11 साल से फरार ₹1 लाख का इनामी बदमाश आसिफ पुलिस मुठभेड़ में ढेर, यूपी एसटीएफ का जवान भी घायल

07 Jul 2026

करीब एक दशक से पुलिस की गिरफ्त से बाहर चल रहे ₹1 लाख के इनामी बदमाश आसिफ का मंगलवार सुबह अम्बेडकरनगर में यूपी स्पेशल टास्क फोर्स (एसटीएफ) और स्थानीय पुलिस के साथ हुई मुठभेड़ में अंत हो गया। पुलिस के अनुसार, बेवाना थाना क्षेत्र में हुई इस संयुक्त कार्रवाई के दौरान दोनों ओर से हुई फायरिंग में आसिफ घायल हो गया। उसे अस्पताल ले जाया गया, जहां उपचार के दौरान उसकी मौत हो गई। मुठभेड़ में एसटीएफ का एक जवान भी गोली लगने से घायल हुआ है, जिसका इलाज जारी है।

पुलिस के मुताबिक, मारा गया आरोपी आसिफ पुत्र मजहर हुसैन मूल रूप से कानपुर नगर जिले के धुरैया मरकरपुर का रहने वाला था और कई वर्षों से फरार चल रहा था। उसके खिलाफ हत्या, डकैती, लूट और गैंगस्टर अधिनियम समेत 25 से अधिक गंभीर आपराधिक मुकदमे दर्ज थे।

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पुलिस अधिकारियों के अनुसार, कार्रवाई के दौरान हुई गोलीबारी में यूपी एसटीएफ के सिपाही ओमनाथ चौहान भी घायल हो गए। उन्हें तत्काल अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां उनका उपचार चल रहा है। बेवाना थाना प्रभारी प्रभाकांत त्रिपाठी ने बताया कि घायल आरोपी को उपचार के लिए अस्पताल ले जाया गया था, लेकिन इलाज के दौरान उसकी मृत्यु हो गई।

नोएडा एसटीएफ यूनिट के अपर पुलिस अधीक्षक राजकुमार मिश्रा ने बताया कि वर्ष 2014 में जौनपुर के शाहगंज क्षेत्र में हुई डकैती और दोहरे हत्याकांड का मुख्य आरोपी आसिफ ही था। पुलिस के अनुसार, उसने अपने साथियों के साथ एक घर में घुसकर डकैती की थी। इस दौरान परिवार को बंधक बनाया गया और दो महिलाओं की हत्या कर दी गई थी।

इस मामले के बाद जौनपुर पुलिस ने उस पर ₹1 लाख का इनाम घोषित किया था। घटना के बाद से वह लगातार फरार चल रहा था और विभिन्न स्थानों पर अपनी पहचान बदलकर छिपता रहा।

पुलिस के अनुसार, आसिफ के खिलाफ उत्तर प्रदेश के विभिन्न जिलों में हत्या, डकैती, लूट, गैंगस्टर अधिनियम और अन्य गंभीर धाराओं में 25 से अधिक मुकदमे दर्ज थे। वह लंबे समय से पुलिस की वांछित सूची में शामिल था। पुलिस के अनुसार, आसिफ का नाम कई चर्चित आपराधिक घटनाओं में सामने आया था:-

क्या है छैमार गैंग?

पुलिस के अनुसार, आसिफ कुख्यात छैमार गैंग का सरगना था। यह गिरोह चोरी, लूट और डकैती जैसी वारदातों को अंजाम देने के बाद लगातार अपने ठिकाने बदलता रहता है। जांच एजेंसियों का कहना है कि गिरोह के सदस्य पहचान छिपाने के लिए अलग-अलग नाम और स्थानों का इस्तेमाल करते थे, जिससे उनकी गिरफ्तारी कठिन हो जाती थी।

पुलिस के मुताबिक, इस गिरोह की कार्यप्रणाली कच्चा-बनियान और बावरिया गिरोह से मिलती-जुलती बताई जाती है। आरोप है कि गिरोह की महिलाएं दिन में भीख मांगने या कूड़ा बीनने के बहाने संभावित घरों की रेकी करती थीं, जबकि रात में अन्य सदस्य योजनाबद्ध तरीके से वारदात को अंजाम देते थे।

हालांकि, पुलिस ने यह भी स्पष्ट किया है कि गिरोह की आंतरिक संरचना और कार्यप्रणाली से जुड़े कुछ दावे जांच और उपलब्ध सूचनाओं पर आधारित हैं तथा इनकी स्वतंत्र आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।

पुलिस का कहना है कि मुठभेड़ से जुड़े सभी पहलुओं की जांच की जा रही है। साथ ही यह भी पता लगाया जा रहा है कि आरोपी के गिरोह के अन्य सदस्य किन-किन क्षेत्रों में सक्रिय रहे हैं और उनके खिलाफ आगे क्या कार्रवाई की जाएगी।