यूपी में राज्यसभा के 8 नामों से भाजपा ने साधे कई सामाजिक समीकरण

05 Oct 2026

उत्तर प्रदेश में राज्यसभा चुनाव को लेकर भारतीय जनता पार्टी ने अपने आठ उम्मीदवारों के नाम घोषित कर दिए हैं। उम्मीदवारों की सूची सामने आने के बाद इसमें शामिल नेताओं की राजनीतिक और संगठनात्मक पृष्ठभूमि पर चर्चा शुरू हो गई है। सूची में सरकार और संगठन में जिम्मेदारी संभाल चुके नेताओं के साथ अलग-अलग सामाजिक समूहों से जुड़े चेहरे भी शामिल हैं। भाजपा ने धर्मपाल सिंह लोधी, राधाकांत ओझा, प्रकाश पाल, विद्यासागर सोनकर, गोपी कृष्ण पांडेय, प्रियंका सिंह रावत, राम प्रताप सिंह चौहान और श्रुति गंगवार को उम्मीदवार बनाया है। उम्मीदवारों के चयन में सामाजिक प्रतिनिधित्व के साथ पार्टी संगठन में सक्रिय नेताओं को भी जगह दी गई है।

भाजपा की ओर से घोषित उम्मीदवारों की सूची में आठ नाम शामिल हैं। इनमें सरकार में मंत्री और विधायक रह चुके नेता, पूर्व सांसद, पूर्व विधायक, पार्टी संगठन के पदाधिकारी और महिला चेहरे शामिल हैं। उम्मीदवारों की सूची इस प्रकार है:

  1. धर्मपाल सिंह लोधी
  2. राधाकांत ओझा
  3. प्रकाश पाल
  4. विद्यासागर सोनकर
  5. गोपी कृष्ण पांडेय
  6. प्रियंका सिंह रावत
  7. राम प्रताप सिंह चौहान
  8. श्रुति गंगवार

 

उपलब्ध राजनीतिक पृष्ठभूमि के अनुसार भाजपा की सूची में ओबीसी, दलित, ब्राह्मण, ठाकुर और महिला प्रतिनिधित्व से जुड़े चेहरे शामिल हैं। धर्मपाल सिंह और प्रकाश पाल को ओबीसी राजनीति से जुड़े प्रमुख चेहरों के तौर पर देखा जाता है। विद्यासागर सोनकर और प्रियंका सिंह रावत दलित समुदाय से जुड़े राजनीतिक चेहरों के रूप में सूची में हैं। वहीं राधाकांत ओझा और गोपी कृष्ण पांडेय ब्राह्मण समाज से जुड़े नेताओं के तौर पर सूची में शामिल हैं। राम प्रताप सिंह चौहान ठाकुर समाज से आते हैं। श्रुति गंगवार को महिला प्रतिनिधित्व के साथ बरेली और रुहेलखंड क्षेत्र से जुड़े राजनीतिक-सामाजिक संदर्भ में देखा जा रहा है। हालांकि, पार्टी की ओर से जारी उम्मीदवार सूची में इन नामों को किसी जातीय या सामाजिक रणनीति के साथ जोड़कर कोई आधिकारिक टिप्पणी नहीं दी गई है। सामाजिक समीकरण से संबंधित यह आकलन उम्मीदवारों की उपलब्ध राजनीतिक पृष्ठभूमि पर आधारित है।

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भाजपा की सूची में धर्मपाल सिंह और प्रकाश पाल के नाम महत्वपूर्ण हैं। दोनों का संबंध पिछड़ा वर्ग राजनीति से जुड़ा रहा है। प्रकाश पाल वर्तमान में उत्तर प्रदेश भाजपा के ओबीसी मोर्चा के प्रदेश अध्यक्ष हैं। वह संगठन में विभिन्न जिम्मेदारियां संभाल चुके हैं और कानपुर-बुंदेलखंड क्षेत्र के क्षेत्रीय अध्यक्ष भी रहे हैं। धर्मपाल सिंह उत्तर प्रदेश सरकार में पशुधन मंत्री हैं और बरेली की आंवला विधानसभा सीट से विधायक हैं। वह योगी सरकार में मंत्री के तौर पर जिम्मेदारी संभाल चुके हैं। इन दोनों नेताओं को राज्यसभा के लिए उम्मीदवार बनाए जाने से भाजपा की सूची में पिछड़ा वर्ग प्रतिनिधित्व का एक प्रमुख पक्ष सामने आता है।

उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव 2027 में होने हैं। ऐसे में राज्यसभा के लिए उम्मीदवारों के चयन को राज्य की मौजूदा राजनीतिक परिस्थितियों के संदर्भ में भी देखा जा रहा है। राज्य में समाजवादी पार्टी की राजनीति में पिछड़ा, दलित और अल्पसंख्यक समूहों के प्रतिनिधित्व का मुद्दा प्रमुख रहा है। भाजपा भी लंबे समय से विभिन्न सामाजिक समूहों के बीच अपना राजनीतिक आधार मजबूत करने की रणनीति पर काम करती रही है। हालांकि, राज्यसभा उम्मीदवारों की मौजूदा सूची के आधार पर 2027 के विधानसभा चुनाव को लेकर भाजपा की अंतिम रणनीति तय मानना उचित नहीं होगा। उम्मीदवारों का चयन राज्यसभा चुनाव के लिए किया गया है और पार्टी की ओर से इस सूची को 2027 के चुनाव के लिए कोई आधिकारिक संदेश बताया नहीं गया है।

भाजपा की आठ नामों वाली सूची में विद्यासागर सोनकर और प्रियंका सिंह रावत भी शामिल हैं। विद्यासागर सोनकर भाजपा के लंबे समय से सक्रिय नेताओं में हैं। वह लोकसभा सांसद और उत्तर प्रदेश विधान परिषद के सदस्य रह चुके हैं। संगठन में भी उन्होंने प्रदेश महामंत्री समेत विभिन्न जिम्मेदारियां संभाली हैं। प्रियंका सिंह रावत बाराबंकी से पूर्व लोकसभा सांसद हैं। वह 16वीं लोकसभा की सदस्य रही हैं और भाजपा के संगठन में सक्रिय भूमिका निभाती रही हैं। दोनों नामों के शामिल होने से भाजपा की राज्यसभा सूची में दलित प्रतिनिधित्व का पक्ष भी सामने आता है।

भाजपा की सूची में राधाकांत ओझा और गोपी कृष्ण पांडेय के नाम भी शामिल हैं। दोनों का राजनीतिक और संगठनात्मक जुड़ाव अलग-अलग स्तरों पर रहा है। राधाकांत ओझा वरिष्ठ अधिवक्ता हैं और इलाहाबाद हाई कोर्ट बार एसोसिएशन के पूर्व अध्यक्ष रह चुके हैं। उन्हें दो बार बार एसोसिएशन का अध्यक्ष चुना गया था। गोपी कृष्ण पांडेय लंबे समय से भाजपा संगठन से जुड़े रहे हैं और पार्टी के संगठनात्मक कार्यों में सक्रिय रहे हैं। वहीं राम प्रताप सिंह चौहान भाजपा उत्तर प्रदेश के प्रदेश महामंत्री हैं। वह आगरा की एत्मादपुर विधानसभा सीट से वर्ष 2017 से 2022 तक विधायक रह चुके हैं। पार्टी संगठन में भी उन्होंने महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां संभाली हैं।

भाजपा की सूची में श्रुति गंगवार का नाम भी शामिल है। वह बरेली क्षेत्र से जुड़ी हैं और अर्बन को-ऑपरेटिव बैंक की चेयरपर्सन रह चुकी हैं। वह वरिष्ठ भाजपा नेता और झारखंड के राज्यपाल संतोष गंगवार की बेटी हैं। श्रुति गंगवार के नाम से सूची में महिला प्रतिनिधित्व के साथ बरेली और रुहेलखंड क्षेत्र का संदर्भ भी जुड़ता है। भाजपा की आठ उम्मीदवारों वाली सूची में उनका नाम महिला प्रतिनिधित्व वाले प्रमुख चेहरों में शामिल है।

उम्मीदवारों की सूची में कई ऐसे नाम हैं जिनकी पहचान भाजपा संगठन में सक्रिय नेताओं के रूप में रही है। प्रकाश पाल ओबीसी मोर्चा के प्रदेश अध्यक्ष हैं। राम प्रताप सिंह चौहान प्रदेश महामंत्री के पद पर जिम्मेदारी संभाल रहे हैं। गोपी कृष्ण पांडेय भी लंबे समय से संगठन से जुड़े रहे हैं। विद्यासागर सोनकर और प्रियंका सिंह रावत का संसदीय अनुभव है। धर्मपाल सिंह सरकार में मंत्री और विधायक हैं। इस तरह सूची में पार्टी संगठन, सरकार, संसद और सामाजिक क्षेत्र से जुड़े अनुभव वाले नेताओं का मिश्रण दिखाई देता है।

उत्तर प्रदेश से राज्यसभा की कुल 10 सीटों के लिए चुनाव होना है। भाजपा ने इनमें से आठ सीटों के लिए अपने उम्मीदवार घोषित किए हैं। उपलब्ध जानकारी के अनुसार चुनावी गणित में सात सीटों पर भाजपा की स्थिति मजबूत बताई गई है, जबकि आठवीं सीट के लिए अतिरिक्त समर्थन की आवश्यकता बताई जा रही है। हालांकि, किसी उम्मीदवार के निर्वाचित होने या सीटों के अंतिम परिणाम के बारे में इस स्तर पर कोई निष्कर्ष नहीं निकाला जा सकता। चुनाव का परिणाम संबंधित प्रक्रिया, उम्मीदवारों और मतदान के आधार पर तय होगा।

भाजपा द्वारा आठ उम्मीदवार घोषित किए जाने के बाद राज्यसभा चुनाव में आठवीं सीट महत्वपूर्ण हो गई है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार पार्टी सात सीटें जीतने की स्थिति में है, जबकि आठवीं सीट के लिए उसे अतिरिक्त समर्थन की आवश्यकता होगी। राज्यसभा चुनाव में विधायक मतदान करते हैं और सीटों के लिए आवश्यक मतों की संख्या चुनावी गणित के अनुसार निर्धारित होती है। इसलिए आठवीं सीट का परिणाम केवल उम्मीदवारों की घोषणा से तय नहीं होता। इसके लिए विधानसभा में दलों की संख्या, उम्मीदवारों को मिलने वाला समर्थन और मतदान प्रक्रिया महत्वपूर्ण होगी। उपलब्ध सामग्री में अन्य दलों की ओर से घोषित उम्मीदवारों या समर्थन को लेकर विस्तृत जानकारी नहीं दी गई है। इसलिए इस रिपोर्ट में आठवीं सीट के अंतिम परिणाम को लेकर कोई दावा नहीं किया जा रहा है।