>उत्तर प्रदेश में इस वर्ष मानसून के दौरान नदियों का प्रचंड रूप 43 जिलों पर भारी पड़ा। कहीं गांव जलमग्न हुए, तो कहीं घरों में बाढ़ का पानी घुस आया। लाखों की आबादी प्रभावित हुई, लेकिन राहत की बात यह रही कि योगी सरकार ढाल बनकर जनता के साथ खड़ी रही।
>राहत आयुक्त कार्यालय से प्राप्त आंकड़ों के अनुसार अब तक प्रदेश के 116 तहसील, 2673 गांव और 123 शहरी वार्ड बाढ़ की चपेट में आए। कुल 9.55 लाख से अधिक लोग प्रभावित हुए, जिनमें से वर्तमान में सिर्फ 2.46 लाख लोग प्रभावित क्षेत्रों में हैं। सरकार ने स्थिति को संभालने के लिए युद्धस्तर पर कार्य किया है।
बचाव और राहत कार्य में लगी पूरी मशीनरी
• 1796 बाढ़ चौकियां सक्रिय
• 1273 मेडिकल टीमें तैनात
• 3579 नाव और मोटरबोट बचाव कार्य में लगीं
• 1391 शरणालयों का निर्माण, जिनमें से 557 अभी संचालित
• अब तक 1,00,404 लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया गया
>मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ लगातार मॉनिटरिंग कर रहे हैं। उन्होंने प्रभारी मंत्रियों को राहत कार्यों की कमान सौंपी और स्पष्ट कहा कि “इस संकट की घड़ी में सरकार हर नागरिक के साथ खड़ी है।”
>अब तक प्रभावितों को 1,82,216 खाद्यान्न पैकेट और 10,30,534 लंच पैकेट वितरित किए जा चुके हैं। इसके साथ ही 774 मकान क्षतिग्रस्त हुए, जिनमें से 637 को सहायता राशि मिल चुकी है।
>पशुओं के लिए 14,740 क्विंटल भूसा, पीने के पानी की शुद्धता हेतु 92,020 क्लोरीन टैबलेट और स्वास्थ्य सुरक्षा के लिए 3,58,555 ओआरएस पैकेट बांटे गए। विषैले जीव-जंतुओं के खतरे से बचाव के लिए एंटी-स्नेक वैनम और एंटी-रेबीज टीके का भी पर्याप्त स्टॉक उपलब्ध कराया गया है।
>अब तक 43 जिलों में बाढ़ का असर देखा गया, लेकिन राहत कार्यों के चलते फिलहाल 18 जिलों तक ही स्थिति सीमित रह गई है। इनमें – बलिया, बहराइच, बदायूं, चंदौली, फर्रुखाबाद, गोंडा, गाजीपुर, हरदोई, कानपुर नगर, कासगंज, लखीमपुर खीरी, मेरठ, मीरजापुर, मुजफ्फरनगर, प्रयागराज, शाहजहांपुर, उन्नाव और वाराणसी शामिल हैं।