लखनऊ, 30 सितंबर। उत्तर प्रदेश में बिजली उपभोक्ताओं के लिए अक्टूबर के बिल से जुड़ा एक महत्वपूर्ण बदलाव सामने आया है। बिजली की खरीद लागत में आए बदलाव का असर अब उपभोक्ताओं के बिलों में दिखाई देगा। इस संबंध में उत्तर प्रदेश पावर कॉरपोरेशन लिमिटेड (यूपीपीसीएल) की ओर से आवश्यक आदेश जारी किए गए हैं। अक्टूबर के लिए निर्धारित व्यवस्था के तहत उपभोक्ताओं के बिजली बिल में राहत का समायोजन किया जाएगा। यह राहत ईंधन एवं विद्युत क्रय समायोजन अधिभार (एफपीपीएएस) के तहत तय की गई दर के आधार पर मिलेगी।
यूपीपीसीएल के निदेशक वाणिज्य प्रशांत वर्मा के अनुसार अक्टूबर माह के लिए एफपीपीएएस की दर (-)5.24 प्रतिशत निर्धारित की गई है। ऋणात्मक दर का लाभ बिजली उपभोक्ताओं के बिलों में समायोजित किया जाएगा। यूपीपीसीएल के अनुसार इस व्यवस्था से प्रदेशभर के बिजली उपभोक्ताओं को करीब 424 करोड़ रुपये की राहत मिलने का अनुमान है। यानी अक्टूबर माह के बिजली बिल की गणना में निर्धारित एफपीपीएएस समायोजन का असर दिखाई देगा। यह व्यवस्था बिजली की खरीद और ईंधन की लागत में हुए बदलाव को उपभोक्ताओं के बिल में समायोजित करने से जुड़ी है।
एफपीपीएएस यानी ईंधन एवं विद्युत क्रय समायोजन अधिभार वह व्यवस्था है जिसके माध्यम से बिजली और ईंधन की खरीद लागत में होने वाले उतार-चढ़ाव का प्रभाव समयबद्ध तरीके से बिजली बिलों में समायोजित किया जाता है। बिजली उत्पादन और आपूर्ति के लिए विभिन्न स्रोतों से बिजली की खरीद की जाती है। इसके साथ ईंधन की लागत भी बिजली की कुल खरीद लागत को प्रभावित करती है। इन लागतों में बदलाव होने पर एफपीपीएएस व्यवस्था के माध्यम से उसका समायोजन किया जाता है। यदि निर्धारित लागत में वृद्धि होती है तो उसका प्रभाव संबंधित व्यवस्था के अनुसार बिल में आ सकता है। वहीं, लागत में कमी होने पर समायोजन के माध्यम से उपभोक्ताओं को उसका लाभ दिया जाता है। अक्टूबर के लिए निर्धारित (-)5.24 प्रतिशत एफपीपीएएस दर इसी तरह के समायोजन से संबंधित है।
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यूपीपीसीएल की ओर से दी गई जानकारी के मुताबिक अक्टूबर के लिए निर्धारित एफपीपीएएस दर से प्रदेश के बिजली उपभोक्ताओं को करीब 424 करोड़ रुपये की राहत मिलने का अनुमान है। यह राशि प्रदेशभर के उपभोक्ताओं के बिजली बिलों में निर्धारित व्यवस्था के तहत समायोजित होने वाली राहत को दर्शाती है। इसका मतलब यह है कि राहत किसी अलग भुगतान के रूप में नहीं बल्कि बिजली बिल में समायोजन के माध्यम से दी जाएगी।
एफपीपीएएस के तहत निर्धारित ऋणात्मक दर को बिजली बिल में समायोजित किया जाएगा। ऐसे में उपभोक्ताओं के बिल में इस समायोजन का असर दिखाई देगा। राहत की वास्तविक रुपये में राशि अलग-अलग उपभोक्ताओं के लिए समान नहीं होगी। इसका संबंध संबंधित बिजली बिल और उस पर लागू गणना से होगा। उपलब्ध जानकारी में अक्टूबर के लिए एफपीपीएएस की दर 5.24 प्रतिशत ऋणात्मक निर्धारित किए जाने की जानकारी दी गई है।
यूपीपीसीएल के मुताबिक एफपीपीएएस व्यवस्था का उद्देश्य बिजली और ईंधन की खरीद लागत में होने वाले बदलाव का समयबद्ध समायोजन करना है। बिजली खरीद लागत में अनुकूल बदलाव होने पर उसका लाभ उपभोक्ताओं तक पहुंचाने की व्यवस्था इसी प्रक्रिया का हिस्सा है। अक्टूबर के लिए जारी आदेश में भी विद्युत क्रय लागत में कमी का लाभ उपभोक्ताओं के बिजली बिलों में समायोजित करने की बात कही गई है।
अक्टूबर से पहले जुलाई, अगस्त और सितंबर के लिए भी एफपीपीएएस के तहत अलग-अलग राहत दरें निर्धारित की गई थीं। जुलाई में 4.43 प्रतिशत, अगस्त में 2.92 प्रतिशत और सितंबर में 7.93 प्रतिशत राहत दी गई। अक्टूबर में यह दर (-)5.24 प्रतिशत निर्धारित की गई है। इस प्रकार लगातार चार महीनों के लिए एफपीपीएएस के माध्यम से राहत का समायोजन किए जाने की जानकारी यूपीपीसीएल ने दी है।
अक्टूबर के लिए एफपीपीएएस की दर निर्धारित होने के बाद यूपीपीसीएल ने संबंधित आवश्यक आदेश जारी किए हैं। निदेशक वाणिज्य प्रशांत वर्मा ने इसकी जानकारी दी। आदेश के अनुसार निर्धारित ऋणात्मक एफपीपीएएस दर का लाभ उपभोक्ताओं के बिजली बिल में समायोजित किया जाएगा। इससे अक्टूबर माह में जारी होने वाले बिजली बिलों में संबंधित समायोजन लागू होगा।