उत्तर प्रदेश में स्कूल से बाहर रह गए बच्चों को दोबारा शिक्षा की मुख्यधारा से जोड़ने के लिए बेसिक शिक्षा विभाग बुधवार, 16 जुलाई से प्रदेशव्यापी घर-घर सर्वे अभियान शुरू करने जा रहा है। एक महीने तक चलने वाले इस विशेष अभियान के दौरान ऐसे बच्चों की पहचान की जाएगी, जिन्होंने या तो कभी स्कूल में प्रवेश नहीं लिया या नामांकन के बाद पढ़ाई बीच में छोड़ दी।
बेसिक शिक्षा विभाग के अनुसार यह अभियान 16 जुलाई से 14 अगस्त तक चलेगा। सर्वे में चिन्हित छह से 14 वर्ष आयु वर्ग के सभी बच्चों का आयु के अनुरूप कक्षा में प्रवेश सुनिश्चित कराया जाएगा, ताकि कोई भी बच्चा शिक्षा के अधिकार से वंचित न रहे।
महानिदेशक स्कूल शिक्षा मोनिका रानी की ओर से जारी निर्देशों के अनुसार अभियान में जिला शिक्षा एवं प्रशिक्षण संस्थान (डायट) के डीएलएड प्रशिक्षु घर-घर जाकर बच्चों का सर्वे करेंगे। सर्वे के दौरान प्रत्येक परिवार से बच्चों की शैक्षिक स्थिति की जानकारी एकत्र की जाएगी और स्कूल से बाहर रहने वाले बच्चों का विवरण दर्ज किया जाएगा।
विभाग ने स्पष्ट किया है कि ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों के साथ उन इलाकों पर भी विशेष फोकस रहेगा, जहां बच्चों के स्कूल से दूर रहने की आशंका अधिक होती है। इनमें ईंट-भट्ठे, निर्माण स्थल, घुमंतू समुदाय, जनजातीय बस्तियां तथा पलायन प्रभावित परिवार शामिल हैं।
निर्देशों के अनुसार ऐसे बच्चे, जिन्होंने कभी स्कूल में प्रवेश नहीं लिया, उन्हें सर्वे के दौरान चिन्हित किया जाएगा। इसके अलावा जिन बच्चों ने नामांकन तो कराया, लेकिन 30 दिनों से अधिक समय तक लगातार विद्यालय में उपस्थिति दर्ज नहीं कराई, उन्हें भी सर्वे में शामिल किया जाएगा।
विभाग ने यह भी तय किया है कि यदि कोई छात्र वार्षिक मूल्यांकन या राष्ट्रीय उपलब्धि परीक्षण (एनएटी) में 35 प्रतिशत से कम अंक प्राप्त करता है और लंबे समय से विद्यालय से अनुपस्थित है, तो उसे भी 'स्कूल से बाहर' श्रेणी में शामिल करते हुए दोबारा शिक्षा व्यवस्था से जोड़ने की प्रक्रिया शुरू की जाएगी।
सर्वे के दौरान चिन्हित प्रत्येक बच्चे का उसकी आयु के अनुसार उपयुक्त कक्षा में नामांकन कराया जाएगा। विभाग का उद्देश्य केवल बच्चों की पहचान करना नहीं, बल्कि उन्हें दोबारा नियमित रूप से विद्यालय तक पहुंचाना भी है।
इसके लिए स्थानीय स्तर पर शिक्षा विभाग के अधिकारी और विद्यालय प्रशासन आवश्यक समन्वय करेंगे, ताकि नामांकन के बाद बच्चों की नियमित उपस्थिति भी सुनिश्चित की जा सके।
अभियान के दौरान यदि कोई परिवार दूसरे जिले या राज्य में पलायन कर चुका है, तो संबंधित बच्चे को माइग्रेशन प्रमाण पत्र उपलब्ध कराया जाएगा। इस प्रमाण पत्र के आधार पर वह अपने नए निवास स्थान के निकट स्थित विद्यालय में प्रवेश ले सकेगा और उसकी पढ़ाई बिना किसी बाधा के जारी रह सकेगी।
सर्वे अभियान की निगरानी डिजिटल माध्यम से की जाएगी। शिक्षा विभाग ने इसके लिए शारदा पोर्टल और डीबीटी एप का उपयोग करने के निर्देश दिए हैं। अभियान के दौरान जिला, मंडल और राज्य स्तर पर नियमित समीक्षा होगी, ताकि सर्वे, बच्चों की पहचान और नामांकन की प्रगति पर लगातार नजर रखी जा सके।
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