लखनऊ। उत्तर प्रदेश में मकान, दुकान या अन्य परिसर किराये पर लेने-देने वालों के लिए रेंट एग्रीमेंट के पंजीकरण की शुल्क व्यवस्था में बदलाव किया गया है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की अध्यक्षता में मंगलवार को हुई मंत्रिपरिषद की बैठक में 10 वर्ष तक की किरायेदारी के पंजीकरण के लिए स्टांप शुल्क और पंजीकरण शुल्क की नई व्यवस्था को मंजूरी दी गई। उपलब्ध विवरण के अनुसार, नई व्यवस्था में किराये की अवधि और औसत वार्षिक किराये के आधार पर शुल्क की अधिकतम सीमा तय की गई है।
नई व्यवस्था के तहत एक वर्ष तक के ऐसे रेंट एग्रीमेंट में, जिसमें औसत वार्षिक किराया दो लाख रुपये तक है, स्टांप शुल्क 1,000 रुपये और पंजीकरण शुल्क 1,000 रुपये होगा। यानी कुल खर्च 2,000 रुपये रहेगा। इसी तरह अधिक अवधि और अधिक औसत वार्षिक किराये की श्रेणियों के लिए भी निर्धारित शुल्क लागू होगा।
नई व्यवस्था में 10 लाख रुपये तक के औसत वार्षिक किराये वाले रेंट एग्रीमेंट को शुल्क राहत के दायरे में रखा गया है। 10 वर्ष तक की अवधि के लिए किरायानामा पंजीकरण की अधिकतम शुल्क सीमा किराये की श्रेणी और अनुबंध की अवधि के अनुसार निर्धारित की गई है। उपलब्ध दरों के अनुसार, दो लाख रुपये तक के औसत वार्षिक किराये पर एक वर्ष तक के एग्रीमेंट के लिए स्टांप शुल्क 1,000 रुपये और इतनी ही राशि पंजीकरण शुल्क के रूप में देनी होगी। इस तरह कुल 2,000 रुपये खर्च होंगे।
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दो लाख से अधिक और छह लाख रुपये तक के औसत वार्षिक किराये वाले मामलों में एक वर्ष तक के एग्रीमेंट पर दोनों शुल्क 3,000-3,000 रुपये होंगे। छह लाख से 10 लाख रुपये तक के औसत वार्षिक किराये पर एक वर्ष तक के एग्रीमेंट में दोनों शुल्क 4,500-4,500 रुपये निर्धारित किए गए हैं। किरायेदारी की अवधि बढ़ने के साथ निर्धारित शुल्क भी बढ़ेगा। दो लाख रुपये तक के औसत वार्षिक किराये वाले एग्रीमेंट में एक से पांच वर्ष की अवधि के लिए कुल 4,000 रुपये और पांच से 10 वर्ष तक की अवधि के लिए कुल 8,000 रुपये का खर्च निर्धारित किया गया है।
दो लाख से छह लाख रुपये तक के औसत वार्षिक किराये की श्रेणी में एक से पांच वर्ष तक के लिए कुल 12,000 रुपये और पांच से 10 वर्ष तक के लिए कुल 16,000 रुपये खर्च होंगे। इसी तरह छह लाख से 10 लाख रुपये तक के औसत वार्षिक किराये वाले एग्रीमेंट में एक से पांच वर्ष की अवधि के लिए कुल 20,000 रुपये और पांच से 10 वर्ष की अवधि के लिए कुल 26,000 रुपये शुल्क निर्धारित किया गया है।
नई शुल्क व्यवस्था को ऐसे समझें
| रेंट एग्रीमेंट की अवधि | औसत वार्षिक किराया | कुल शुल्क |
|---|---|---|
| एक वर्ष तक | 2 लाख रुपये तक | 2,000 रुपये |
| एक वर्ष तक | 2 से 6 लाख रुपये | 6,000 रुपये |
| एक वर्ष तक | 6 से 10 लाख रुपये | 9,000 रुपये |
| एक से 5 वर्ष | 2 लाख रुपये तक | 4,000 रुपये |
| एक से 5 वर्ष | 2 से 6 लाख रुपये | 12,000 रुपये |
| एक से 5 वर्ष | 6 से 10 लाख रुपये | 20,000 रुपये |
| 5 से 10 वर्ष | 2 लाख रुपये तक | 8,000 रुपये |
| 5 से 10 वर्ष | 2 से 6 लाख रुपये | 16,000 रुपये |
| 5 से 10 वर्ष | 6 से 10 लाख रुपये | 26,000 रुपये |
सरकार की नई व्यवस्था में 10 लाख रुपये से अधिक के औसत वार्षिक किराये वाले मामलों को पूरी तरह शुल्क राहत से बाहर नहीं किया गया है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, 10 लाख रुपये तक की सीमा पर निर्धारित रियायती व्यवस्था लागू होगी, जबकि इसके ऊपर की राशि पर मौजूदा व्यवस्था के अनुसार स्टांप शुल्क और पंजीकरण शुल्क लगाया जाएगा।
इसका मतलब यह है कि अधिक किराये वाले एग्रीमेंट में 10 लाख रुपये तक की सीमा के लिए निर्धारित रियायत उपलब्ध रहेगी, जबकि अतिरिक्त राशि पर सामान्य शुल्क व्यवस्था लागू होगी। नई रियायती व्यवस्था सभी प्रकार के पट्टों पर लागू नहीं होगी। टोल से संबंधित पट्टों और खनन पट्टों को इस छूट के दायरे से बाहर रखा गया है। सरकार की ओर से इस संबंध में अलग शुल्क व्यवस्था लागू रहेगी।
उत्तर प्रदेश में एक वर्ष से अधिक अवधि वाली किरायेदारी के दस्तावेजों का पंजीकरण कानूनी रूप से महत्वपूर्ण है। उपलब्ध रिपोर्टिंग के अनुसार, ऐसे किरायानामों के लिए निर्धारित स्टांप शुल्क और पंजीकरण शुल्क का भुगतान करना होता है। पंजीकरण नहीं कराने की स्थिति में संबंधित पक्षों को स्टांप शुल्क से जुड़े मामलों का सामना करना पड़ सकता है। यही वजह है कि नई शुल्क व्यवस्था में लंबे समय की किरायेदारी के लिए पंजीकरण को अपेक्षाकृत कम लागत वाला बनाने पर जोर दिया गया है।
रेंट एग्रीमेंट के पंजीकरण की लागत अधिक होने पर कई मामलों में मकान मालिक और किरायेदार पंजीकरण से बचते रहे हैं। इससे किरायेदारी की शर्तें औपचारिक दस्तावेज में दर्ज नहीं हो पाती थीं। नई व्यवस्था का उद्देश्य किरायेदारी के दस्तावेजों के पंजीकरण को अधिक सुलभ बनाना और उत्तर प्रदेश नगरीय परिसर किरायेदारी विनियमन अधिनियम, 2021 के प्रावधानों को लागू करने में मदद करना बताया गया है। पंजीकृत किरायानामे में किराये की राशि, अवधि, मकान या परिसर के उपयोग तथा मकान मालिक और किरायेदार की सहमति से तय अन्य शर्तें दस्तावेज के रूप में दर्ज होती हैं। इससे किरायेदारी से जुड़े रिकॉर्ड को औपचारिक रूप मिलता है।
रेंट एग्रीमेंट के पंजीकरण शुल्क में राहत का प्रावधान पहले भी सीमित अवधि के लिए लागू किया गया था। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, पिछली व्यवस्था में 11 नवंबर 2025 से 19 मई 2026 तक पंजीकृत किरायानामों के आधार पर लगभग 8.31 करोड़ रुपये की राजस्व हानि का अनुमान सामने आया था। इसके बाद नई व्यवस्था में पहले की तुलना में शुल्क सीमा को संशोधित किया गया। इस बदलाव के तहत सरकार ने किरायेदारी की अवधि और औसत वार्षिक किराये के आधार पर शुल्क की नई अधिकतम सीमाएं निर्धारित की हैं।
नई व्यवस्था केवल आवासीय मकानों तक सीमित नहीं है। उपलब्ध रिपोर्टिंग में मकान, दुकान और गोदाम जैसे परिसरों को किराये पर देने या लेने वाले पक्षों का उल्लेख किया गया है। ऐसे मामलों में रेंट एग्रीमेंट की अवधि और औसत वार्षिक किराये के आधार पर शुल्क तय किया जाएगा। इसलिए किरायानामा तैयार कराने से पहले संबंधित पक्षों के लिए यह देखना जरूरी होगा कि उनका अनुबंध किस अवधि और किराये की श्रेणी में आता है।