागत ऋण पर निर्भर रहते हैं। ऐसे में किसान क्रेडिट कार्ड से जुड़ी प्रक्रिया को डिजिटल बनाने का उद्देश्य किसानों के लिए आवेदन प्रक्रिया को आसान करना है। ई-केसीसी के माध्यम से किसान अपने मोबाइल फोन या डिजिटल पोर्टल का इस्तेमाल कर आवेदन कर सकते हैं। इससे उन किसानों को भी डिजिटल माध्यम से बैंकिंग प्रक्रिया से जोड़ने का अवसर मिलता है जो पहले आवेदन के लिए बैंक शाखाओं तक जाते थे। डिजिटल प्रक्रिया में भूमि अभिलेखों के सत्यापन को शामिल किए जाने से आवेदन से जुड़ी दस्तावेजी प्रक्रिया को भी ऑनलाइन माध्यम से आगे बढ़ाने की व्यवस्था की गई है।