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दीवार पर लिखा था मौत का कारण, फिर भी बंद हो गई जांच; अब कोर्ट ने पुलिस को दिए नए आदेश

गाजियाबाद के कविनगर में आरती सचान आत्महत्या मामले में मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट ने पुलिस की क्लोजर रिपोर्ट खारिज की, जांच में कमी मानते हुए दोबारा विवेचना के निर्देश
Bureau
Bureau News Desk
06 Jul 2026
04:09 PM
1 min read
दीवार पर लिखा था मौत का कारण, फिर भी बंद हो गई जांच; अब कोर्ट ने पुलिस को दिए नए आदेश
हाइलाइट्स
गाजियाबाद के आरती सचान आत्महत्या मामले में मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट ने पुलिस की क्लोजर रिपोर्ट खारिज कर दी।
अदालत ने माना कि मामले की जांच सभी महत्वपूर्ण पहलुओं पर समुचित तरीके से नहीं की गई।
मृतका के पति ने विवेचना में महत्वपूर्ण साक्ष्यों की अनदेखी और गवाहों के एक जैसे बयान दर्ज किए जाने का आरोप लगाया।
पुलिस ने पहले पर्याप्त साक्ष्य न मिलने की बात कहते हुए अंतिम रिपोर्ट अदालत में दाखिल की थी।

गाजियाबाद। कविनगर क्षेत्र में वर्ष 2024 में हुई आरती सचान आत्महत्या मामले में अदालत ने पुलिस जांच पर सवाल उठाते हुए महत्वपूर्ण आदेश दिया है। मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट ने पुलिस द्वारा दाखिल क्लोजर रिपोर्ट को स्वीकार करने से इनकार कर दिया और मामले की दोबारा विवेचना कराने के निर्देश दिए हैं। अदालत का कहना है कि मामले के सभी पहलुओं की समुचित जांच नहीं की गई।

यह मामला एक फरवरी 2024 का है, जब आरती सचान ने कथित तौर पर आत्महत्या से पहले एक वीडियो बनाया था और अपने घर की दीवार पर कुछ लोगों के नाम लिखते हुए उन्हें अपनी मौत का कारण बताया था। इसके बाद पुलिस ने आत्महत्या के लिए उकसाने के आरोप में मुकदमा दर्ज कर जांच शुरू की थी।

पुलिस ने विवेचना के दौरान गवाहों के बयान, घटनास्थल का निरीक्षण, फोरेंसिक विज्ञान प्रयोगशाला (एफएसएल) की रिपोर्ट, सीसीटीवी फुटेज और अन्य उपलब्ध साक्ष्यों की जांच की। इसके बाद विवेचक ने अदालत में अंतिम रिपोर्ट दाखिल करते हुए कहा कि आरोपितों के खिलाफ आत्महत्या के लिए उकसाने के पर्याप्त साक्ष्य नहीं मिले।इसी आधार पर पुलिस ने मामले में क्लोजर रिपोर्ट प्रस्तुत की थी।

मृतका के पति मनोज सचान ने पुलिस की अंतिम रिपोर्ट का विरोध करते हुए अदालत में विरोध याचिका दाखिल की। उनका आरोप था कि विवेचना के दौरान कई महत्वपूर्ण तथ्यों और साक्ष्यों की अनदेखी की गई। उन्होंने यह भी कहा कि कई गवाहों के बयान लगभग एक जैसे दर्ज किए गए, जिससे जांच की निष्पक्षता पर सवाल खड़े होते हैं। मनोज सचान का कहना था कि उनकी पत्नी पड़ोस में रहने वाले कुछ लोगों की कथित प्रताड़ना से परेशान थीं और इसी कारण उन्होंने आत्महत्या जैसा कदम उठाया।

मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट ने उपलब्ध अभिलेखों और विरोध याचिका का परीक्षण करने के बाद माना कि आत्महत्या के कारणों और याचिका में उठाए गए बिंदुओं की समुचित जांच नहीं की गई। अदालत ने पुलिस की क्लोजर रिपोर्ट निरस्त करते हुए कविनगर थाना प्रभारी को मामले की दोबारा विवेचना कराने का आदेश दिया है।

मनोज सचान ने पहले भी आरोप लगाया था कि घटना से पहले उन्होंने अपनी पत्नी के साथ कई बार पुलिस से सहायता की मांग की थी, लेकिन उन्हें राहत नहीं मिली। उनका दावा है कि उन्होंने 24 बार पुलिस अधिकारियों से गुहार लगाई, इसके बावजूद कोई प्रभावी कार्रवाई नहीं हुई।

इन आरोपों को लेकर उस समय पुलिस अधिकारियों की कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठे थे। हालांकि, इस संबंध में अदालत के वर्तमान आदेश में केवल जांच प्रक्रिया पर टिप्पणी की गई है।

मनोज सचान की शिकायत पर कविनगर थाने में प्रमोद कश्यप, सविता कश्यप, अचल कश्यप, विपिन, उनकी पत्नी, चंद्रपाल केन एवं उनके परिवार के सदस्यों, योगेंद्र कपूर, लोकेंद्र, कविता, हिना और अर्पण सहित कई लोगों के खिलाफ आत्महत्या के लिए उकसाने के आरोप में मुकदमा दर्ज किया गया था।

मामले की जांच के दौरान सामने आया था कि आरती सचान ने कथित तौर पर आत्महत्या से पहले घर की दीवार पर कुछ लोगों के नाम लिखे थे और उन्हें अपनी मौत का कारण बताया था। पुलिस ने इस तथ्य को भी विवेचना का हिस्सा बनाया था। अब अदालत ने पूरे मामले की दोबारा जांच कराने के निर्देश दिए हैं।

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