उत्तर प्रदेश में सार्वजनिक सेवा वाहनों की निगरानी और यात्रियों की सुरक्षा को मजबूत करने के लिए परिवहन विभाग ने बड़ा फैसला लिया है। प्रदेशभर में पांच लाख से अधिक सार्वजनिक वाहनों में व्हीकल लोकेशन ट्रैकिंग डिवाइस लगाना अनिवार्य कर दिया गया है। विभाग के अनुसार, 1 जनवरी 2029 से पहले पंजीकृत वाहनों में यह डिवाइस लगवाना होगा, जबकि इसके बाद पंजीकृत वाहनों में डिवाइस का एक्टिवेशन कराना अनिवार्य रहेगा।
परिवहन विभाग ने स्पष्ट किया है कि नियम का पालन नहीं करने वाले वाहनों को न तो परमिट जारी किया जाएगा और न ही फिटनेस प्रमाणपत्र मिलेगा। यह व्यवस्था निजी बसों, टैक्सियों और नेशनल परमिट वाले ट्रकों पर लागू होगी। विभाग के मुताबिक, वीएलटीडी के जरिए वाहनों की लोकेशन रियल टाइम में ट्रैक की जा सकेगी। इससे यात्रियों और उनके सामान की निगरानी आसान होगी। साथ ही किसी दुर्घटना, शिकायत या कार्रवाई की स्थिति में भी वाहन की सटीक जानकारी तुरंत उपलब्ध हो सकेगी।
परिवहन निगम में पहले से इस तकनीक का उपयोग किया जा रहा है और वहां यह प्रयोग सफल माना गया है। निगम की अधिकांश बसों की निगरानी इसी प्रणाली के माध्यम से की जा रही है। परिवहन मुख्यालय में इसके लिए कंट्रोल रूम भी बनाया गया है। विभाग जल्द ही एक मोबाइल एप जारी करने की तैयारी में है, जिससे आम जनता, वाहन स्वामी और ट्रांसपोर्टरों को सुविधा मिलेगी। परिवहन मुख्यालय के आरटीओ कमल जोशी ने बताया कि निजी बसों, टैक्सी और नेशनल परमिट वाले ट्रकों में वीएलटीडी डिवाइस लगाने के निर्देश दिए गए हैं। उन्होंने कहा कि प्रदेश में ऐसे वाहनों की संख्या पांच लाख से अधिक है। नए वाहनों में यह डिवाइस पहले से लगी होती है, जिन्हें केवल एक्टिवेट कराया जाएगा, जबकि पुराने वाहनों में फिटमेंट कराना अनिवार्य होगा।
विभाग की ओर से उन अधिकृत कंपनियों की सूची भी जारी की गई है, जिनके डिवाइस वाहनों में लगाए जाएंगे। वीएलटीडी डिवाइस की कीमत लगभग साढ़े तीन हजार रुपये से लेकर 10 हजार रुपये तक बताई गई है। इसका खर्च वाहन स्वामी को स्वयं वहन करना होगा। परिवहन राज्यमंत्री दयाशंकर सिंह ने बताया कि सार्वजनिक सेवा वाहनों में वीएलटीडी फिटमेंट और एक्टिवेशन को लेकर शासन ने महत्वपूर्ण निर्णय लिया है। उन्होंने कहा कि नए विनिर्माताओं और मॉडलों को मंजूरी दी गई है, जबकि पहले से स्वीकृत कंपनियों के मॉडलों में विस्तार और संशोधन को भी अनुमोदन प्रदान किया गया है।
उन्होंने वाहन स्वामियों से अपने वाहन निर्माता के अनुसार अधिकृत कंपनियों से संपर्क कर डिवाइस का फिटमेंट और एक्टिवेशन कराने की अपील की। साथ ही प्रदेश के सभी आरटीओ और एआरटीओ अधिकारियों को निर्देशों का सख्ती से पालन कराने के आदेश दिए गए हैं।