उत्तर प्रदेश में होने वाले राज्यसभा चुनाव को लेकर समाजवादी पार्टी ने अपनी स्थिति स्पष्ट कर दी है। पार्टी की ओर से अब तीसरा प्रत्याशी मैदान में नहीं उतारा जाएगा। सपा प्रमुख अखिलेश यादव ने मंगलवार सुबह सोशल मीडिया मंच एक्स पर एक पोस्ट के जरिए पार्टी के रुख की जानकारी दी।
अखिलेश यादव के इस ऐलान के बाद उत्तर प्रदेश में राज्यसभा चुनाव की तस्वीर और स्पष्ट हो गई है। सपा पहले ही दो उम्मीदवारों के नाम घोषित कर चुकी है, जबकि भाजपा की ओर से आठ उम्मीदवार मैदान में हैं।
सपा प्रमुख अखिलेश यादव ने मंगलवार सुबह एक्स पर पोस्ट करते हुए लिखा, “अब हमारी निगाह तीन पर नहीं, चार सौ तीन पर है।” उनके इस पोस्ट के साथ पार्टी की ओर से तीसरा उम्मीदवार नहीं उतारने की स्थिति स्पष्ट हो गई। अखिलेश यादव के बयान में 403 का उल्लेख उत्तर प्रदेश विधानसभा की कुल 403 सीटों के संदर्भ में किया गया है। उपलब्ध जानकारी में उन्होंने इससे आगे कोई विस्तृत बयान नहीं दिया है।
अब हमारी निगाह तीन पर नहीं, चार सौ तीन पर है।
— Akhilesh Yadav (@yadavakhilesh) October 6, 2026
समाजवादी पार्टी ने इससे पहले उत्तर प्रदेश राज्यसभा चुनाव के लिए दो उम्मीदवारों के नाम घोषित किए थे। पार्टी की ओर से घोषित उम्मीदवारों में धनराज लखवानी और डॉ. रामगोपाल यादव शामिल हैं। अब सपा की ओर से तीसरा प्रत्याशी नहीं उतारे जाने के फैसले के बाद यही दोनों उम्मीदवार पार्टी की ओर से राज्यसभा चुनाव के मैदान में रहेंगे।
उत्तर प्रदेश के राज्यसभा चुनाव के लिए भाजपा की ओर से आठ उम्मीदवारों के नाम पहले ही घोषित किए जा चुके हैं। इस तरह उपलब्ध जानकारी के अनुसार भाजपा के आठ और समाजवादी पार्टी के दो उम्मीदवार मैदान में हैं। सपा के तीसरे प्रत्याशी को मैदान में नहीं उतारने के फैसले के बाद घोषित उम्मीदवारों की संख्या 10 हो गई है।
सपा के तीसरे उम्मीदवार को मैदान में नहीं उतारने के बाद भाजपा के आठ और सपा के दो उम्मीदवारों के निर्विरोध चुने जाने की स्थिति बन गई है। हालांकि, निर्वाचन की औपचारिक प्रक्रिया नामांकन, जांच और नाम वापसी की निर्धारित अवधि पूरी होने के बाद स्पष्ट होगी। उपलब्ध जानकारी के अनुसार 9 अक्टूबर को नाम वापसी की अवधि समाप्त होने के बाद निर्विरोध निर्वाचन की स्थिति की औपचारिक घोषणा की जाएगी। इसलिए वर्तमान स्थिति को उम्मीदवारों के निर्विरोध चुने जाने की प्रक्रिया के रूप में देखा जा रहा है, जबकि औपचारिक परिणाम संबंधित चुनाव प्रक्रिया पूरी होने के बाद सामने आएगा।
समाजवादी पार्टी की ओर से तीसरा प्रत्याशी नहीं उतारने के फैसले का विस्तृत कारण उपलब्ध जानकारी में नहीं बताया गया है। अखिलेश यादव ने अपने सोशल मीडिया पोस्ट में केवल लिखा कि अब उनकी निगाह तीन पर नहीं, बल्कि 403 पर है। इस बयान से पार्टी का मौजूदा राजनीतिक फोकस उत्तर प्रदेश विधानसभा की 403 सीटों की ओर होने की बात सामने आती है। हालांकि, अखिलेश यादव ने पोस्ट में तीसरे प्रत्याशी को नहीं उतारने के फैसले की विस्तृत वजह नहीं बताई। इसलिए इस फैसले के पीछे किसी अन्य राजनीतिक कारण का अनुमान लगाना उपलब्ध तथ्यों के आधार पर उचित नहीं होगा।
अखिलेश यादव के फैसले पर सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी के प्रमुख ओपी राजभर ने प्रतिक्रिया दी। उन्होंने सोशल मीडिया पोस्ट के जरिए अखिलेश यादव पर तंज कसा। ओपी राजभर ने लिखा, “मित्र अखिलेश जी, बस हो गया टांय टांय फिस्स!” उन्होंने आगे लिखा, “मित्र अखिलेश जी, बस हो गया टांय टांय फिस्स! वैसे कभी कभी ही सही, आप कुछ समझदारी का काम भी कर ही लेते हैं। जैसे आज किया। रही बात 403 की तो बस यही कहूंगा कि सपने देखना बुरी बात नहीं है।” ओपी राजभर की यह प्रतिक्रिया अखिलेश यादव के तीसरा उम्मीदवार नहीं उतारने के फैसले के बाद सामने आई।
मित्र अखिलेश जी, बस हो गया टांय टांय फिस्स! वैसे कभी कभी ही सही, आप कुछ समझदारी का काम भी कर ही लेते हैं। जैसे आज किया। रही बात 403 की तो बस यही कहूंगा कि सपने देखना बुरी बात नहीं है। @yadavakhilesh
— Om Prakash Rajbhar (@oprajbhar) October 6, 2026
उत्तर प्रदेश में राज्यसभा चुनाव को लेकर सपा और भाजपा की ओर से उम्मीदवारों के नाम घोषित किए जा चुके हैं। भाजपा ने आठ उम्मीदवार घोषित किए हैं। वहीं सपा ने दो उम्मीदवारों—धनराज लखवानी और डॉ. रामगोपाल यादव—के नाम घोषित किए हैं। अब सपा की ओर से तीसरा उम्मीदवार नहीं उतारने की घोषणा के बाद कुल घोषित उम्मीदवारों की संख्या 10 हो गई है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार नाम वापसी की अवधि 9 अक्टूबर तक है। इसके बाद ही चुनावी प्रक्रिया के तहत सभी उम्मीदवारों के निर्विरोध चुने जाने की औपचारिक स्थिति स्पष्ट होगी।
अखिलेश यादव ने अपने सोशल मीडिया पोस्ट में कहा कि अब उनकी निगाह तीन पर नहीं, चार सौ तीन पर है। उत्तर प्रदेश विधानसभा में कुल 403 सीटें हैं। ऐसे में उनके बयान में 403 का उल्लेख विधानसभा की सीटों की ओर संकेत करता है। हालांकि, उपलब्ध पोस्ट में अखिलेश यादव ने इस संबंध में कोई विस्तृत रणनीति या भविष्य की योजना साझा नहीं की है। इसलिए उनके बयान से आगे किसी विशेष चुनावी रणनीति या लक्ष्य का अनुमान इस खबर में नहीं जोड़ा जा रहा है।
राज्यसभा चुनाव की प्रक्रिया में नामांकन और नाम वापसी के चरण महत्वपूर्ण होते हैं। उपलब्ध जानकारी के अनुसार 9 अक्टूबर को नाम वापसी की अवधि समाप्त होगी। यदि निर्धारित अवधि तक कोई अतिरिक्त उम्मीदवार मैदान में नहीं रहता है और सभी उम्मीदवार निर्विरोध निर्वाचन की शर्तों में आते हैं, तो निर्वाचन प्रक्रिया के तहत इसकी औपचारिक घोषणा की जाएगी। फिलहाल सपा की ओर से तीसरा प्रत्याशी नहीं उतारने का फैसला स्पष्ट हो चुका है।
समाजवादी पार्टी ने राज्यसभा चुनाव के लिए धनराज लखवानी को अपना उम्मीदवार घोषित किया है। वह पार्टी की ओर से घोषित दो उम्मीदवारों में शामिल हैं। डॉ. रामगोपाल यादव भी समाजवादी पार्टी के राज्यसभा उम्मीदवार हैं। पार्टी ने उन्हें एक बार फिर राज्यसभा चुनाव के लिए मैदान में उतारा है। सपा की ओर से तीसरा उम्मीदवार नहीं उतारने के फैसले के बाद यही दोनों नाम पार्टी की उम्मीदवार सूची में रहेंगे।
उत्तर प्रदेश से भाजपा ने राज्यसभा चुनाव के लिए आठ उम्मीदवारों के नाम घोषित किए हैं। पार्टी की ओर से जारी सूची में धर्मपाल सिंह, राधाकांत ओझा, प्रकाश पाल, विद्यासागर सोनकर, गोपी कृष्ण पाण्डेय, प्रियंका सिंह रावत, राम प्रताप सिंह चौहान और श्रुति गंगवार के नाम शामिल हैं। इससे पहले भाजपा की सूची सामने आने के बाद उत्तर प्रदेश की राजनीति में राज्यसभा चुनाव को लेकर चर्चा तेज हुई थी। अब सपा की ओर से तीसरा प्रत्याशी नहीं उतारने के फैसले के बाद चुनावी प्रक्रिया का अगला चरण नाम वापसी की अवधि पूरी होने से जुड़ा है।