>उत्तर प्रदेश की मिट्टी में बहती जीवनधाराओं को फिर से संजीवनी मिल रही है। वर्षों से सूखती, गुम होती, और कूड़े में तब्दील हो रही नदियों में अब फिर से बहाव दिख रहा है यह संभव हुआ है मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की दूरदृष्टि और 'एक जनपद, एक नदी' अभियान की वजह से।
>इस ऐतिहासिक पहल ने न केवल नदियों को पुनर्जीवित किया है, बल्कि जनभागीदारी और पर्यावरणीय चेतना को भी जन्म दिया है। बलरामपुर की सुआंव नदी और बहराइच की टेढ़ी नदी इस पुनर्जीवन अभियान की दो चमकदार मिसालें बन चुकी हैं।
>सुआंव नदी में लौटी जीवनधारा: 49 जगहों पर चल रहा पुनरोद्धार कार्य
>बलरामपुर जिले में वर्षों से गाद और कचरे से जूझती सुआंव नदी अब फिर से बहने लगी है। ज़िलाधिकारी पवन अग्रवाल के मुताबिक, 121 हेक्टेयर लम्बाई और 320.61 हेक्टेयर क्षेत्र में फैली इस नदी की बहाली के लिए 49 स्थानों की पहचान की गई है। इनमें से 25 पर काम शुरू हो चुका है और बाकी पर कार्य लगभग पूर्णता की ओर है।
>नगर पालिका परिषद और वन विभाग के सहयोग से नदी के दोनों किनारों की सफाई, नालों की मरम्मत और पौधरोपण का कार्य युद्धस्तर पर जारी है। जहां-जहां नदी के प्रवाह में अवरोध था, वहां मशीनों और स्थानीय श्रमिकों के श्रमदान से सफाई कराई जा रही है।
>टेढ़ी नदी में भी बहाव का संकल्प: बहराइच में जागा जनसहयोग
>बहराइच की 38 किलोमीटर लंबी टेढ़ी नदी भी वर्षों से उपेक्षा की शिकार रही, लेकिन अब हालात बदल रहे हैं। ज़िलाधिकारी मोनिका रानी के अनुसार, नदी की सफाई, झाड़ियाँ हटाना, गाद निकालना और जलधारा को फिर से सक्रिय करना—सभी काम तेजी से हो रहे हैं।
>यह कार्य सिर्फ प्रशासन का नहीं, बल्कि स्थानीय लोगों की भागीदारी से संभव हो रहा है। लोगों ने इसे सरकार का नहीं, अपना अभियान समझा है और शारीरिक श्रम से लेकर संसाधनों तक, हर स्तर पर सहयोग दिया है।
>'जनसहयोग से जलसंरक्षण' बना राज्य का नया मंत्र
>मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने स्पष्ट किया है कि जल संरक्षण केवल सरकार की नहीं, हर नागरिक की नैतिक जिम्मेदारी है। उन्होंने इस पहल को एक सरकारी योजना न मानते हुए इसे सामाजिक आंदोलन का रूप दे दिया है।
>देवीपाटन मंडलायुक्त शशि भूषण लाल सुशील ने बताया कि इस पहल से गोंडा की मनोरमा और श्रावस्ती की बूढ़ी राप्ती नदियों में भी फिर से बहाव शुरू हो चुका है।