>उत्तर प्रदेश के ग्रामीण नागरिकों के लिए एक बड़ी और राहत भरी खबर सामने आई है। अब उन्हें आधार कार्ड बनवाने या उसमें संशोधन करवाने के लिए शहरों की दौड़ नहीं लगानी पड़ेगी। राज्य सरकार ने पंचायती राज विभाग के माध्यम से गांव-गांव में आधार सेवा पहुंचाने की पहल की है। भारतीय विशिष्ट पहचान प्राधिकरण (UIDAI) ने इस सेवा को पंचायत सचिवालयों में शुरू करने की अनुमति दे दी है।
>पहले चरण में यह सेवा 2,500 ग्राम पंचायतों में शुरू की जाएगी और धीरे-धीरे राज्य की सभी 57,691 ग्राम पंचायतों तक इसका विस्तार किया जाएगा। इसके लिए पंचायत सहायकों को 11 अगस्त से प्रशिक्षण देना शुरू किया जाएगा, जिससे वे आधार नामांकन और सुधार सेवाएं संचालित कर सकें। पंचायत सचिवालयों में यह सुविधा शुरू होने से ग्रामीणों को जन सेवा केंद्र या शहर के आधार सेंटर के चक्कर नहीं काटने पड़ेंगे। वे गांव में ही निर्धारित शुल्क पर यह सेवा ले सकेंगे। इससे न सिर्फ समय और धन की बचत होगी बल्कि प्रशासनिक पारदर्शिता और डिजिटल पहुंच भी सुदृढ़ होगी।
>शुरुआत में यह सेवा बैंकों और कॉरपोरेट सामाजिक उत्तरदायित्व (CSR) की साझेदारी में संचालित की जाएगी। आगे चलकर इसके लिए बजटीय व्यवस्था भी सुनिश्चित की जाएगी। इसके साथ ही, आधार सेवाएं देने वाले पंचायत सहायकों को निर्धारित शुल्क में से प्रोत्साहन राशि (इंसेंटिव) भी दी जाएगी। पंचायतीराज निदेशक अमित कुमार सिंह ने बताया कि सरकार की मंशा है कि आधार जैसी मूलभूत सेवा गांव में ही उपलब्ध हो ताकि डिजिटल इंडिया का सपना जमीनी स्तर पर साकार किया जा सके। यह कदम ग्रामीण भारत को डिजिटल रूप से सशक्त बनाने की दिशा में एक क्रांतिकारी पहल है।