लखनऊ, 16 सितंबर 2026। उत्तर प्रदेश के पंचायती राज मंत्री ओमप्रकाश राजभर की अध्यक्षता में पंचायत सहायकों के प्रतिनिधिमंडल के साथ 15 सितंबर को बैठक हुई। बैठक में पंचायत सहायकों की लंबे समय से चली आ रही विभिन्न मांगों पर चर्चा की गई। मंत्री की ओर से बताया गया कि मानदेय का भुगतान सीधे बैंक खाते में डीबीटी के माध्यम से किए जाने, सेवा सुरक्षा, महिला पंचायत सहायकों को नियमानुसार मातृत्व अवकाश देने और आंदोलन के दौरान दर्ज मुकदमों को वापस लेने सहित कई मुद्दों पर निर्णय की घोषणा की गई है।
बैठक में पंचायत सहायकों की ओर से उठाई गई मांगों पर विचार करते हुए मानदेय बढ़ाने के प्रस्ताव को भी आगे बढ़ाने की बात कही गई। इसके तहत मौजूदा 6 हजार रुपये के मानदेय को बढ़ाकर 9 हजार रुपये करने का प्रस्ताव तैयार कर मुख्यमंत्री के समक्ष प्रस्तुत करने के निर्देश विभागीय अधिकारियों को दिए गए हैं। ताजा मीडिया रिपोर्टों में भी मंत्री राजभर के पंचायत सहायकों के मानदेय को 9 हजार रुपये करने और आंदोलन के दौरान दर्ज मुकदमों को वापस लेने संबंधी बयानों का उल्लेख किया गया है।
बैठक में पंचायत सहायकों के मानदेय भुगतान की प्रक्रिया में बदलाव की घोषणा की गई। इसके तहत मानदेय का भुगतान सीधे पंचायत सहायकों के बैंक खातों में डीबीटी यानी प्रत्यक्ष लाभ अंतरण के माध्यम से किए जाने की बात कही गई है। सरकार की ओर से बताई गई व्यवस्था का उद्देश्य भुगतान प्रक्रिया को सीधे लाभार्थी के बैंक खाते से जोड़ना है। इस व्यवस्था में पंचायत सहायक को मानदेय प्राप्त करने के लिए किसी मध्यस्थ पर निर्भर नहीं रहना होगा। मंत्री की ओर से कहा गया कि डीबीटी व्यवस्था लागू होने से बिचौलियों की भूमिका समाप्त होगी और भुगतान समय पर किए जाने में मदद मिलेगी।
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बैठक में पंचायत सहायकों की सेवा सुरक्षा से जुड़ा महत्वपूर्ण मुद्दा भी सामने आया। घोषणा के अनुसार पंचायत सहायकों को रखने और हटाने का अंतिम अधिकार संबंधित जिले के जिलाधिकारी के पास सुरक्षित रहेगा। इस व्यवस्था के तहत ग्राम प्रधान स्तर से पंचायत सहायक को मनमाने ढंग से हटाने की कार्रवाई पर रोक लगाने की बात कही गई है। इसका उद्देश्य पंचायत सहायकों की सेवा से जुड़े मामलों में एक निर्धारित प्रशासनिक प्रक्रिया सुनिश्चित करना है। हाल की मीडिया रिपोर्टों में भी पंचायत सहायकों को हटाने के मामले में जिलाधिकारी के नेतृत्व वाली व्यवस्था का उल्लेख किया गया है।
पंचायत सहायकों की प्रमुख मांगों में मानदेय बढ़ाना शामिल रहा है। बैठक में इस मांग पर 6 हजार रुपये से बढ़ाकर 9 हजार रुपये करने का प्रस्ताव मुख्यमंत्री के समक्ष रखने की दिशा में कार्रवाई की बात कही गई। मंत्री ने विभागीय अधिकारियों को मानदेय वृद्धि का प्रस्ताव तैयार कर मुख्यमंत्री के सामने प्रस्तुत करने के निर्देश दिए हैं। इस प्रकार बैठक में मानदेय को 9 हजार रुपये करने की दिशा में प्रस्ताव आगे बढ़ाने की बात कही गई है। मानदेय वृद्धि का अंतिम प्रशासनिक क्रियान्वयन संबंधित सरकारी आदेश और प्रक्रिया के अनुसार होगा।
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बैठक में महिला पंचायत सहायकों से जुड़ी मांग पर भी घोषणा की गई। महिला पंचायत सहायकों को सरकार द्वारा निर्धारित नियमों के अनुसार मातृत्व अवकाश का लाभ देने की बात कही गई है। इससे महिला पंचायत सहायकों को मातृत्व संबंधी अवकाश के लिए निर्धारित सरकारी नियमों के तहत सुविधा उपलब्ध कराने का रास्ता साफ होने की जानकारी दी गई है।
पंचायत सहायकों की मांगों को लेकर हुए धरना-प्रदर्शन के दौरान कुछ लोगों के खिलाफ दर्ज मुकदमों का मुद्दा भी बैठक में उठा। मंत्री ओमप्रकाश राजभर की ओर से बताया गया कि धरना-प्रदर्शन में शामिल हुए लोगों पर दर्ज मुकदमे वापस लेकर समाप्त किए जाएंगे। इस संबंध में कार्रवाई की घोषणा पंचायत सहायकों के प्रतिनिधिमंडल के साथ हुई बैठक के बाद की गई। मीडिया रिपोर्टों में भी आंदोलन के दौरान दर्ज मुकदमों को वापस लेने और कार्रवाई का सामना करने वाले पंचायत सहायकों के संबंध में मंत्री के बयान का उल्लेख किया गया है।
पंचायत सहायकों की ओर से लंबे समय से विभिन्न मांगें उठाई जा रही थीं। इनमें मानदेय बढ़ाने, भुगतान प्रक्रिया को सरल बनाने और सेवा से जुड़े मामलों में सुरक्षा देने जैसे मुद्दे शामिल थे। 15 सितंबर को हुई बैठक में पंचायत सहायकों के प्रतिनिधिमंडल ने अपनी मांगों को मंत्री के सामने रखा। मंत्री की ओर से बताया गया कि इन मांगों पर सहानुभूतिपूर्वक विचार किया गया और संबंधित मुद्दों पर आवश्यक घोषणाएं की गईं। पंचायत सहायकों से जुड़े मुद्दे ग्रामीण स्तर की प्रशासनिक व्यवस्था से संबंधित हैं। पंचायत स्तर पर काम करने वाले सहायकों की भूमिका से जुड़े मामलों में मानदेय और सेवा शर्तों का विषय लंबे समय से चर्चा में रहा है।
मानदेय वृद्धि के मामले में बैठक में 9 हजार रुपये प्रतिमाह करने का प्रस्ताव मुख्यमंत्री के समक्ष रखने की बात कही गई है। विभागीय अधिकारियों को प्रस्ताव तैयार करने के निर्देश दिए गए हैं। इसका अर्थ यह है कि बैठक में मानदेय वृद्धि के लिए प्रस्ताव को आगे बढ़ाने की प्रक्रिया बताई गई है। प्रस्ताव के आधार पर आगे की प्रशासनिक कार्रवाई और संबंधित आदेश जारी होने के बाद इसकी लागू होने की स्थिति स्पष्ट होगी। हालांकि, उपलब्ध ताजा रिपोर्टों में 16 सितंबर को राजभर की ओर से 9 हजार रुपये मासिक मानदेय दिए जाने की घोषणा का भी उल्लेख है।
पंचायत सहायकों के लिए सेवा सुरक्षा का मुद्दा बैठक के प्रमुख विषयों में रहा। मौजूदा घोषणा के अनुसार पंचायत सहायकों को रखने और हटाने से जुड़े अंतिम अधिकार को जिलाधिकारी स्तर से जोड़ा गया है। इस व्यवस्था के लागू होने पर पंचायत सहायकों के खिलाफ सेवा समाप्ति से संबंधित कार्रवाई में जिला प्रशासन की भूमिका महत्वपूर्ण होगी। ग्राम प्रधान स्तर पर सीधे हटाने की कार्रवाई पर रोक लगाने की बात कही गई है।