कट्टों के प्रदेश से कारखानों के प्रदेश तक, योगी का यूपी बन रहा इंडस्ट्री हब

31 Mar 2026

कभी अपराध गैंगवॉर बाहुबलियों और कट्टो का प्रदेश कहे जाने वाले यूपी में बुलडोज़र सरकार के आने के बाद परिस्तिथि बिलकुल बदल गयी है, पिछले 9 साल में योगी सरकार की नीतियों ने न सिर्फ इस प्रदेश को नागरिकों के लिए कानूनी दृष्टि से सुरक्षित किया बल्कि युवाओं के लिए रोजगार के नए अवसर भी पैदा किया योगी सरकार ने जहा एक और से प्रदेश को अपराध मुक्त करने के लिए सख्त नीतिया बनायीं तो वहीँ सरकार ने रोजगार के लिए प्रदेश में ईस ऑफ़ डुइंग जैसी नीतिया भी निवेशकों के आगे रखी।  

 

यही कारण है की उत्तर प्रदेश में पिछले 9 साल में औद्योगिक गतिविधियों में तेजी दर्ज की गई है। आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार अप्रैल 2017 के बाद से अब तक 17,841 नए कारखाने रजिस्ट्रेशन हुए हैं, जिससे प्रदेश में कुल रजिस्टर्ड कारखानों की संख्या 32,019 तक पहुंच गई है।

 

प्रदेश सरकार के आंकड़ों के मुताबिक, स्वतंत्रता के बाद वर्ष 1947 से मार्च 2017 तक करीब 70 वर्षों में कुल 14,178 कारखाने रजिस्टर्ड हुए थे। इसके मुकाबले पिछले नौ वर्षों में कारखानों के रजिस्ट्रेशन की रफ्तार में चौकाने वाली तेजी दर्ज की गई है ये तेजी महज व्यापार नहीं बल्कि प्रदेश में निवेशकों का भरोसा भी बताती है।

 

यूपी प्रमुख सचिव श्रम एवं रोजगार डॉ. एमके शनमुगा सुंदरम के अनुसार पिछले 9 वर्षों में औद्योगिक विकास को गति देने के लिए प्रक्रियाओं को सरल बनाने और निवेश अनुकूल माहौल तैयार करने पर जोर दिया गया है। ‘ईज ऑफ डूइंग बिजनेस’ सुधारों के तहत सिंगल विंडो सिस्टम, ऑनलाइन क्लीयरेंस, भूमि बैंक, बेहतर कानून-व्यवस्था और आधारभूत संरचना के विकास जैसे कदम उठाए गए हैं, जिससे निवेशकों की रुचि बढ़ी है।

 

आंकड़ों के अनुसार सितंबर 2023 से अब तक 10,194 कारखानों का रजिस्ट्रेशन हुआ है, जबकि चालू वित्तीय वर्ष में 4,746 नए कारखाने जुड़े हैं। इन इकाइयों में वर्तमान में 16,53,179 लोग कार्यरत हैं, जिनमें 15,29,907 पुरुष और 1,23,272 महिलाएं शामिल हैं।

 

क्षेत्रवार आंकड़ों में पश्चिमी उत्तर प्रदेश में सर्वाधिक 10,895 कारखाने रजिस्टर्ड हुए हैं। इसके अलावा मध्य उत्तर प्रदेश में 3,526, पूर्वी उत्तर प्रदेश में 3,205 और बुंदेलखंड क्षेत्र में 215 कारखानों का रजिस्ट्रेशन हुआ है।

 

उद्योगों के आकार के आधार पर 14,412 कारखाने ऐसे हैं, जिन्हे स्टार्टअप  में गिना जाता है जहां 100 या उनसे अधिक लेबर कार्यरत हैं, जबकि 3,213 इकाइयों में 101 से 1000 तक लेबर हैं। इसके अलावा 118 बड़े कारखाने ऐसे हैं, जिनमें 1000 से अधिक लेबर कार्यरत हैं।

 

प्रदेश में औद्योगिक विकास के साथ-साथ इंफ़्रा और कनेक्टिविटी के विस्तार को भी अहम कारण माना जा रहा है। एक्सप्रेसवे, डिफेंस कॉरिडोर, एयरपोर्ट और लॉजिस्टिक हब जैसी परियोजनाओं के चलते औद्योगिक गतिविधियों को बढ़ावा मिला है जिस कारण बिज़नेस को स्प्रेड होने में आसानी मिलती है। यूपी के इतिहास के मुकाबले पिछले 9 साल में कानून-व्यवस्था में सुधार को भी निवेश आकर्षित करने में महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

 

राजनीतिक परिप्रेक्ष्य में औद्योगिक विकास और रोजगार सृजन के ये आंकड़े राज्य सरकार के लिए महत्वपूर्ण माने जा रहे हैं, खासकर आगामी चुनावी परिदृश्य को देखते हुए। स्थानीय स्तर पर रोजगार के अवसर बढ़ने को ग्रामीण और शहरी अर्थव्यवस्था के लिए भी अहम माना जा रहा है।