नेपाल सीमा पर बढ़ी निगरानी, किसानों के नाम पर ‘खाद खेल’ पर सरकार सख्त

08 Nov 2025


>उत्तर प्रदेश सरकार ने रबी सीजन में खाद की बढ़ती खपत और संभावित तस्करी को देखते हुए कड़े कदम उठाने शुरू कर दिए हैं। नेपाल सीमा से सटे जिलों में उर्वरक की संभावित कालाबाजारी और तस्करी के मद्देनज़र विशेष निगरानी टीमें तैनात कर दी गई हैं। सरकार चाहती है कि प्रदेश में खाद की उपलब्धता बनी रहे और किसी किसान को दिक्कत न हो। लेकिन कुछ जिलों में समितियों के बाहर लगती लंबी कतारें और असामान्य बिक्री आंकड़े प्रशासन को सतर्क कर रहे हैं।


>कृषि विभाग के आंकड़ों से पता चला है कि झांसी और ललितपुर में अप्रैल से अब तक खाद वितरण में असामान्य बढ़ोतरी हुई है। कई किसानों के नाम पर एक-एक टन से अधिक खाद जारी होने का मामला सामने आया है। इसी के आधार पर विभाग ने दो थ्री-मेंबर जांच टीमें गठित की हैं, जो किसानों से संपर्क कर भूमि क्षेत्र, फसल और उर्वरक उपयोग की वास्तविक स्थिति की जांच करेंगीं।


>खरीफ सीजन में भी कई जगहों पर उर्वरक की अनियमित बिक्री और तस्करी की शिकायतें सामने आई थीं। इस बार सावधानी बरतते हुए पीलीभीत, लखीमपुर खीरी, बहराइच, श्रावस्ती, बलरामपुर, सिद्धार्थनगर और महाराजगंज जैसे नेपाल बॉर्डर जिलों में विशेष निगरानी टीमें तैनात हैं। उनसे अधिक खाद बेचने वाले विक्रेताओं और असामान्य मात्रा में खाद लेने वाले किसानों की सूची तैयार करने को कहा गया है।


>सरकारी आंकड़ों के अनुसार 7 नवंबर तक 38.15 लाख मीट्रिक टन खाद उपलब्ध थी जिसमे से 13.15 लाख टन वितरण हुआ और 
25 लाख टन स्टॉक उपलब्ध है इसके बावजूद कई क्षेत्रों से किल्लत की शिकायतें आ रही हैं, जिसकी वजह से कालाबाजारी की आशंका मजबूत हो रही है।


>कृषि निदेशक डॉक्टर पंकज त्रिपाठी ने टीमों को निर्देश दिए हैं कि वे किसानों से खेत और फसल की जानकारी लें, विक्रेताओं के रिकॉर्ड चेक करें और वास्तविक खपत और वितरण की पुष्टि करें सरकार ने साफ किया है कि खाद की कालाबाजारी या आपूर्ति में गड़बड़ी को किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।