पंचायत चुनाव पर हाईकोर्ट का सख्त रुख, निर्वाचन आयोग से मांगी चुनाव की तारीख - सरकार को 10 जुलाई तक ओबीसी रिपोर्ट देने का निर्देश

ग्राम प्रधानों को प्रशासक बनाए जाने के फैसले को चुनौती देने वाली जनहित याचिका पर सुनवाई, अगली तारीख पर चुनाव कार्यक्रम को लेकर जवाब मांगा।
Bureau 03 Jun 2026, 09:53 PM 1 min read
पंचायत चुनाव पर हाईकोर्ट का सख्त रुख, निर्वाचन आयोग से मांगी चुनाव की तारीख - सरकार को 10 जुलाई तक ओबीसी रिपोर्ट देने का निर्देश

 

उत्तर प्रदेश में पंचायत चुनाव को लेकर चल रहे विवाद के बीच इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ पीठ ने महत्वपूर्ण निर्देश जारी किए हैं। ग्राम प्रधानों का कार्यकाल समाप्त होने के बाद उन्हें प्रशासक के रूप में कार्य जारी रखने की अनुमति देने के सरकारी फैसले को चुनौती देने वाली जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए अदालत ने राज्य निर्वाचन आयोग से पूछा है कि पंचायत चुनाव कब कराए जाएंगे। इसके साथ ही अदालत ने राज्य सरकार को निर्देश दिया है कि पंचायत चुनाव के लिए गठित अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) आयोग की रिपोर्ट आगामी 10 जुलाई तक न्यायालय के समक्ष प्रस्तुत की जाए।

 

क्या है मामला?

उत्तर प्रदेश में ग्राम पंचायतों का कार्यकाल 26 मई को समाप्त हो गया था। इसके बाद राज्य सरकार ने एक शासनादेश जारी कर वर्तमान ग्राम प्रधानों को नई पंचायतों के गठन और पहली बैठक होने तक अथवा अधिकतम छह माह की अवधि तक प्रशासक के रूप में कार्य करने की अनुमति दी थी। सरकार का कहना था कि पंचायतों के प्रशासनिक कार्य प्रभावित न हों, इसलिए यह व्यवस्था लागू की गई है। शासनादेश में यह भी कहा गया कि प्रशासक के रूप में कार्य कर रहे प्रधान कोई नीतिगत निर्णय नहीं लेंगे। विशेष परिस्थितियों में ऐसे प्रस्ताव जिलाधिकारी की अनुमति के बाद ही लागू किए जा सकेंगे।

 

इस शासनादेश को ओमप्रकाश प्रजापति की ओर से दायर जनहित याचिका में चुनौती दी गई है। याचिका में कहा गया है कि ग्राम पंचायतों का कार्यकाल समाप्त होने के बाद प्रशासनिक जिम्मेदारी मौजूदा प्रधानों को सौंपने के बजाय प्रशासनिक अधिकारियों को दी जानी चाहिए थी। याचिकाकर्ता का दावा है कि पूर्व में ऐसे मामलों में प्रशासनिक अधिकारियों के माध्यम से व्यवस्थाएं संचालित की जाती रही हैं। इसी आधार पर न्यायालय से शासनादेश की वैधता की समीक्षा करने का अनुरोध किया गया है।

 

सुनवाई के दौरान क्या हुआ?

बुधवार को हुई सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता अमरेंद्र नाथ त्रिपाठी ने पक्ष रखा। सुनवाई न्यायमूर्ति शेखर बी. सराफ और न्यायमूर्ति अवधेश कुमार चौधरी की खंडपीठ के समक्ष हुई। सुनवाई के दौरान राज्य सरकार ने अदालत को बताया कि पंचायतीराज संस्थाओं में ओबीसी आरक्षण और सीट निर्धारण की प्रक्रिया के लिए पिछड़ा वर्ग आयोग का गठन किया गया है। सरकार का पक्ष था कि आयोग को अपनी रिपोर्ट देने के लिए छह माह का समय दिया गया है और रिपोर्ट आने के बाद ही चुनाव प्रक्रिया आगे बढ़ाई जा सकेगी। हालांकि अदालत ने इस संबंध में राज्य सरकार से जल्द प्रगति रिपोर्ट मांगी और 10 जुलाई तक ओबीसी आयोग की रिपोर्ट प्रस्तुत करने का निर्देश दिया।

 

उत्तर प्रदेश की हजारों ग्राम पंचायतों में निर्वाचित प्रधानों का कार्यकाल समाप्त हो चुका है। ऐसे में पंचायतों के दैनिक प्रशासनिक कार्यों को जारी रखने के लिए सरकार ने वर्तमान प्रधानों को प्रशासक के रूप में कार्य जारी रखने की अनुमति दी थी। इसी निर्णय को लेकर कानूनी विवाद खड़ा हुआ है और अब मामला हाईकोर्ट के समक्ष विचाराधीन है। अदालत के आगामी आदेश इस व्यवस्था की वैधता और पंचायत चुनाव की दिशा दोनों को प्रभावित कर सकते हैं।

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