उत्तर प्रदेश विधानमंडल के चार दिवसीय मानसून सत्र की शुरुआत सोमवार को राम मंदिर में चढ़ावे से जुड़े कथित मामले को लेकर तीखी राजनीतिक नोकझोंक के साथ हुई। विधानसभा और विधानपरिषद दोनों सदनों में सत्ता पक्ष और समाजवादी पार्टी के सदस्यों के बीच आरोप-प्रत्यारोप, नारेबाजी और विरोध के कारण कार्यवाही कई बार बाधित हुई।
विपक्ष ने राम मंदिर चढ़ावा मामले की निष्पक्ष जांच की मांग उठाई, जबकि सत्ता पक्ष ने विपक्ष पर राजनीतिक आरोप लगाते हुए पलटवार किया। विधानपरिषद में समाजवादी पार्टी के सदस्यों ने राम मंदिर में चढ़ावे से जुड़े कथित मामले को उठाते हुए सरकार से निष्पक्ष और पारदर्शी जांच कराने की मांग की। नेता सदन एवं उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य ने जवाब देते हुए कहा कि जो लोग पहले राम मंदिर निर्माण का विरोध करते थे, वे आज मंदिर की चिंता जता रहे हैं। उन्होंने विपक्ष पर निशाना साधते हुए कहा,
"सूप बोले तो बोले, छलनी भी बोले जिसमें बहत्तर छेद।"
इसके साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि राम मंदिर निर्माण का विरोध करने वाले अब मंदिर के मुद्दे पर राजनीति कर रहे हैं। केशव प्रसाद मौर्य के वक्तव्य के दौरान समाजवादी पार्टी के सदस्य अपनी सीटों से उठकर सदन के वेल में पहुंच गए और "चंदा चोर, गद्दी छोड़" के नारे लगाए। इसके जवाब में सत्ता पक्ष के सदस्यों ने "जय श्रीराम" के नारे लगाए। दोनों पक्षों के बीच लंबे समय तक नारेबाजी चलती रही। सभापति लगातार सदन में व्यवस्था बनाए रखने और सदस्यों से शांत रहने की अपील करते रहे, लेकिन कुछ समय तक कार्यवाही प्रभावित रही।
यह खबर भी पढ़े - नोएडा में पैसों के विवाद के बाद पत्नी की मौत, पति पर गैर इरादतन हत्या का मुकदमा दर्ज
हंगामे के बीच उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य ने कहा कि अयोध्या में भव्य राम मंदिर बनने से विपक्ष असहज है और भविष्य में मथुरा तथा काशी में भी मंदिर निर्माण होगा। इस पर समाजवादी पार्टी के सदस्यों ने सरकार के खिलाफ जवाबी नारे लगाए और आरोप लगाया कि राम मंदिर चढ़ावा मामले में निष्पक्ष कार्रवाई नहीं की जा रही।
समाजवादी पार्टी के सदस्य आशुतोष सिन्हा ने सदन में कहा कि राम मंदिर करोड़ों लोगों की आस्था का केंद्र है और चढ़ावे में कथित गड़बड़ी गंभीर विषय है। उन्होंने आरोप लगाया कि प्राथमिकी में मुख्य आरोपियों के नाम शामिल नहीं किए गए हैं तथा मामले की जांच निष्पक्ष तरीके से नहीं हो रही। उन्होंने यह भी कहा कि सीसीटीवी फुटेज हटाए जाने जैसी शिकायतें सामने आई हैं और पूरे मामले की पारदर्शी जांच कराई जानी चाहिए।
विधानपरिषद में नेता प्रतिपक्ष लाल बिहारी यादव ने भी राम मंदिर ट्रस्ट की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए कथित अनियमितताओं की जांच कराने की मांग की। साथ ही उन्होंने विवेकाधीन कोष से आर्थिक सहायता वितरण में भेदभाव का आरोप भी लगाया।
इन आरोपों पर जवाब देते हुए केशव प्रसाद मौर्य ने कहा कि राज्य सरकार नियमों के अनुसार बिना किसी भेदभाव के सहायता उपलब्ध कराती है। उन्होंने कहा कि यदि किसी विशेष मामले की जानकारी दी जाती है तो उसकी जांच कराई जाएगी।
सत्र शुरू होने से पहले मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने मीडिया से बातचीत में कहा कि मानसून सत्र प्रदेश के गरीबों, किसानों, युवाओं और महिलाओं से जुड़े विषयों पर चर्चा के लिए महत्वपूर्ण है।
उन्होंने कहा कि राज्य सरकार ने किसानों के हित में कई निर्णय लिए हैं और गन्ना किसानों को रिकॉर्ड भुगतान किया गया है। मुख्यमंत्री ने विपक्ष पर किसानों और राम मंदिर के मुद्दे पर दोहरा रवैया अपनाने का आरोप भी लगाया।
मानसून सत्र की शुरुआत विधानसभा के सबसे वरिष्ठ समाजवादी पार्टी विधायक आलमबदी सहित दिवंगत पूर्व विधायकों को श्रद्धांजलि देने से हुई। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ, नेता प्रतिपक्ष माता प्रसाद पांडेय और विभिन्न दलों के नेताओं ने दिवंगत सदस्यों को श्रद्धांजलि अर्पित की। इसके बाद दो मिनट का मौन रखा गया और सदन की कार्यवाही कुछ समय के लिए स्थगित कर दी गई। चार दिवसीय मानसून सत्र छह अगस्त तक चलेगा।
मंगलवार को प्रश्नकाल के बाद वित्त मंत्री सुरेश खन्ना वित्तीय वर्ष 2026-27 का अनुपूरक बजट सदन में प्रस्तुत करेंगे। इसके अतिरिक्त कई अध्यादेश और विधेयक भी सदन के समक्ष रखे जाने की संभावना है। साथ ही संभल दंगों की जांच के लिए गठित न्यायिक आयोग की रिपोर्ट भी सदन में प्रस्तुत की जा सकती है।