>उत्तर प्रदेश सरकार की गो-कल्याण नीति अब संरक्षण के साथ नवाचार और महिला आजीविका को जोड़ते हुए आगे बढ़ रही है। एटा जनपद की मलावन गोशाला में शुरू की गई नई पहल इसका उदाहरण है।
>मलावन गोशाला में गोवंश को ठंड से बचाने के लिए फूस और टाट की बोरियों से बने विशेष इको-थर्मल कंबल तैयार किए जा रहे हैं। ये कंबल पर्यावरण अनुकूल होने के साथ कम लागत में तैयार किए जा रहे हैं।
>इसके साथ ही गोशाला में गोबर से वर्मी कम्पोस्ट और गो-कास्ट जैसे उत्पाद बनाए जा रहे हैं, जिनकी बाजार में मांग बताई जा रही है। इस कार्य में स्वयं सहायता समूहों से जुड़ी महिलाओं को जोड़ा गया है।
>एटा के मुख्य विकास अधिकारी डॉ. नागेंद्र नारायण मिश्र ने बताया कि जिलाधिकारी प्रेमरंजन सिंह के निर्देशन में गोशाला को आय का स्थायी स्रोत बनाने की योजना पर काम हो रहा है। उन्होंने बताया कि प्रशिक्षण के माध्यम से 30 सखी दीदियों को गोबर से अगरबत्ती, धूपबत्ती, मोमेंटो और गमले बनाने के लिए तैयार किया जा रहा है।
>इसके अलावा मलावन में राष्ट्रीय राजमार्ग के पास एक स्थायी मार्केट प्लेस विकसित किया जाएगा, जहां गो आधारित उत्पादों की सीधी बिक्री की व्यवस्था होगी।