किस बात का ढिंढोरा पीट रहे हैं... - महिला आरक्षण संशोधन बिल गिरने पर इकरा हसन का हमला

सपा सांसद बोलीं - महिला आरक्षण नहीं, सिर्फ परिसीमन से जुड़ा संशोधन हुआ खारिज
Bureau 18 Apr 2026, 12:08 PM 1 min read
किस बात का ढिंढोरा पीट रहे हैं... -  महिला आरक्षण संशोधन बिल गिरने पर इकरा हसन का हमला

 

संसद में महिला आरक्षण से जुड़े संविधान संशोधन विधेयक के गिरने के बाद राजनीतिक बयानबाजी तेज हो गई है। इस बीच समाजवादी पार्टी की सांसद इकरा हसन ने सत्ता पक्ष पर निशाना साधते हुए कहा कि जिस बिल के गिरने पर चर्चा हो रही है, वह वास्तविक महिला आरक्षण बिल नहीं था।

 

लोकसभा में प्रतिक्रिया देते हुए इकरा हसन ने कहा कि 2023 में पारित महिला आरक्षण कानून अभी भी यथावत है और वर्तमान घटनाक्रम केवल परिसीमन से जुड़े संशोधन के खारिज होने से संबंधित है। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार देश के चुनावी मानचित्र में बदलाव की कोशिश कर रही थी, जिसे सदन ने स्वीकार नहीं किया।

 

इकरा हसन ने कहा कि महिला आरक्षण से संबंधित मूल विधेयक पहले ही पारित हो चुका है और इसे 2029 से लागू करने की मांग की जा रही है, जिसमें लोकसभा की 543 सीटों पर 33 प्रतिशत आरक्षण सुनिश्चित किया जाए।

 

उन्होंने आगे कहा कि यदि सरकार की मंशा स्पष्ट है तो वह तय समयसीमा में इस व्यवस्था को लागू करेगी, अन्यथा इससे सरकार के रुख पर सवाल उठेंगे।

 

सोशल मीडिया पर भी सपा सांसद ने अपनी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने लिखा कि संसद में जो प्रस्ताव विफल हुआ है, वह महिला आरक्षण नहीं बल्कि परिसीमन से जुड़ा संशोधन था। उन्होंने यह भी कहा कि महिला आरक्षण कानून अधिसूचित है और सुरक्षित है, तथा तथ्यों को तोड़-मरोड़कर पेश करने से बचा जाना चाहिए।

 

इकरा हसन ने यह भी आरोप लगाया कि सरकार जनगणना और परिसीमन के मुद्दों के माध्यम से मूल विधेयक को प्रभावित करने की कोशिश कर रही है। उन्होंने कहा कि 2021 की जनगणना समय पर नहीं हो सकी और अब पुराने आंकड़ों के आधार पर प्रतिनिधित्व तय करने का प्रयास किया जा रहा है।

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