लखनऊ, 30 जून। यूपीटीईटी-2026 में शामिल होने वाले बेसिक शिक्षा विभाग के सेवारत शिक्षकों को राज्य सरकार ने महत्वपूर्ण राहत दी है। शासन ने निर्णय लिया है कि परीक्षा में अभ्यर्थी के रूप में शामिल होने वाले शिक्षकों को उनकी परीक्षा तिथि पर विशेष अवकाश दिया जाएगा, ताकि वे बिना किसी प्रशासनिक या सेवा संबंधी बाधा के परीक्षा में शामिल हो सकें।
इस संबंध में विशेष सचिव अवधेश कुमार तिवारी की ओर से शिक्षा निदेशक (बेसिक) को निर्देश जारी किए गए हैं। शासन का कहना है कि इस व्यवस्था का उद्देश्य पात्र शिक्षकों की परीक्षा में निर्बाध भागीदारी सुनिश्चित करना है।
उत्तर प्रदेश शिक्षा सेवा चयन आयोग की ओर से यूपीटीईटी-2026 का आयोजन 2, 3 और 4 जुलाई 2026 को किया जाएगा। परीक्षा में बेसिक शिक्षा विभाग के बड़ी संख्या में कार्यरत शिक्षक भी अभ्यर्थी के रूप में शामिल होंगे। इसी को ध्यान में रखते हुए शासन स्तर पर यह निर्णय लिया गया है कि जिन शिक्षकों की परीक्षा जिस दिन होगी, उन्हें उसी दिन विशेष अवकाश स्वीकृत किया जाएगा।
सरकारी विद्यालयों में कार्यरत कई शिक्षक नियमित शैक्षणिक और प्रशासनिक दायित्वों का निर्वहन करते हैं। ऐसे में परीक्षा तिथि और विद्यालयीय कार्य एक ही दिन होने की स्थिति में उन्हें कठिनाई का सामना करना पड़ सकता था।
शासन के नवीन आदेश के बाद पात्र शिक्षक अपनी निर्धारित परीक्षा तिथि पर अवकाश लेकर यूपीटीईटी-2026 में शामिल हो सकेंगे। इससे परीक्षा में उनकी भागीदारी सुनिश्चित करने में मदद मिलेगी।
शासन ने शिक्षा निदेशक (बेसिक) को निर्देश दिए हैं कि आदेश का प्रभावी अनुपालन सुनिश्चित कराया जाए। इसके अलावा शासनादेश की प्रति स्कूल शिक्षा महानिदेशक, उत्तर प्रदेश बेसिक शिक्षा परिषद के सचिव तथा सभी जिला बेसिक शिक्षा अधिकारियों को भी भेजी गई है।
जिला स्तर पर अधिकारियों को आवश्यक कार्रवाई सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए हैं ताकि पात्र शिक्षकों को समय पर विशेष अवकाश उपलब्ध कराया जा सके और परीक्षा प्रक्रिया के दौरान किसी प्रकार की प्रशासनिक बाधा न आए।
यह सुविधा केवल उन सेवारत शिक्षकों को मिलेगी जो—
- बेसिक शिक्षा विभाग में कार्यरत हैं।
- यूपीटीईटी-2026 में अभ्यर्थी के रूप में शामिल हो रहे हैं।
- जिनकी परीक्षा 2, 3 या 4 जुलाई को निर्धारित है।
ऐसे शिक्षकों को उनकी परीक्षा तिथि पर विशेष अवकाश प्रदान किया जाएगा। राज्य सरकार का यह निर्णय शिक्षकों के व्यावसायिक विकास से भी जुड़ा माना जा रहा है। शिक्षक पात्रता परीक्षा में भाग लेने के इच्छुक कार्यरत शिक्षकों को परीक्षा का अवसर उपलब्ध कराने के उद्देश्य से यह व्यवस्था लागू की गई है, जिससे सेवा दायित्व और परीक्षा के बीच संतुलन बनाया जा सके।