निषाद पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष एवं उत्तर प्रदेश सरकार के मत्स्य विभाग के कैबिनेट मंत्री डॉ. संजय कुमार निषाद ने गुरुवार को वाराणसी दौरे के दौरान सर्किट हाउस सभागार में पत्रकार वार्ता की। इस दौरान उन्होंने मछुआ समाज के उत्थान के लिए केंद्र व राज्य सरकार द्वारा संचालित योजनाओं और समाज की प्रमुख मांगों पर जानकारी दी।
प्रेस वार्ता में डॉ. निषाद ने बताया कि प्रधानमंत्री और मुख्यमंत्री के नेतृत्व में प्रदेश में मछुआ समाज को विकास की मुख्यधारा से जोड़ने का कार्य किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना के तहत एक लाख से अधिक लोगों को सब्सिडी देकर स्वरोजगार से जोड़ा गया है।
इसके अलावा प्रधानमंत्री मछुआ दुर्घटना बीमा योजना, मत्स्य पालन के लिए किसान क्रेडिट कार्ड, मुख्यमंत्री मत्स्य संपदा योजना, निषादराज बोट योजना, माता सुकेता केज कल्चर योजना और एरेशन सिस्टम जैसी योजनाएं संचालित की जा रही हैं। इन योजनाओं के माध्यम से शिक्षा, चिकित्सा, स्वास्थ्य, दैवीय आपदा और विवाह के लिए आर्थिक सहायता उपलब्ध कराई जा रही है।
डॉ. निषाद ने बताया कि प्रधानमंत्री के ड्रीम प्रोजेक्ट के तहत चंदौली जनपद में एशिया की सबसे बड़ी इंटीग्रेटेड मछली मंडी स्थापित की गई है, जिससे मत्स्य पालन क्षेत्र को बढ़ावा मिल रहा है। उन्होंने बताया कि निषाद पार्टी द्वारा प्रदेश में गोरखपुर, प्रयागराज, नोएडा और वाराणसी में चार रैलियां प्रस्तावित की गई थीं। साथ ही 26 अप्रैल को वाराणसी में एक बड़े कार्यक्रम के आयोजन की योजना है।
डॉ. निषाद ने कहा कि मझवार और तुरैहा पहले से अनुसूचित जाति में शामिल हैं, इसलिए केवट, मल्लाह, बिंद, कश्यप, धीवर, रायकवार, बाथम, निषाद और साहनी सहित अन्य उपजातियों को भी परिभाषित कर पिछड़ा वर्ग से हटाकर अनुसूचित जाति में शामिल किए जाने की मांग की जाएगी।
इसके साथ ही ताल-घाट, बालू खनन, श्रेणी-3 की भूमि और क्रिमिनल ट्राइब्स एक्ट के तहत पूर्व में प्राप्त अधिकारों को बहाल करने की मांग भी सरकार के समक्ष रखी जाएगी।