उत्तर प्रदेश में बढ़ते जल संकट के बीच राज्य सरकार उपचारित अपशिष्ट जल के पुनः उपयोग को लेकर नई नीति को अंतिम रूप देने की प्रक्रिया में है। प्रस्तावित नीति के तहत उपचारित जल को गैर-पेय उपयोगों में व्यापक स्तर पर इस्तेमाल करने का लक्ष्य रखा गया है।
आधिकारिक जानकारी के अनुसार, अब तक सीवेज ट्रीटमेंट के बाद बड़ी मात्रा में जल नदियों में छोड़ा जाता था। नई नीति इस व्यवस्था में बदलाव लाते हुए उपचारित जल को उद्योग, ऊर्जा, सिंचाई, निर्माण, शहरी हरितीकरण और फ्लशिंग जैसे कार्यों में उपयोग के लिए प्रोत्साहित करेगी।
नीति के तहत शहरी स्थानीय निकायों, विभागों और उद्योगों की भूमिकाएं स्पष्ट की जाएंगी, जिससे उपचारित जल के उपयोग के लिए एक नियामक ढांचा तैयार हो सके। केंद्र स्तर पर भी इस पहल को समर्थन मिला है और जल शक्ति मंत्रालय द्वारा इस दिशा में नियमित समीक्षा की जा रही है।
राज्य में शहर-स्तर पर भी तैयारी शुरू हो चुकी है। प्रयागराज और आगरा में सिटी-लेवल रीयूज एक्शन प्लान तैयार किए जा चुके हैं, जबकि वाराणसी अंतिम चरण में है और कानपुर में प्रक्रिया जारी है।
यह पहल जल संसाधनों के प्रबंधन में संरचनात्मक बदलाव की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है, जिसमें जल को पुनर्चक्रित संसाधन के रूप में उपयोग करने पर जोर दिया गया है। नीति के लागू होने के बाद राज्य में उपचारित अपशिष्ट जल के उपयोग को संस्थागत रूप देने की प्रक्रिया आगे बढ़ेगी।