>उत्तर प्रदेश इन दिनों प्रकृति के कोप का गंभीर दंश झेल रहा है। आमतौर पर राहत और ठंडक लाने वाला मॉनसून अब डर और तबाही की वजह बन चुका है। गंगा-यमुना सहित कई नदियों का जलस्तर खतरे के निशान को पार कर चुका है, और प्रदेश के 18 से अधिक जिले बाढ़ की चपेट में हैं। गांवों में पानी भरने से लोगों का घरों से निकलना दूभर हो गया है, तो कई स्थानों पर स्कूल-कॉलेज भी बंद करने पड़े हैं।
>भारतीय मौसम विभाग ने आज मंगलवार के लिए राज्य के अधिकांश भागों में भारी से बहुत भारी बारिश के साथ वज्रपात का ऑरेंज अलर्ट जारी किया है। खासकर पश्चिमी और तराई क्षेत्र के जिलों में खतरा अधिक बताया जा रहा है। सहारनपुर, शामली, बिजनौर, मुजफ्फरनगर, मेरठ, मुरादाबाद, संभल, रामपुर, बरेली, बदायूं, कासगंज, फर्रुखाबाद, शाहजहांपुर, पीलीभीत, लखीमपुर खीरी, सीतापुर, हरदोई और बहराइच में लगभग सभी स्थानों पर बहुत भारी बारिश और बिजली गिरने की संभावना जताई गई है।
>बागपत, नोएडा, गाजियाबाद, हापुड़, बुलंदशहर, अलीगढ़, मथुरा, हाथरस, एटा, मैनपुरी, कानपुर, आगरा, गोंडा, बलरामपुर, गोरखपुर, श्रावस्ती, बस्ती और सिद्धार्थनगर सहित दर्जनों जिलों में यलो अलर्ट जारी किया गया है। इन जिलों में भी भारी बारिश और वज्रपात की घटनाएं हो सकती हैं।
>झांसी, हमीरपुर, प्रयागराज, मिर्जापुर, वाराणसी, चंदौली, सोनभद्र जैसे जिलों में भी बारिश की गतिविधियाँ जारी रहेंगी। कुछ इलाकों में हल्की बारिश तो कहीं तेज़ बौछारें पड़ने की संभावना है। 6 अगस्त से बारिश की गति में थोड़ी कमी ज़रूर आएगी, लेकिन राहत स्थायी नहीं होगी। 9 अगस्त से मॉनसून दोबारा तेज़ी से सक्रिय होगा और कई जिलों में फिर से भारी बारिश का सिलसिला शुरू हो जाएगा।
>बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में राहत कार्य ज़रूर जारी हैं, लेकिन स्थानीय प्रशासन की सीमित तैयारी के चलते स्थिति और गंभीर हो सकती है। सड़कों पर पानी भरने से यातायात बाधित है, खेतों में खड़ी फसलें नष्ट हो रही हैं और ग्रामीण क्षेत्रों में पशुधन की भी हानि हो रही है।