>एक समय था जब उत्तर प्रदेश की पहचान केवल गड्ढों से भरी सड़कों, कुव्यवस्था और अव्यवस्थित शहरों से होती थी। लेकिन बीते आठ वर्षों में यूपी ने जो महापरिवर्तन देखा है, वह केवल आंकड़ों की कहानी नहीं, बल्कि जमीनी बदलाव की जीवंत मिसाल है। 2017 में जब मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने उत्तर प्रदेश की बागडोर संभाली, उस वक्त राज्य बुनियादी ढांचे, कानून व्यवस्था और औद्योगिक निवेश जैसे तमाम मानकों पर पिछड़ा हुआ था। न सड़कें थीं, न एयरपोर्ट का जाल, और न ही कोई स्पष्ट विज़न। लेकिन आज उत्तर प्रदेश न केवल देश के सबसे तेज़ी से बढ़ते राज्यों में गिना जा रहा है, बल्कि इंफ्रास्ट्रक्चर के क्षेत्र में उसने एक नया राष्ट्रीय मॉडल भी प्रस्तुत किया है।
>2017 से पहले की सरकारों के पास न तो इच्छाशक्ति थी और न ही विकास की दिशा में कोई ठोस नीति। राज्य में निवेशकों का भरोसा कमजोर था, लॉजिस्टिक्स ढांचा लगभग ठप था और ज़्यादातर परियोजनाएं फाइलों में दबकर रह जाती थीं। सड़कें टूटी हुई थीं, गांव कस्बों से कटे हुए थे और औद्योगिक गतिविधियां नगण्य थीं। लेकिन इन आठ वर्षों में योगी सरकार ने न सिर्फ इस तस्वीर को बदला, बल्कि एक्सप्रेसवे, एयरपोर्ट, मेट्रो और जलमार्गों के माध्यम से यूपी को देश के सबसे कनेक्टेड राज्यों की सूची में लाकर खड़ा कर दिया।
>आज यूपी देश का एकमात्र राज्य है जहां सबसे ज़्यादा एक्सप्रेसवे संचालित हो रहे हैं। जहां कभी लखनऊ-आगरा एक्सप्रेसवे अधूरा था, वहां अब पूर्वांचल, बुंदेलखंड और गोरखपुर लिंक एक्सप्रेसवे जैसे हाईस्पीड कॉरिडोर बन चुके हैं। गंगा एक्सप्रेसवे का निर्माण कार्य भी तेजी से आगे बढ़ रहा है और इसके पूरा होते ही देश के कुल एक्सप्रेसवे नेटवर्क का बड़ा हिस्सा अकेले यूपी में होगा। इन एक्सप्रेसवे के साथ-साथ सरकार ने औद्योगिक क्लस्टर, एमएसएमई पार्क और कृषि आधारित इकाइयों को जोड़ कर अर्थव्यवस्था को नया आयाम दिया है।
>हवाई कनेक्टिविटी के क्षेत्र में भी यूपी ने एक लंबी छलांग लगाई है। 2017 तक जहां केवल लखनऊ और गोरखपुर जैसे गिने-चुने एयरपोर्ट ही सक्रिय थे, वहीं अब प्रदेश में 16 हवाई अड्डे क्रियाशील हैं, जिनमें चार इंटरनेशनल एयरपोर्ट (लखनऊ, वाराणसी, अयोध्या, कुशीनगर) शामिल हैं। नोएडा में निर्माणाधीन जेवर एयरपोर्ट न केवल उत्तर भारत का सबसे बड़ा एयरपोर्ट होगा, बल्कि यह उत्तर प्रदेश को वैश्विक व्यापार और टूरिज्म का केंद्र भी बनाएगा। जल्द ही यूपी देश का पहला ऐसा राज्य बनने वाला है जहां कुल 21 एयरपोर्ट कार्यरत होंगे।
>मेट्रो नेटवर्क की बात करें तो लखनऊ, कानपुर, आगरा, मेरठ और नोएडा जैसे शहरों में मेट्रो संचालन शुरू हो चुका है। प्रयागराज, वाराणसी, गोरखपुर, झांसी और बरेली जैसे शहरों में भी मेट्रो की आधारभूत तैयारियां पूरी हो रही हैं। दिल्ली-मेरठ रैपिड रेल देश की पहली सेमी हाई-स्पीड कनेक्टिविटी है, जिसे लेकर केंद्र और राज्य सरकार के बीच बेहतर तालमेल दिखाई दिया है। इसी तरह, वाराणसी से हल्दिया तक जलमार्ग के विकास ने यूपी को ‘इंटेग्रेटेड ट्रांसपोर्ट हब’ के रूप में भी स्थापित किया है।
>औद्योगिक निवेश की दृष्टि से देखें तो पहले उत्तर प्रदेश निवेश के नक्शे पर ही नहीं था। लेकिन अब डिफेंस कॉरिडोर, फिल्म सिटी, मेडिकल डिवाइस पार्क, टेक्सटाइल पार्क, फूड प्रोसेसिंग हब और डेटा सेंटर जैसे मेगा प्रोजेक्ट्स यूपी को न केवल रोजगार के अवसर दे रहे हैं, बल्कि युवाओं को स्थानीय स्तर पर ही रोज़गार और उद्यमिता के नए विकल्प भी दे रहे हैं। यीडा क्षेत्र में अकेले ₹27,000 करोड़ का निवेश और 16,000 से अधिक रोजगार अवसरों का सृजन इसका प्रमाण है।
>शहरी विकास में भी यूपी ने एक नई पहचान बनाई है। 17 नगर निगम स्मार्ट सिटी परियोजना के तहत तेजी से डिजिटल और स्वच्छ शहरों में बदल रहे हैं। लखनऊ, कानपुर और वाराणसी को स्टेट डेवलपमेंट रीजन के रूप में विकसित किया जा रहा है। सेफ सिटी, क्लीन सिटी और डिजिटल सर्विलांस सिस्टम जैसे कदमों ने इन शहरों को न केवल रहने योग्य बनाया है, बल्कि निवेशकों के लिए भी आकर्षक गंतव्य बना दिया है। देश की पहली रोपवे सेवा भी वाराणसी में शुरू होने जा रही है, जो आधुनिक नगरीय परिवहन का एक नया अध्याय होगा।
>ग्रामीण क्षेत्रों की बात करें तो यहां भी परिवर्तन उतना ही व्यापक है। बीते आठ वर्षों में प्रतिदिन औसतन 11 किलोमीटर नई सड़क और 9 किलोमीटर चौड़ीकरण किया गया है। अब तक 32,000 किलोमीटर से अधिक ग्रामीण सड़कें बनाई जा चुकी हैं। हर जिला मुख्यालय को फोरलेन और ब्लॉक को टू लेन सड़कों से जोड़ने का काम निरंतर जारी है। इससे ग्रामीण क्षेत्रों में न केवल व्यापार और कृषि की पहुँच बढ़ी है, बल्कि स्वास्थ्य और शिक्षा सेवाएं भी गांव-गांव तक पहुंच रही हैं।
>बढ़ती कनेक्टिविटी और धार्मिक पर्यटन स्थलों के कायाकल्प से पर्यटन क्षेत्र को भी अभूतपूर्व गति मिली है। 2017 में जहां यूपी में 21 करोड़ पर्यटक आए थे, वहीं 2023 में यह संख्या बढ़कर 67 करोड़ तक पहुंच गई। प्रयागराज महाकुंभ जैसे आयोजन ने वैश्विक स्तर पर यूपी को सांस्कृतिक पर्यटन की राजधानी बना दिया है।
>इन तमाम उपलब्धियों के साथ उत्तर प्रदेश आज न केवल देश को नेतृत्व दे रहा है, बल्कि एक ऐसा उदाहरण बन चुका है जिसे देखकर दूसरे राज्य भी अपने विकास की दिशा तय कर रहे हैं। योगी सरकार के नेतृत्व में प्रदेश ने साबित किया है कि राजनीतिक इच्छाशक्ति, पारदर्शिता और दीर्घकालिक विज़न हो तो गड्ढों से निकल कर ग्रोथवे की ओर बढ़ना संभव है।