देश की थोक महंगाई दर बढ़कर 9.68 प्रतिशत पर पहुंच गई है, जो इससे पहले 8.26 प्रतिशत थी। थोक स्तर पर कीमतों में आई इस तेजी का असर आगे चलकर खुदरा महंगाई पर भी पड़ सकता है। ऐसे में आने वाले समय में कपड़े, गाड़ियां, इलेक्ट्रॉनिक्स और घर बनाने से जुड़ी लागत बढ़ने की संभावना जताई जा रही है।
रिपोर्ट के मुताबिक, ईंधन और कच्चे माल की कीमतों में तेजी इसकी प्रमुख वजह रही है। पश्चिम एशिया में जारी संकट के कारण कच्चे तेल और प्राकृतिक गैस की कीमतों में 61.51 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई। इसके अलावा पेट्रोलियम उत्पादों की कीमतों में 49.82 प्रतिशत और ईंधन एवं बिजली क्षेत्र में 30.33 प्रतिशत की तेजी देखी गई। औद्योगिक कच्चा माल 9.49 प्रतिशत महंगा हुआ, जबकि फैक्ट्री में बनने वाले सामानों की कीमतों में 7.48 प्रतिशत की बढ़ोतरी दर्ज की गई।
थोक बाजार में कीमतें बढ़ने का असर कुछ समय बाद खुदरा बाजार में भी दिखाई देता है। कंपनियों की उत्पादन लागत बढ़ने के बाद उसका असर उपभोक्ताओं तक पहुंचता है। ऐसे में साबुन, शैंपू, डिटर्जेंट, प्लास्टिक उत्पाद और रेडीमेड कपड़ों जैसी चीजों की कीमतों में बढ़ोतरी हो सकती है।
स्टील और एल्युमिनियम जैसे बेसिक मेटल्स की कीमतों में वृद्धि का असर ऑटोमोबाइल और इलेक्ट्रॉनिक्स सेक्टर पर पड़ सकता है। इसके चलते कार, बाइक, फ्रिज, एसी और वॉशिंग मशीन जैसे उत्पादों की कीमतों में बढ़ोतरी देखने को मिल सकती है। सीमेंट, सरिया और अन्य निर्माण सामग्री की लागत बढ़ने का असर रियल एस्टेट सेक्टर पर भी पड़ सकता है। इससे नया घर बनवाने या फ्लैट खरीदने की लागत बढ़ सकती है।
खाद्य तेल, अंडे, मांस और मछली की कीमतों में बढ़ोतरी के कारण फूड इंडेक्स की महंगाई 4.49 प्रतिशत पर पहुंच गई है। वहीं ट्रांसपोर्टेशन लागत बढ़ने की स्थिति में सब्जियों और अनाज की कीमतों पर भी असर पड़ सकता है।